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Gonda News: एचटी लाइन से मौत मामले की जांच शुरू, स्कूल में सन्नाटा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:33 PM IST
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दूसरे दिन भी नहीं हटा हाईटेंशन लाइन का तार।
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गोंडा। पोर्टरगंज के पथवलिया गांव में हाईटेंशन लाइन का जर्जर तार टूटकर गिरने से हुई पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के बाद प्रशासन चेता है। शनिवार को विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम ने मौके पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू की, वहीं जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने भी पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देते हुए 15 दिन में पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है।
हादसे का सीधा असर शनिवार को बच्चों की पढ़ाई पर दिखा। घटना स्थल के पास स्थित पथवलिया कंपोजिट विद्यालय में शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। प्रधानाध्यापक अलका गुप्ता, अनीता देवी व शिक्षिकाओं ने बताया कि यहां पर कुल 160 बच्चे पंजीकृत है। जर्जर तार गिरने की घटना के बाद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने झूलते लटकते एचटी लाइन के तारों की मरम्मत नहीं कराई थी। हादसे के बाद भी हालात जस के तस बने हैं।
24 घंटे बाद भी नहीं हटे टूटे तार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के एक दिन बाद भी टूटे हुए तार मौके पर ही पड़े रहे। न तो उन्हें हटाया गया और न ही लाइन दुरुस्त करने की कोई पहल बिजली विभाग के कर्मियों की तरफ से हुई। मृतक के भाई सुधीर तिवारी ने बताया कि हादसे के 24 घंटे बीतने के बाद भी न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही दोषियों के खिलाफ ही कोई कार्रवाई शुरू हुई है।
अफसरों की लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद भी अधिकारी उदासीन बने हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी माह के दूसरे शनिवार की छुट्टी मनाते रहे। इससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। उधर, 30 वर्षीय पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। परिजन न्याय और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं। हालांकि द्वितीय शनिवार के कारण बैंक बंद होने से मुआवजा जारी नहीं हो सका।
जांच समिति पर भी सवाल
मृतक के भाई अमरजीत ने विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। इसके बावजूद जांच समिति में उसी विभाग के अधीक्षण अभियंता को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सफाई देते हुए बताया कि एफआईआर दर्ज होना मात्र किसी को दोषी साबित नहीं करता, जांच के बाद ही कार्रवाई तय होगी।
सवालों में उलझी कारगुजारी
आयुक्त ने 20 जनवरी को एक्सईएन को हाईटेंशन लाइन हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों के पत्र पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हाईटेंशन लाइन स्कूल से हटाने के स्थान पर बगल में ही दूसरा पोल लगाकर लाइन शिफ्ट करने की तैयारी थी। हैरानी की बात यह है कि यह पोल पहले वाले पोल से नीचे हैं, ऐसे में लाइन और नीचे होने से खतरा बढ़ना था।
हादसे को लेकर विभाग की ही दो अलग-अलग रिपोर्ट है। दोनों में अलग-अलग वजह बताई गई हैं। कौन सा सही है और कौन गलत। इसे लेकर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। दोनों रिपोर्ट हादसे के बाद शुक्रवार की रात को वायरल हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि मौके पर ऊर्जा विभाग का कोई अधिकारी पहुंचा नहीं तो फिर जांच रिपोर्ट कैसे बन गई।
पत्रकार के आश्रितों को दें 50 लाख का मुआवजा : श्यामलाल
गोंडा। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के मामले में सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने प्रदेश सरकार से 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि एक-दो दिन में पीड़ित परिवार को मदद नहीं मिली तो गोंडा में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। सपा प्रदेश अध्यक्ष शुक्रवार रात जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव नेताजी रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट ‘गोंडा प्रीमियर लीग सीजन-6’ के समापन समारोह में शामिल होने आए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कहा कि प्रदेश में नए पावर प्लांट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यों के कारण ही आज गांवों तक बिजली पहुंच पा रही है। कहा कि सरकार वादों तक सीमित है।
नियुक्ति के लिए मांगे गए शैक्षिक अभिलेख
गोंडा। पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के बाद जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मदद का बीड़ा उठाया है। उन्होंने रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। डीएम ने कहा कि पीड़ित परिवार की मदद की जाएगी। रंजीत की पत्नी पूजा की नियुक्ति के लिए परिजनों से शैक्षिक अभिलेख मांगे गए हैं। अभिलेख मिलते ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हादसे के बाद से 14 गांवों में गुल है बिजली
