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Bulandshahar News: फिरौती के लिए अपहरण कर युवक की हत्या में दो भाइयों समेत तीन को उम्रकैद
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए युवक का अपहरण कर उसकी हत्या करने के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश शिवकुमार तिवारी की अदालत ने मनीष, उसके भाई रोहित व जीजा विकास को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
करीब दो वर्ष पहले हुई वारदात के दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। मनीष व रोहित मूल रूप से मेरठ के दौराला, जबकि विकास मेरठ के मुंडाला अजराड़ा क्षेत्र का रहने वाला है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, सिकरोड़ निवासी देवेंद्र कुमार शर्मा ने चार मई 2024 को थाना नंदग्राम में 25 वर्षीय बेटे योगेंद्र शर्मा के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि योगेंद्र एक मई की शाम करीब सात बजे घर से निकला और वापस नहीं लौटा। वह अपनी बाइक सिकरोड़ स्थित बीएस फार्म हाउस के सामने गुरु सर्विस स्टेशन पर खड़ी कर किसी व्यक्ति के साथ चला गया था।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ी नंदग्राम निवासी मनीष ने सगे भाई रोहित और बहनोई विकास के साथ मिलकर उसकी हत्या की है। तीनों ने 50 लाख रुपये की फिरौती वसूलने के इरादे से योगेंद्र को उसके सर्विस सेंटर का किराया देने के बहाने बुलाया था।
तीनों ने उसे एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया और स्विफ्ट डिजायर कार में डालकर पूरी रात इधर-उधर घुमाते रहे। जांच में यह भी सामने आया कि योगेंद्र पर घर से पैसे मंगाने का दबाव बनाया गया, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इसी दौरान इंजेक्शन की अधिक मात्रा के कारण उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
मेरठ में रेलवे लाइन के पास दफनाया था शव : वारदात के बाद तीनों ने साक्ष्य मिटाने के लिए योगेंद्र के शव को मेरठ के सिवाया गांव के जंगल में रेलवे लाइन के पास दफना दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत में 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 10 अहम साक्ष्य पेश किए गए। इन्हीं के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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गाजियाबाद। 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए युवक का अपहरण कर उसकी हत्या करने के मामले में अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश शिवकुमार तिवारी की अदालत ने मनीष, उसके भाई रोहित व जीजा विकास को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर 12-12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
करीब दो वर्ष पहले हुई वारदात के दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। मनीष व रोहित मूल रूप से मेरठ के दौराला, जबकि विकास मेरठ के मुंडाला अजराड़ा क्षेत्र का रहने वाला है।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, सिकरोड़ निवासी देवेंद्र कुमार शर्मा ने चार मई 2024 को थाना नंदग्राम में 25 वर्षीय बेटे योगेंद्र शर्मा के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि योगेंद्र एक मई की शाम करीब सात बजे घर से निकला और वापस नहीं लौटा। वह अपनी बाइक सिकरोड़ स्थित बीएस फार्म हाउस के सामने गुरु सर्विस स्टेशन पर खड़ी कर किसी व्यक्ति के साथ चला गया था।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गढ़ी नंदग्राम निवासी मनीष ने सगे भाई रोहित और बहनोई विकास के साथ मिलकर उसकी हत्या की है। तीनों ने 50 लाख रुपये की फिरौती वसूलने के इरादे से योगेंद्र को उसके सर्विस सेंटर का किराया देने के बहाने बुलाया था।
तीनों ने उसे एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया और स्विफ्ट डिजायर कार में डालकर पूरी रात इधर-उधर घुमाते रहे। जांच में यह भी सामने आया कि योगेंद्र पर घर से पैसे मंगाने का दबाव बनाया गया, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इसी दौरान इंजेक्शन की अधिक मात्रा के कारण उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
मेरठ में रेलवे लाइन के पास दफनाया था शव : वारदात के बाद तीनों ने साक्ष्य मिटाने के लिए योगेंद्र के शव को मेरठ के सिवाया गांव के जंगल में रेलवे लाइन के पास दफना दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत में 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 10 अहम साक्ष्य पेश किए गए। इन्हीं के आधार पर अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।