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Chitrakoot News: सीएचसी में 10 डॉक्टर की जरूरत, सिर्फ छह
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फोटो 14 सीकेटीपी 01 अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष में लटकता ताला। संवाद
फोटो 14 सीकेटीपी 02 अस्पताल में धूल फांकती दंत मशीन। संवाद
बरगढ़ व मऊ क्षेत्र की एक लाख आबादी प्रभावित
प्रतिदिन 300 से ज्यादा मरीजों की होती ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ (चित्रकूट)। बरगढ़ और मऊ क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में 10 डॉक्टरों की जरूरत है जबकि केवल छह की तैनाती है।
इलाके की स्वास्थ्य सेवाएं इस गंभीर स्थिति के चलते चरमरा गई हैं। वर्तमान में सीएचसी में अधीक्षक समेत दस पद सृजित है। इनके सापेक्ष महज छह पद भरे हुए हैं। चार डॉक्टरों के पद खाली है। विभाग के अनुसार सीएचसी में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मो. हारून और सर्जन डॉ. विद्यासागर की तैनाती है। इनके अलावा एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. ऋृषि, मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रखर निगम, एनसीडी चिकित्सक डॉ. अनीता व अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ डॉ. अनूप कार्यरत हैं। लेकिन सर्जन डॉ. विद्यासागर सप्ताह में तीन दिन मऊ और तीन दिन राजापुर में सेवाएं देते हैं।
यह स्टाफ एक लाख की आबादी की जरूरतों के लिए अपर्याप्त है। अस्पताल में बच्चों के रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक जैसे महत्वपूर्ण पद खाली हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और महिला डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं। दो नर्सों की आवश्यकता के मुकाबले केवल एक नर्स है। सृजित तीन फार्मासिस्ट में से एक ही फार्मासिस्ट की तैनाती है। इससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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धूल फांक रहीं एक्सरे मशीन
दंत चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण दंत चिकित्सा के लिए एक महंगी एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन का कक्ष भी बंद मिला, क्योंकि डॉ. अनूप छुट्टी पर थे। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का संकट बना हुआ है।
बोले जिम्मेदार-- -- --
- सीएचसी तैनात चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मो. हारून ने बताया कि सीएचसी में 10 डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष छह की तैनाती है। सीमित संसाधन से जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
- मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी है। इसे दूर करने के लिए शासन से मांग की जा चुकी है। डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
फोटो 14 सीकेटीपी 02 अस्पताल में धूल फांकती दंत मशीन। संवाद
बरगढ़ व मऊ क्षेत्र की एक लाख आबादी प्रभावित
प्रतिदिन 300 से ज्यादा मरीजों की होती ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ (चित्रकूट)। बरगढ़ और मऊ क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में 10 डॉक्टरों की जरूरत है जबकि केवल छह की तैनाती है।
इलाके की स्वास्थ्य सेवाएं इस गंभीर स्थिति के चलते चरमरा गई हैं। वर्तमान में सीएचसी में अधीक्षक समेत दस पद सृजित है। इनके सापेक्ष महज छह पद भरे हुए हैं। चार डॉक्टरों के पद खाली है। विभाग के अनुसार सीएचसी में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मो. हारून और सर्जन डॉ. विद्यासागर की तैनाती है। इनके अलावा एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. ऋृषि, मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रखर निगम, एनसीडी चिकित्सक डॉ. अनीता व अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ डॉ. अनूप कार्यरत हैं। लेकिन सर्जन डॉ. विद्यासागर सप्ताह में तीन दिन मऊ और तीन दिन राजापुर में सेवाएं देते हैं।
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यह स्टाफ एक लाख की आबादी की जरूरतों के लिए अपर्याप्त है। अस्पताल में बच्चों के रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक जैसे महत्वपूर्ण पद खाली हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और महिला डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हैं। दो नर्सों की आवश्यकता के मुकाबले केवल एक नर्स है। सृजित तीन फार्मासिस्ट में से एक ही फार्मासिस्ट की तैनाती है। इससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
धूल फांक रहीं एक्सरे मशीन
दंत चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण दंत चिकित्सा के लिए एक महंगी एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन का कक्ष भी बंद मिला, क्योंकि डॉ. अनूप छुट्टी पर थे। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का संकट बना हुआ है।
बोले जिम्मेदार
- सीएचसी तैनात चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मो. हारून ने बताया कि सीएचसी में 10 डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष छह की तैनाती है। सीमित संसाधन से जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
- मऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी है। इसे दूर करने के लिए शासन से मांग की जा चुकी है। डॉ. महेंद्र त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।