विंध्य एक्सप्रेसवे: विरोध में निकली किसान क्रांति रथयात्रा, बोले- जान देंगे, जमीन नहीं; 10 अगस्त को पंचायत
चंदौली में विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान क्रांति रथयात्रा निकाली गई। किसानों ने "जान देंगे, जमीन नहीं" और "खेती बचाओ" के नारे लगाए। किसान मोर्चा गांव-गांव पहुंचकर लोगों से समर्थन जुटा रहा है। आंदोलन को तेज करने के लिए 10 अगस्त को महापंचायत आयोजित करने का आह्वान किया गया।
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संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के विरोध में शुरू की गई 'किसान क्रांति-खेती बचाओ रथयात्रा' दूसरे दिन भी गांव-गांव पहुंची। सोमवार को परेवा गांव से आगे बढ़ी यात्रा ने बरठी, चारी, चिरईगांव, महूजी, रामपुर, बरहनी, लक्ष्मणपुर, बकौड़ी और ओयड़चक समेत कई गांवों का भ्रमण किया। इस दौरान किसान नेताओं ने ग्रामीणों से संवाद कर परियोजना के विरोध में एकजुट होने और 10 अगस्त को प्रस्तावित किसान क्रांति पंचायत में शामिल होने का आह्वान किया।
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक मणिदेव चतुर्वेदी ने कहा कि रथयात्रा को प्रत्येक गांव में किसानों और ग्रामीणों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिन गांवों की भूमि परियोजना में अधिग्रहित नहीं हो रही है, वहां के किसान भी आंदोलन के समर्थन में आगे आ रहे हैं।
यात्रा के दौरान किसानों ने कहा कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है और वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। ग्रामीणों ने आंदोलन को नस्ल और फसल बचाने की लड़ाई बताते हुए कहा कि यह केवल जमीन का सवाल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और किसानों की पहचान से जुड़ा मुद्दा है। किसानों ने दोहराया कि जरूरत पड़ने पर वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा संघर्ष करेंगे।
किसान नेताओं ने ग्रामीणों से 10 अगस्त को बिछिया स्थित धरना स्थल पर आयोजित होने वाली 'किसान क्रांति पंचायत' में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की। उन्होंने बताया कि पंचायत में विभिन्न राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि किसानों की समस्याओं पर व्यापक चर्चा हो सके।
संयोजक मणिदेव चतुर्वेदी ने कहा कि विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना से बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उनका आरोप है कि कृषि प्रधान चंदौली में खेती ही अधिकांश परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है, इसलिए किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण उचित नहीं है।
रथयात्रा में अशोक सिंह, श्रवण मौर्य, मणिदेव चतुर्वेदी, राम प्यारे, सुमंत सिंह अन्ना, राम नारायण यादव, अंगद मौर्य, बाबूलाल यादव, जितेंद्र सिंह, परमहंस यादव, नरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और ग्रामीण शामिल रहे।