{"_id":"69b3221d35d2577b500f5110","slug":"firozabad-news-birth-death-certificate-firozabad-news-c-169-1-mt11005-169735-2026-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भागदौड़, फाइलों के अंबार में दबी जनता की पुकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भागदौड़, फाइलों के अंबार में दबी जनता की पुकार
विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। नगर निगम में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। महीनों की भागदौड़ और रुपये खर्च करने के बाद भी लोगों के हाथ केवल निराशा लग रही है। कार्यालय में धूल फांकती आवेदनों की मोटी-मोटी फाइलें और कागजों की गड्डियां व्यवस्था की बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही हैं।
नगला दखल निवासी नरेंद्र ने बताया कि उन्होंने साल 2025 में अपने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। उस समय करीब 500 से 700 रुपये खर्च हुए और कार्यालय के दर्जनों चक्कर लगाए। अब जब वे फिर कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनके पुराने कागजात नहीं मिल रहे हैं और उन्हें अब दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सैलई, के रविदास नगर निवासी रतनेश अपने एक परिजन के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लंबे समय से निगम के चक्कर काट रही हैं। उन्हें सरकारी दफ्तर की लेटलतीफी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि महीनों बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है।
आवेदकों का आरोप यह है कि मार्कशीट या श्मशान घाट की रसीद अटेस्ट (प्रमाणित) न होने जैसी छोटी-छोटी तकनीकी कमियों के आधार पर आवेदनों को सीधे निरस्त कर दिया जाता है। इसकी सूचना आवेदक को समय पर नहीं दी जाती। महीनों बाद पता चलता है कि उनका आवेदन रद्द हो चुका है।
Trending Videos
नगला दखल निवासी नरेंद्र ने बताया कि उन्होंने साल 2025 में अपने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। उस समय करीब 500 से 700 रुपये खर्च हुए और कार्यालय के दर्जनों चक्कर लगाए। अब जब वे फिर कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनके पुराने कागजात नहीं मिल रहे हैं और उन्हें अब दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना होगा। सैलई, के रविदास नगर निवासी रतनेश अपने एक परिजन के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लंबे समय से निगम के चक्कर काट रही हैं। उन्हें सरकारी दफ्तर की लेटलतीफी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि महीनों बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आवेदकों का आरोप यह है कि मार्कशीट या श्मशान घाट की रसीद अटेस्ट (प्रमाणित) न होने जैसी छोटी-छोटी तकनीकी कमियों के आधार पर आवेदनों को सीधे निरस्त कर दिया जाता है। इसकी सूचना आवेदक को समय पर नहीं दी जाती। महीनों बाद पता चलता है कि उनका आवेदन रद्द हो चुका है।