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लाइलाज नहीं है कैंसर की बीमारी : डॉ. नरेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 23 Jan 2026 12:47 AM IST
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रुद्रपुर। सीएचसी रुद्रपुर में बृहस्पतिवार को हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान की ओर से निशुल्क कैंसर की प्राथमिक जांच एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कैंप में 142 मरीजों का चिकित्सकों ने जांच कर उचित परामर्श दिया।
शिविर में आने वाले अधिकांश मरीज स्तन में गांठ, गर्भाशय में समस्याएं, मुंह के छाले दाग, पाचन क्रिया ठीक न होने, भूख न लगने आदि दिक्कतों से परेशान थे। सभी मरीजों को कैंसर अस्पताल की तरफ से निशुल्क दवा भी दिया गया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित एएनएम, जीएनएम, संगिनी एवं आशा कार्यकर्ताओं को कैंसर जागरूकता अभियान के तहत कैंसर के लक्षण का प्रशिक्षण तथा उसके इलाज के बारे में जानकारी दी गई। शोध संस्थान के डॉ. नरेंद्र बीरबिया व डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा कैंसर का रोग लाइलाज नहीं है। सही समय पर जांच होने पर न केवल बीमारी से बचा जा सकता है। बल्कि मरीज उचित इलाज कराकर अपनी उम्र पूरी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि लिम्फ नोड्स में शुरू होने वाले कैंसर को लिंफोमा कहा जाता है। लिम्फ नोड्स में कैंसर होने पर शरीर के उस हिस्से में लिम्फ द्रव का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। यदि ऐसा हाथ या कमर में होता है, तो द्रव के जमाव के कारण हाथ या पैर में सूजन आ सकती है। इसे लिम्फोएडेमा कहते हैं। लिम्फ नोड कैंसर (लिम्फोमा) अक्सर इलाज योग्य होता है। खासकर जब इसका जल्दी पता चल जाए।
कई लोग कीमोथेरेपी, विकिरण या स्टेम सेल प्रत्यारोपण जैसे उपचारों के माध्यम से लंबे समय तक रोगमुक्ति प्राप्त कर लेते हैं। हॉजकिन लिम्फोमा को विशेष रूप से अत्यधिक इलाज योग्य माना जाता है। जबकि कई गैर हॉजकिन लिम्फोमा, भले ही पूरी तरह से ठीक न हों पर दीर्घकालिक रूप से प्रबंधनीय होते हैं। जिससे निरंतर देखभाल के साथ पूर्ण जीवन जीना संभव हो जाता है।
जल्दी निदान की आवश्यकता पर जोर देते हुए शिविर व्यवस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता हमेशा से ही कमजोर और उपेक्षित आबादी खासकर ग्रामीणों जिनके पास स्वास्थ्य सेवा के सीमित अवसर हैं या जो लोग ऐसे खर्चों को वहन नहीं कर सकते, उन्हें भी कैंसर की जांच और उचित उपचार जैसी आवश्यक सुविधाएं दिलाना है।
शिविर में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र कुमार राव, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, सत्यवती तिवारी, वीरेंद्र सान्याल, सुशील पांडेय, देवेन्द्र यादव, रामसूरत सिंह, दीनानाथ शुक्ला, नारद मुनि मौजूद रहे।
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शिविर में आने वाले अधिकांश मरीज स्तन में गांठ, गर्भाशय में समस्याएं, मुंह के छाले दाग, पाचन क्रिया ठीक न होने, भूख न लगने आदि दिक्कतों से परेशान थे। सभी मरीजों को कैंसर अस्पताल की तरफ से निशुल्क दवा भी दिया गया।
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इस अवसर पर स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित एएनएम, जीएनएम, संगिनी एवं आशा कार्यकर्ताओं को कैंसर जागरूकता अभियान के तहत कैंसर के लक्षण का प्रशिक्षण तथा उसके इलाज के बारे में जानकारी दी गई। शोध संस्थान के डॉ. नरेंद्र बीरबिया व डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा कैंसर का रोग लाइलाज नहीं है। सही समय पर जांच होने पर न केवल बीमारी से बचा जा सकता है। बल्कि मरीज उचित इलाज कराकर अपनी उम्र पूरी कर सकता है।
उन्होंने कहा कि लिम्फ नोड्स में शुरू होने वाले कैंसर को लिंफोमा कहा जाता है। लिम्फ नोड्स में कैंसर होने पर शरीर के उस हिस्से में लिम्फ द्रव का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। यदि ऐसा हाथ या कमर में होता है, तो द्रव के जमाव के कारण हाथ या पैर में सूजन आ सकती है। इसे लिम्फोएडेमा कहते हैं। लिम्फ नोड कैंसर (लिम्फोमा) अक्सर इलाज योग्य होता है। खासकर जब इसका जल्दी पता चल जाए।
कई लोग कीमोथेरेपी, विकिरण या स्टेम सेल प्रत्यारोपण जैसे उपचारों के माध्यम से लंबे समय तक रोगमुक्ति प्राप्त कर लेते हैं। हॉजकिन लिम्फोमा को विशेष रूप से अत्यधिक इलाज योग्य माना जाता है। जबकि कई गैर हॉजकिन लिम्फोमा, भले ही पूरी तरह से ठीक न हों पर दीर्घकालिक रूप से प्रबंधनीय होते हैं। जिससे निरंतर देखभाल के साथ पूर्ण जीवन जीना संभव हो जाता है।
जल्दी निदान की आवश्यकता पर जोर देते हुए शिविर व्यवस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता हमेशा से ही कमजोर और उपेक्षित आबादी खासकर ग्रामीणों जिनके पास स्वास्थ्य सेवा के सीमित अवसर हैं या जो लोग ऐसे खर्चों को वहन नहीं कर सकते, उन्हें भी कैंसर की जांच और उचित उपचार जैसी आवश्यक सुविधाएं दिलाना है।
शिविर में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र कुमार राव, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, सत्यवती तिवारी, वीरेंद्र सान्याल, सुशील पांडेय, देवेन्द्र यादव, रामसूरत सिंह, दीनानाथ शुक्ला, नारद मुनि मौजूद रहे।
