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Firozabad News: कुत्तों और बंदरों ने एक साल में 41,200 लोगों को काटा
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 09 Jan 2026 02:14 AM IST
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फिरोजाबाद। जनपद में आवारा कुत्तों और बंदरों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि हर दिन बड़ी संख्या में लोग इनके हमलों का शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले के हजारों लोग इन जानवरों के आतंक की चपेट में आए।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक कुल 41,200 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जिले में औसतन हर महीने लगभग 3,400 से ज्यादा लोग जानवरों के हमले का शिकार होकर अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं।
सबसे ज्यादा मामले आवारा कुत्तों के काटने के सामने आए हैं, जो गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक झुंड बनाकर घूमते हैं। शहरी इलाकों में बंदरों के हमलों के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। छतों और रास्तों पर बंदरों के आतंक से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। यह समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। विभाग द्वारा जिला अस्पताल के साथ-साथ सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानवर के काटने पर लापरवाही न बरतें और तुरंत सरकारी अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाएं, ताकि रेबीज जैसे जानलेवा खतरे से बचा जा सके।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक कुल 41,200 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जिले में औसतन हर महीने लगभग 3,400 से ज्यादा लोग जानवरों के हमले का शिकार होकर अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं।
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सबसे ज्यादा मामले आवारा कुत्तों के काटने के सामने आए हैं, जो गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक झुंड बनाकर घूमते हैं। शहरी इलाकों में बंदरों के हमलों के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। छतों और रास्तों पर बंदरों के आतंक से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। यह समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। विभाग द्वारा जिला अस्पताल के साथ-साथ सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जानवर के काटने पर लापरवाही न बरतें और तुरंत सरकारी अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाएं, ताकि रेबीज जैसे जानलेवा खतरे से बचा जा सके।