विश्व आदिवासी दिवस: गूंजा अधिकारों का मुद्दा, सैकड़ों की संख्या में निकला जुलूस; आरक्षण व सम्मान की उठी आवाज
Chandauli News: विश्व आदिवासी दिवस पर चंदौली में आदिवासी अधिकारों की आवाज बुलंद हुई। सैकड़ों लोगों ने जुलूस निकालकर वनाधिकार, आरक्षण और आदिवासी शहीदों के सम्मान की मांग उठाई। सांसद प्रतिनिधि और विधायक ने जुलूस को झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई।
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World Tribal Day: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को नगर में आदिवासीव मूलनिवासी समाज की ओर से जुलूस निकाला गया। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में तीर-धनुष और आदिवासी झंडे लेकर नगर भ्रमण पर निकले। जुलूस के दौरान जल-जंगल-जमीन, वनाधिकार और संवैधानिक अधिकारों को लेकर आवाज बुलंद की गई। नगर भ्रमण के बाद जुलूस सुभाष पार्क पहुंचा, जहां सभा का आयोजन किया गया।
जुलूस को चकिया त्रिमुहानी से पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, मुख्य अतिथि चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह के प्रतिनिधि बबलू सिंह और विधायक प्रभु नारायण यादव ने आदिवासी झंडा दिखाकर रवाना किया। इसके बाद जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सुभाष पार्क पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल रहे। आदिवासी वेशभूषा में सजे लोगों और पारंपरिक हथियारों के साथ निकले दल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।कार्यक्रम का नेतृत्व अधिवक्ता विजय गोंड, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव ने किया।
वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को भूमि देने की मांग
सुभाष पार्क में आयोजित सभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और वनाधिकार कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्रों में लंबे समय से निवास कर रहे गोंड, खरवार, चेरो, पनिका समेत अन्य जनजातीय समाज के लोगों को वनाधिकार कानून के तहत भूमि का अधिकार दिया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। इसके बावजूद आज भी समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। सरकार को वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
शहीदों और आदिवासी महापुरुषों को किया याद
सभा के दौरान भगवान बिरसा मुंडा, गोंड राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह, वीरांगना महारानी दुर्गावती, टांटया मामा भील, पितांबर खरवार, नीलांबर खरवार और गोंड राजा बख्त बुलंद शाह सहित आदिवासी महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन महापुरुषों ने जल-जंगल-जमीन और देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। उपस्थित लोगों ने उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।
चंदौली जिले का नाम महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने की मांग
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की ओर से सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी गईं। इनमें प्रमुख रूप से चंदौली जिले का नाम आदिवासी वीरांगना महारानी दुर्गावती के नाम पर रखने, धानापुर शहीद उद्यान में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों विश्वनाथ गोंड, रामराज गोंड, रंगी गोंड और भगी गोंड की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग शामिल रही।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश में अलग अनुसूचित जनजाति आयोग और अनुसूचित जनजाति वित्त विभाग के गठन की मांग की गई। चकिया तहसील स्थित दिलकुशा गेस्ट हाउस में मौजूद गोंडवाना राज्य चिन्ह को संरक्षित करते हुए उसका जीर्णोद्धार कराने तथा चंदौली में जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने की मांग भी उठाई गई।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद रामकिशुन यादव, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष बृजेश गोंड, वाराणसी जिलाध्यक्ष अतुल गोंड, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी खरवार, टोनी खरवार, पंकज गोंड, प्रदेश सचिव छाया गोंड, संतोष गोंड, गुलाब गोंड, रमापति गोंड, पिंटू बाबा, संजीव गोंड, कांता गोंड, शैलेश गोंड, लक्ष्मण गोंड, मुन्ना गोंड प्रधान, पन्ना गोंड प्रधान, उपेंद्र गोंड और प्रतीक गोंड सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।