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Fatehpur News: बेसमेंट से नहीं खत्म हो रहा अटैचमेंट
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फोटो-29-शहर के ज्वाला गंज के पास भूतल में संचालित अस्पताल। संवाद
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फतेहपुर। जिले में होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग, हॉस्पिटल का संचालन बेसमेंट में करना नियम विरुद्ध है। इसके बावजूद बेरोकटोक इसका संचालन जारी है। जिले में गठित टीम की ओर से जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, फायर विभाग की ओर से सुरक्षा मानक पूरा करने के लिए लगातार नोटिस जारी की जा रही है।
जिले के होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग, हॉस्पिटल के बेसमेंट में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगती नहीं दिख रही है। यहां आने जाने के लिए मार्ग भी संकरे है। होटलों व रेस्टोरेंट में अंदर ही रसोई बनाई गई है, जिनमें पीएनजी गैस के साथ ही रसोई गैस सिलिंडर का प्रयोग भी किया जा रहा है। जिले में गठित टीम की ओर से जांच भी की जा रही है। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से संचालकों की मनमानी जारी है। इसकी जानकारी के बाद संचालकों को नोटिस जारी की जा रही है। नोटिस में भी सुरक्षा मानकों को पूरा करने की बात कही जा रही है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी जसबीर सिंह ने कहा कि टीम की ओर से लगातार अभियान चलाकर जांच की जा रही है। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वालों को नोटिस भेजा जा रहा है। साथ ही तय समय पर मानक न पूरा करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को भी फायर की एनओसी लेने को कहा गया है। ऐसा न करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
एनओसी नहीं होने के बाद भी कार्रवाई से दूर
अग्निशमन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में मात्र आठ होटलों व 98 नर्सिंग होम संचालकों के पास एनओसी है। इसके विपरीत जिले में करीब 350 से अधिक होटल का संचालन किया जा रहा है। ऐसा ही नर्सिंग होम व अस्पतालों का आंकड़ा है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि बेसमेंट में संचालन अवैध है तो वह सुरक्षा का मानक कैसे पूरा करेंगे। इसके साथ ही फायर विभाग की ओर से स्कूलों को भी नोटिस भेजी गई है। जिनमें फायर विभाग की एनओसी लेने व समयावधि पूरी होने पर रिन्यूअल कराने की बात कही जा रही है। लोगों का मानना है कि कोचिंग में तो कम बच्चे होते हैं, जबकि स्कूल में इनकी संख्या अधिक होती है। बिना फायर विभाग की एनओसी के इनका संचालन नहीं होना चाहिए। इसके बाद भी इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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जिले के होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग, हॉस्पिटल के बेसमेंट में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगती नहीं दिख रही है। यहां आने जाने के लिए मार्ग भी संकरे है। होटलों व रेस्टोरेंट में अंदर ही रसोई बनाई गई है, जिनमें पीएनजी गैस के साथ ही रसोई गैस सिलिंडर का प्रयोग भी किया जा रहा है। जिले में गठित टीम की ओर से जांच भी की जा रही है। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने से संचालकों की मनमानी जारी है। इसकी जानकारी के बाद संचालकों को नोटिस जारी की जा रही है। नोटिस में भी सुरक्षा मानकों को पूरा करने की बात कही जा रही है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी जसबीर सिंह ने कहा कि टीम की ओर से लगातार अभियान चलाकर जांच की जा रही है। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वालों को नोटिस भेजा जा रहा है। साथ ही तय समय पर मानक न पूरा करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों को भी फायर की एनओसी लेने को कहा गया है। ऐसा न करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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एनओसी नहीं होने के बाद भी कार्रवाई से दूर
अग्निशमन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में मात्र आठ होटलों व 98 नर्सिंग होम संचालकों के पास एनओसी है। इसके विपरीत जिले में करीब 350 से अधिक होटल का संचालन किया जा रहा है। ऐसा ही नर्सिंग होम व अस्पतालों का आंकड़ा है। ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि बेसमेंट में संचालन अवैध है तो वह सुरक्षा का मानक कैसे पूरा करेंगे। इसके साथ ही फायर विभाग की ओर से स्कूलों को भी नोटिस भेजी गई है। जिनमें फायर विभाग की एनओसी लेने व समयावधि पूरी होने पर रिन्यूअल कराने की बात कही जा रही है। लोगों का मानना है कि कोचिंग में तो कम बच्चे होते हैं, जबकि स्कूल में इनकी संख्या अधिक होती है। बिना फायर विभाग की एनओसी के इनका संचालन नहीं होना चाहिए। इसके बाद भी इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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