{"_id":"6a4aa813f740f0fbe0026504","slug":"tank-dry-for-eight-years-population-of-thousands-drinking-saline-water-farrukhabad-news-c-222-1-frk1004-144822-2026-07-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: आठ साल से सूखी पड़ी टंकी, हजारों की आबादी पी रही खारा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: आठ साल से सूखी पड़ी टंकी, हजारों की आबादी पी रही खारा पानी
विज्ञापन
फोटो-19, बंद पड़ी गांव कुम्हरौर में पानी की टंकी। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमृतपुर। विकास खंड राजेपुर के गांव कुम्हरौर में पेयजल की सरकारी योजना पिछले आठ वर्षों से दम तोड़ रही है। वर्ष 2006-07 में लाखों रुपये की लागत से बनी जल निगम की टंकी आज भी शोपीस बनी हुई है, जबकि करीब आठ हजार की आबादी वाला गांव खारा और पीला पानी पीने को मजबूर है। ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी से वर्षों से एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ। शिकायतों और जनप्रतिनिधियों के पत्रों के बावजूद जल निगम अब तक व्यवस्था बहाल नहीं कर सका है।
ग्रामीणों ने बताया कि टंकी का नलकूप रिबोर न होने और सबमर्सिबल खराब होने से योजना पूरी तरह बंद पड़ी है। गांव में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप और निजी हैंडपंप भी खारा व पीला पानी उगल रहे हैं, जिससे लोगों को शुद्ध जल के लिए पड़ोसी गांवों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवार आरओ प्लांट से पानी के कैंपर मंगवा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में प्रतिदिन 200 से अधिक पानी के कैंपर पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी में यह समस्या और विकराल हो गई है।
ग्राम प्रधान हिमानी सिंह ने बताया कि पानी की टंकी चालू कराने के लिए जल निगम और जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि गांव में आज तक पूरी पाइपलाइन भी नहीं बिछाई गई। जहां पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं, वहां आज तक मरम्मत भी नहीं कराई गई है, जिससे लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन
जल निगम के जूनियर इंजीनियर अखिलेश कुमार ने बताया कि टंकी का नलकूप खराब है। इसका एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कराकर पानी की आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
ग्रामीणों की जुबानी
फोटो-20, प्रभाकर त्रिवेदी
पानी की टंकी आठ साल से बंद पड़ी है। गांव के हैंडपंपों से खारा और पीला पानी निकलता है। गरीब परिवारों को पीने का पानी दूसरे गांव से लाना पड़ता है, जबकि सक्षम लोग आरओ के कैंपर मंगवाने को मजबूर हैं।
प्रभाकर त्रिवेदी
फोटो-21, प्रशांत मिश्रा
शुद्ध पानी न मिलने से पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। गांव का पानी पीने योग्य नहीं है। कई बार जल निगम से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। प्रशांत मिश्रा
विज्ञापन
ग्रामीणों ने बताया कि टंकी का नलकूप रिबोर न होने और सबमर्सिबल खराब होने से योजना पूरी तरह बंद पड़ी है। गांव में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप और निजी हैंडपंप भी खारा व पीला पानी उगल रहे हैं, जिससे लोगों को शुद्ध जल के लिए पड़ोसी गांवों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवार आरओ प्लांट से पानी के कैंपर मंगवा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में प्रतिदिन 200 से अधिक पानी के कैंपर पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी में यह समस्या और विकराल हो गई है।
विज्ञापन
ग्राम प्रधान हिमानी सिंह ने बताया कि पानी की टंकी चालू कराने के लिए जल निगम और जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि गांव में आज तक पूरी पाइपलाइन भी नहीं बिछाई गई। जहां पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं, वहां आज तक मरम्मत भी नहीं कराई गई है, जिससे लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन
जल निगम के जूनियर इंजीनियर अखिलेश कुमार ने बताया कि टंकी का नलकूप खराब है। इसका एस्टीमेट तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। बजट मिलते ही मरम्मत कराकर पानी की आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
ग्रामीणों की जुबानी
फोटो-20, प्रभाकर त्रिवेदी
पानी की टंकी आठ साल से बंद पड़ी है। गांव के हैंडपंपों से खारा और पीला पानी निकलता है। गरीब परिवारों को पीने का पानी दूसरे गांव से लाना पड़ता है, जबकि सक्षम लोग आरओ के कैंपर मंगवाने को मजबूर हैं।
प्रभाकर त्रिवेदी
फोटो-21, प्रशांत मिश्रा
शुद्ध पानी न मिलने से पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। गांव का पानी पीने योग्य नहीं है। कई बार जल निगम से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। प्रशांत मिश्रा

फोटो-19, बंद पड़ी गांव कुम्हरौर में पानी की टंकी। संवाद

फोटो-19, बंद पड़ी गांव कुम्हरौर में पानी की टंकी। संवाद