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Bulandshahar News: प्रसव के दौरान नवजात की मौत, आशा-दाई पर गर्दन काटने का आरोप
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जहांगीराबाद के गांव रूठा में नवजात की मौत के बाद विलाप करते परिजन। संवाद
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जहांगीराबाद। कोतवाली क्षेत्र के गांव रूठा में प्रसव के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि प्रसव में असफल होने पर आरोपियों ने जिंदा बच्चे की गर्दन काट दी, जिससे बच्चे का आधा शरीर बाहर आ गया और सिर महिला के पेट में ही रह गया। प्रसव एक निजी आवास में कराया जा रहा था। इस घटना के बाद आशा और दाई मौके से फरार हो गईं। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, वारदात के बाद परिजनों ने हंगामा किया, जिन्हें पुलिस ने समझा बुझाकर शांत किया।
गांव रूठा निवासी पीड़ित झम्मन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 25 जनवरी को उनके परिवार की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई थी। परिजनों ने गांव की आशा कार्यकर्ता रूपवती को सूचना दी और उससे सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा। आरोप है कि आशा ने कमीशन के लालच में परिजनों को गुमराह किया और गर्भवती को अस्पताल न ले जाकर निजी वाहन से नगर के मोहल्ला नई बस्ती निवासी दाई जमीला के घर ले गईं।
परिजनों के मुताबिक, गर्भवती महिला की स्थिति सामान्य नहीं थी, लेकिन आशा और दाई ने अधिक पैसे ऐंठने के चक्कर में जबरन प्रसव कराने का प्रयास शुरू कर दिया। जब काफी कोशिशों के बाद भी प्रसव सफल नहीं हुआ, तो आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि नवजात का पैर बाहर आने पर उसे उल्टा बताकर धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी गई।
इस वीभत्स कृत्य के बाद जब जच्चा की हालत बिगड़ने लगी, तो आशा और दाई उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग निकलीं। परिजनों ने पीड़िता को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देख उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेरठ में चिकित्सकों ने काफी मशक्कत के बाद महिला के पेट में फंसी नवजात की गर्दन को बाहर निकाला। 26 जनवरी की शाम नवजात के शव का पोस्टमार्टम मेरठ में ही कराया गया। परिजनों के अनुसार, जच्चा की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर है।
जमकर हुआ हंगामा, कार्रवाई के आश्वासन पर हुआ अंतिम संस्कार
घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। पीड़ित परिवार इस बात पर अड़ गया था कि जब तक आरोपियों को पकड़ा नहीं जाता, वे मासूम का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपी आशा रूपवती और दाई जमीला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में बच्चे को सुपुर्द-ए-खाक किया।
सरकारी लापरवाही ने खोली अवैध क्लीनिकों की पोल
लोगों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास कई निजी क्लीनिक और दाई केंद्र और भी संचालित हो रहे हैं, जहां न तो प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण। इसके बावजूद लंबे समय से यहां प्रसव कराए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ये अवैध क्लीनिक खुलेआम काम कर रहे हैं। न तो इनकी नियमित जांच होती है और न ही शिकायतों पर सख्त कार्रवाई।
इनसेट: एक माह पहले भी जच्चा-बच्चा की हो चुकी है मौत
करीब एक माह पहले जहांगीराबाद के बुद्ध पैंठ क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। उस मामले में भी इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। साथ ही गांव की आशा कार्यकर्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था।
घटना से आक्रोशित पीड़िता के रिश्तेदार किन्नर और उनके साथियों ने अस्पताल में हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें बामुश्किल शांत किया था। इसके बाद अगले दिन किन्नर समाज के लोगों ने मुख्यालय पहुंचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे।
पीड़ित पक्ष की तहरीर पर आशा और दाई के विरुद्ध गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। नवजात के शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। अवैध रूप से प्रसव केंद्र चलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। — विकास प्रताप सिंह चौहान, सीओ अनूपशहर
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गांव रूठा निवासी पीड़ित झम्मन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 25 जनवरी को उनके परिवार की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई थी। परिजनों ने गांव की आशा कार्यकर्ता रूपवती को सूचना दी और उससे सरकारी अस्पताल ले जाने को कहा। आरोप है कि आशा ने कमीशन के लालच में परिजनों को गुमराह किया और गर्भवती को अस्पताल न ले जाकर निजी वाहन से नगर के मोहल्ला नई बस्ती निवासी दाई जमीला के घर ले गईं।
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परिजनों के मुताबिक, गर्भवती महिला की स्थिति सामान्य नहीं थी, लेकिन आशा और दाई ने अधिक पैसे ऐंठने के चक्कर में जबरन प्रसव कराने का प्रयास शुरू कर दिया। जब काफी कोशिशों के बाद भी प्रसव सफल नहीं हुआ, तो आरोपियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि नवजात का पैर बाहर आने पर उसे उल्टा बताकर धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी गई।
इस वीभत्स कृत्य के बाद जब जच्चा की हालत बिगड़ने लगी, तो आशा और दाई उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर भाग निकलीं। परिजनों ने पीड़िता को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देख उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेरठ में चिकित्सकों ने काफी मशक्कत के बाद महिला के पेट में फंसी नवजात की गर्दन को बाहर निकाला। 26 जनवरी की शाम नवजात के शव का पोस्टमार्टम मेरठ में ही कराया गया। परिजनों के अनुसार, जच्चा की हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर है।
जमकर हुआ हंगामा, कार्रवाई के आश्वासन पर हुआ अंतिम संस्कार
घटना से गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। पीड़ित परिवार इस बात पर अड़ गया था कि जब तक आरोपियों को पकड़ा नहीं जाता, वे मासूम का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आरोपी आशा रूपवती और दाई जमीला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जल्द गिरफ्तारी के आश्वासन के बाद परिजनों ने गमगीन माहौल में बच्चे को सुपुर्द-ए-खाक किया।
सरकारी लापरवाही ने खोली अवैध क्लीनिकों की पोल
लोगों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास कई निजी क्लीनिक और दाई केंद्र और भी संचालित हो रहे हैं, जहां न तो प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण। इसके बावजूद लंबे समय से यहां प्रसव कराए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ये अवैध क्लीनिक खुलेआम काम कर रहे हैं। न तो इनकी नियमित जांच होती है और न ही शिकायतों पर सख्त कार्रवाई।
इनसेट: एक माह पहले भी जच्चा-बच्चा की हो चुकी है मौत
करीब एक माह पहले जहांगीराबाद के बुद्ध पैंठ क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई थी। उस मामले में भी इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। साथ ही गांव की आशा कार्यकर्ता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था।
घटना से आक्रोशित पीड़िता के रिश्तेदार किन्नर और उनके साथियों ने अस्पताल में हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें बामुश्किल शांत किया था। इसके बाद अगले दिन किन्नर समाज के लोगों ने मुख्यालय पहुंचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे।
पीड़ित पक्ष की तहरीर पर आशा और दाई के विरुद्ध गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। नवजात के शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। अवैध रूप से प्रसव केंद्र चलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। — विकास प्रताप सिंह चौहान, सीओ अनूपशहर
