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Chitrakoot News: कोटरा खांभा टैंक और माइनरों का होगा जीर्णोद्धार

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:43 PM IST
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Kotra Khambha tank and minors to undergo renovation.
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फोटो 14 सीकेटीपी 04 कोटरा खांभा गांव की माइनर। संवाद


दो करोड़ खर्च होंगे, छह गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट/मऊ। तहसील क्षेत्र के कोटरा खांभा गांव में स्थित पुराने टैंक और उससे निकलने वाली माइनरों की मरम्मत कराई जाएगी। इस पर दो करोड़ खर्च होंगे। इससे छह गांवों के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए समय पर पानी मिल सकेगा। साथ ही गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों को भी पेयजल की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सिंचाई विभाग द्वारा कोटरा खांभा गांव में वर्ष 1915 में एक टैंक का निर्माण करवाया गया था। इस टैंक में 400-400 मीटर लंबाई के दो बांध भी बनाए गए थे, जिनसे दो माइनरें निकलती थीं। लगभग 111 वर्ष बीतने के बाद, टैंक की मरम्मत न होने के कारण बांध, पैरापेट वॉल, बोल्डर पिचिंग सहित अन्य हिस्से काफी जर्जर हो गए हैं।
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माइनरों से संबंधित टैंक, वीआरवी के पैरापेट और स्लैब आउटलेट जैसी संरचनाएं भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इस दुर्दशा के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था, जिसके चलते वे लगातार शिकायतें कर रहे थे। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग ने 204.94 लाख रुपये की कार्ययोजना तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजी थी। शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद पुनरुद्धार के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी कर दी गई है। जल्द ही शेष धनराशि भी जारी होने की उम्मीद है, जिसके बाद कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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किसानों को राहत, बढ़ेगी खुशहाली

स्थानीय किसान जय प्रकाश तिवारी और विनोद बलुआ ने बताया कि टैंक से निकलने वाली माइनरों की स्थिति अत्यंत खराब है। अब जब माइनरों की पुनर्स्थापना कराई जाएगी तो इससे फसलों की समय पर सिंचाई हो सकेगी। वर्तमान में पर्याप्त सिंचाई के अभाव में उनकी फसलें खराब हो जाती हैं। इस परियोजना से न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि उत्पादकता भी बढ़ेगी।


भूगर्भ जल स्तर में भी होगा सुधार
अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद ने बताया कि दोनों माइनरों के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। पुनर्स्थापना के कार्य के पूर्ण होने के बाद, छह गांवों के किसानों को सिंचाई की समस्या से पूरी तरह से निजात मिल जाएगी। यह भी बताया कि इन माइनरों से लगभग 144 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। माइनरों में पानी के सुचारू प्रवाह से भूगर्भ जल स्तर में भी सुधार होने की उम्मीद है।
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