गोंडा। पोर्टरगंज के पथवलिया गांव में हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से आसपास के 14 गांवों की बिजली गुल है। बिजली विभाग के अभियंता मौके पर झांकने तक नहीं पहुंचे। गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को बिजली नहीं मिल पा रही है। अभी भी बिजली के टूटे तार पीड़ित परिवार की छत व अगल-बगल पड़े हैं। -संवाद
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हादसे का सीधा असर शनिवार को बच्चों की पढ़ाई पर दिखा। घटना स्थल के पास स्थित पथवलिया कंपोजिट विद्यालय में शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। प्रधानाध्यापक अलका गुप्ता, अनीता देवी व शिक्षिकाओं ने बताया कि यहां पर कुल 160 बच्चे पंजीकृत है। जर्जर तार गिरने की घटना के बाद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग ने झूलते लटकते एचटी लाइन के तारों की मरम्मत नहीं कराई थी। हादसे के बाद भी हालात जस के तस बने हैं।
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24 घंटे बाद भी नहीं हटे टूटे तार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के एक दिन बाद भी टूटे हुए तार मौके पर ही पड़े रहे। न तो उन्हें हटाया गया और न ही लाइन दुरुस्त करने की कोई पहल बिजली विभाग के कर्मियों की तरफ से हुई। मृतक के भाई सुधीर तिवारी ने बताया कि हादसे के 24 घंटे बीतने के बाद भी न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही दोषियों के खिलाफ ही कोई कार्रवाई शुरू हुई है।
अफसरों की लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद भी अधिकारी उदासीन बने हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी माह के दूसरे शनिवार की छुट्टी मनाते रहे। इससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। उधर, 30 वर्षीय पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। परिजन न्याय और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं। हालांकि द्वितीय शनिवार के कारण बैंक बंद होने से मुआवजा जारी नहीं हो सका।
जांच समिति पर भी सवाल
मृतक के भाई अमरजीत ने विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। इसके बावजूद जांच समिति में उसी विभाग के अधीक्षण अभियंता को शामिल किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सफाई देते हुए बताया कि एफआईआर दर्ज होना मात्र किसी को दोषी साबित नहीं करता, जांच के बाद ही कार्रवाई तय होगी।
सवालों में उलझी कारगुजारी
आयुक्त ने 20 जनवरी को एक्सईएन को हाईटेंशन लाइन हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों के पत्र पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। उस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हाईटेंशन लाइन स्कूल से हटाने के स्थान पर बगल में ही दूसरा पोल लगाकर लाइन शिफ्ट करने की तैयारी थी। हैरानी की बात यह है कि यह पोल पहले वाले पोल से नीचे हैं, ऐसे में लाइन और नीचे होने से खतरा बढ़ना था।
हादसे को लेकर विभाग की ही दो अलग-अलग रिपोर्ट है। दोनों में अलग-अलग वजह बताई गई हैं। कौन सा सही है और कौन गलत। इसे लेकर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। दोनों रिपोर्ट हादसे के बाद शुक्रवार की रात को वायरल हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि मौके पर ऊर्जा विभाग का कोई अधिकारी पहुंचा नहीं तो फिर जांच रिपोर्ट कैसे बन गई।
पत्रकार के आश्रितों को दें 50 लाख का मुआवजा : श्यामलाल
गोंडा। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के मामले में सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने प्रदेश सरकार से 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि एक-दो दिन में पीड़ित परिवार को मदद नहीं मिली तो गोंडा में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। सपा प्रदेश अध्यक्ष शुक्रवार रात जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव नेताजी रात्रिकालीन क्रिकेट टूर्नामेंट ‘गोंडा प्रीमियर लीग सीजन-6’ के समापन समारोह में शामिल होने आए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। कहा कि प्रदेश में नए पावर प्लांट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यों के कारण ही आज गांवों तक बिजली पहुंच पा रही है। कहा कि सरकार वादों तक सीमित है।
नियुक्ति के लिए मांगे गए शैक्षिक अभिलेख
गोंडा। पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत के बाद जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मदद का बीड़ा उठाया है। उन्होंने रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। डीएम ने कहा कि पीड़ित परिवार की मदद की जाएगी। रंजीत की पत्नी पूजा की नियुक्ति के लिए परिजनों से शैक्षिक अभिलेख मांगे गए हैं। अभिलेख मिलते ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हादसे के बाद से 14 गांवों में गुल है बिजली
गोंडा। पोर्टरगंज के पथवलिया गांव में हाईटेंशन लाइन का तार गिरने से आसपास के 14 गांवों की बिजली गुल है। बिजली विभाग के अभियंता मौके पर झांकने तक नहीं पहुंचे। गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को बिजली नहीं मिल पा रही है। अभी भी बिजली के टूटे तार पीड़ित परिवार की छत व अगल-बगल पड़े हैं। -संवाद