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Farrukhabad News: दो दिन के अभियान ने पूर्व की कार्रवाई को दिखाया आईना
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फर्रुखाबाद। स्कूली बच्चों को सुरक्षित लाने और ले जाने के सख्त निर्देश के बावजूद स्थानीय अधिकारी सिर्फ उन्हीं वाहनों की जांच तक सीमित रहे, जो स्कूलों में पंजीकृत थे। अफसरों को सड़क पर बेधड़क दौड़ते ऐसे वाहन नहीं दिखे, जो स्कूली वाहन में पंजीकृत तो दूर उनका व्यावसायिक पंजीकरण भी नहीं था। अमर उजाला की पड़ताल में सच सामने आया तो उप परिवहन आयुक्त (कानपुर परिक्षेत्र) रामरतन सोनी ने सख्ती की। चार जिलों के अफसरों की टीमों के अभियान ने पूर्व में हुई कार्रवाई को आईना दिखाया।
शासन ने एक से 15 अप्रैल तक स्कूली वाहनों के जरूरी कागजात की जांच करने के निर्देश थे। मिशन सेफ फ्यूचर के रूप में चले दूसरे चरण में एक से 15 जुलाई तक स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की सघन जांच करनी थी। अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर), फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, आपातकालीन निकास, चालकों का पुलिस सत्यापन, सभी सीटों पर बेल्ट आदि बिंदुओं की जांच होनी थी। जिम्मेदारों ने दोनों ही अभियान अधिकांश उन स्कूली वाहनों पर चलाया, जो पंजीकृत थे। इनमें भी फिटनेस, चालक की स्थिति समेत चंद बिंदु ही शामिल रहे। जबकि जिलेभर में ऐसे वाहनों की संख्या 500 से अधिक होगी, जो न तो स्कूली वाहन में पंजीकृत हैं और न ही व्यावसायिक। यहां तक कि टेंपो, ई-रिक्शा में चालक के लिए बनी सीट पर दो-दो स्कूली बच्चे बैठाए जा रहे हैं।
अमर उजाला ने स्कूली वाहनों का सच दिखाने के लिए पड़ताल की, तो परिवहन विभाग के अफसरों का सच सामने आ गया। कई वैन, इलेक्ट्रिक वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे भरे मिले। यही नहीं बिना नंबर प्लेट टेंपो चालक क्षमता से दोगुने छात्रों को ले जाते मिले। खबर का संज्ञान लेकर उप परिवहन आयुक्त (कानपुर परिक्षेत्र) रामरतन सोनी ने अपनी मौजूदगी में आरटीओ प्रवर्तन कानपुर राहुल श्रीवास्तव समेत कई अफसरों के साथ 24 जुलाई को अभियान चलाया। उन्होंने हालात बेहद खराब दिखे। 25 जुलाई को आरटीओ प्रवर्तन कानपुर की अगुवाई में चार जिलों के परिवहन विभाग के अफसरों की टीमें बनाकर सघन चेकिंग कराई। 42 वाहनों के चालान और छह वाहन बंद कराए। इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर चलाए गए अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बहरहाल अब भी बड़ी संख्या में वाहन मनमाने तरीके से बच्चों को ढो रहे हैं। आरटीओ प्रवर्तन कानपुर राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि अमानक स्कूली वाहनों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा।
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शासन ने एक से 15 अप्रैल तक स्कूली वाहनों के जरूरी कागजात की जांच करने के निर्देश थे। मिशन सेफ फ्यूचर के रूप में चले दूसरे चरण में एक से 15 जुलाई तक स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानकों की सघन जांच करनी थी। अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर), फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, आपातकालीन निकास, चालकों का पुलिस सत्यापन, सभी सीटों पर बेल्ट आदि बिंदुओं की जांच होनी थी। जिम्मेदारों ने दोनों ही अभियान अधिकांश उन स्कूली वाहनों पर चलाया, जो पंजीकृत थे। इनमें भी फिटनेस, चालक की स्थिति समेत चंद बिंदु ही शामिल रहे। जबकि जिलेभर में ऐसे वाहनों की संख्या 500 से अधिक होगी, जो न तो स्कूली वाहन में पंजीकृत हैं और न ही व्यावसायिक। यहां तक कि टेंपो, ई-रिक्शा में चालक के लिए बनी सीट पर दो-दो स्कूली बच्चे बैठाए जा रहे हैं।
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अमर उजाला ने स्कूली वाहनों का सच दिखाने के लिए पड़ताल की, तो परिवहन विभाग के अफसरों का सच सामने आ गया। कई वैन, इलेक्ट्रिक वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे भरे मिले। यही नहीं बिना नंबर प्लेट टेंपो चालक क्षमता से दोगुने छात्रों को ले जाते मिले। खबर का संज्ञान लेकर उप परिवहन आयुक्त (कानपुर परिक्षेत्र) रामरतन सोनी ने अपनी मौजूदगी में आरटीओ प्रवर्तन कानपुर राहुल श्रीवास्तव समेत कई अफसरों के साथ 24 जुलाई को अभियान चलाया। उन्होंने हालात बेहद खराब दिखे। 25 जुलाई को आरटीओ प्रवर्तन कानपुर की अगुवाई में चार जिलों के परिवहन विभाग के अफसरों की टीमें बनाकर सघन चेकिंग कराई। 42 वाहनों के चालान और छह वाहन बंद कराए। इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर चलाए गए अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बहरहाल अब भी बड़ी संख्या में वाहन मनमाने तरीके से बच्चों को ढो रहे हैं। आरटीओ प्रवर्तन कानपुर राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि अमानक स्कूली वाहनों के विरुद्ध अभियान जारी रहेगा।
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