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Etah News: ग्रामीण परिवहन को मिलेगी रफ्तार, युवाओं को रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:59 PM IST
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एटा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना लागू की गई है। इससे जहां ग्रामीणों की आवाजाही आसान होगी वहीं युवाओं को वाहन संचालन के जरिए आय का मजबूत साधन भी मिलेगा।
एआरएम नरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि इच्छुक युवक 15 से 28 सीटर क्षमता वाले डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन लगाकर दो ग्राम पंचायतों के बीच परिवहन सेवा संचालित कर सकते हैं। वाहन की अधिकतम आयु 8 वर्ष निर्धारित की गई है। इस सेवा संचालन का अनुबंध 10 वर्ष के लिए होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 5 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। बताया कि आवेदन के लिए 2000 रुपये शुल्क जमा करना होगा जबकि प्रति वाहन 3000 सिक्योरिटी राशि ली जाएगी, जिसे बाद में वापस कर दिया जाएगा।
वाहन स्वामी को निगम को मासिक 1500 शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त योजना में वाहन स्वामी को परमिट शुल्क से 100 प्रतिशत छूट मिलेगी और निर्धारित सीमा तक किराया वसूलने का अधिकार रहेगा। संचालक स्वयं अपने मार्ग, फेरे और समय का निर्धारण कर सकेंगे हालांकि प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन कम से कम दो फेरे लगाना अनिवार्य होगा। दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को मुआवजा या बीमा देने की जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होगी। योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी निगम की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह योजना ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए आजीविका का नया द्वार खोलेगी।
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एआरएम नरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि इच्छुक युवक 15 से 28 सीटर क्षमता वाले डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहन लगाकर दो ग्राम पंचायतों के बीच परिवहन सेवा संचालित कर सकते हैं। वाहन की अधिकतम आयु 8 वर्ष निर्धारित की गई है। इस सेवा संचालन का अनुबंध 10 वर्ष के लिए होगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर 5 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। बताया कि आवेदन के लिए 2000 रुपये शुल्क जमा करना होगा जबकि प्रति वाहन 3000 सिक्योरिटी राशि ली जाएगी, जिसे बाद में वापस कर दिया जाएगा।
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वाहन स्वामी को निगम को मासिक 1500 शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त योजना में वाहन स्वामी को परमिट शुल्क से 100 प्रतिशत छूट मिलेगी और निर्धारित सीमा तक किराया वसूलने का अधिकार रहेगा। संचालक स्वयं अपने मार्ग, फेरे और समय का निर्धारण कर सकेंगे हालांकि प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन कम से कम दो फेरे लगाना अनिवार्य होगा। दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को मुआवजा या बीमा देने की जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होगी। योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी निगम की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह योजना ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए आजीविका का नया द्वार खोलेगी।