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Hamirpur Ground Report: सूखी चंद्रावल नदी में कैसे लौटी जलधारा? रिवर फ्रंट से एक्सप्रेसवे तक की जमीनी पड़ताल
Sat, 01 Aug 2026 06:28 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sat, 01 Aug 2026 06:28 PM IST
सार
Hamirpur Ground Report: यूपी सक्षम के तहत अमर उजाला की टीम हमीरपुर पहुंची और चंद्रावल नदी के पुनर्जीवन, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिली कनेक्टिविटी और यमुना रिवर फ्रंट के विकास की जमीनी हकीकत को समझने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों और अधिकारियों से बातचीत कर यह जाना गया कि इन परियोजनाओं का जिले के किसानों, आम लोगों और पर्यटन पर कितना असर पड़ा है।
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Hamirpur Ground Report
- फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
Hamirpur Ground Report: यूपी सक्षम अभियान के तहत अमर उजाला की टीम हमीरपुर पहुंची और जिले में हुए प्रमुख विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखा। टीम ने चंद्रावल नदी के जीर्णोद्धार और पुनर्जीवन, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से बेहतर हुई सड़क कनेक्टिविटी और यमुना रिवर फ्रंट के सौंदर्यीकरण का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय लोगों, किसानों और अधिकारियों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की गई कि इन परियोजनाओं से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आया है। जल संरक्षण, बेहतर आवागमन और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों का आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ा, इसे भी समझने का प्रयास किया गया। आइए जानते हैं हमीरपुर की इस ग्राउंड रिपोर्ट में आखिर जिले की तस्वीर कितनी बदली है।
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चंद्रावल नदी पर क्यो बोले स्थानीय?
हमीरपुर की चंद्रावल नदी में हुए बदलावों को लेकर स्थानीय लोगों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की गई कि पहले और अब की स्थिति में कितना अंतर आया है। लोगों का कहना है कि नदी के जीर्णोद्धार के बाद जल उपलब्धता बढ़ी है, जिससे किसानों और ग्रामीणों को सीधा लाभ मिला है।
स्थानीय निवासी अनिल कुमार ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब चंद्रावल नदी पूरी तरह सूख चुकी थी। लेकिन जीर्णोद्धार और पुनर्जीवन के कार्यों के बाद अब नदी में पूरे वर्ष पानी बना रहता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा है और ग्रामीणों को भी काफी सुविधा हुई है।
स्थानीय निवासी शैलेंद्र ने बताया कि पहले दीपावली तक नदी का पानी पूरी तरह सूख जाता था। अब सफाई, गहरीकरण और अन्य विकास कार्यों के साथ-साथ नदी के जल स्रोतों को पुनर्जीवित किए जाने से पूरे साल पानी उपलब्ध रहता है। उन्होंने बताया कि गांव में घर-घर पेयजल की सुविधा भी बेहतर हुई है, जिससे लोगों को राहत मिली है।
एक अन्य स्थानीय निवासी रघुवंश ने बताया कि पहले गर्मियों के दौरान नदी सूख जाती थी, लेकिन अब इसमें लगातार जलधारा बहती रहती है। उनके अनुसार, इससे किसानों की सिंचाई आसान हुई है और गांव के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि जिले में हुए विभिन्न विकास कार्यों का सकारात्मक असर स्थानीय लोगों के जीवन पर दिखाई दे रहा है।
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एक्सप्रेसवे से हमीरपुर को कितना लाभ?
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से महोबा को मिले लाभों को लेकर अमर उजाला की टीम ने स्थानीय लोगों और अधिकारियों से बातचीत की। लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद जिले की सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे आवागमन आसान होने के साथ-साथ समय की भी बचत हो रही है। स्थानीय निवासी उपेंद्र ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने से महोबा की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। पहले लंबी दूरी तय करने में अधिक समय लगता था और कई सड़कें खराब स्थिति में थीं। अब सड़क नेटवर्क बेहतर होने से सफर सुगम हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
एक अन्य स्थानीय निवासी सन्नी ने बताया कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पहले महोबा से कानपुर पहुंचने में करीब चार घंटे लगते थे, जबकि अब यह दूरी लगभग दो घंटे में तय हो जाती है। इससे लोगों का समय बच रहा है और आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो गया है। मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक सड़क कनेक्टिविटी थी। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने के बाद इस क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनके अनुसार, बेहतर सड़क नेटवर्क से विकास को गति मिली है और लोगों को आवाजाही के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में भी सुविधा हुई है।
यमुना रिवर फ्रंट से बदली हमीरपुर की तस्वीर
हमीरपुर की पहचान यमुना और बेतवा नदियों के संगम वाले जिले के रूप में भी है। हाल के वर्षों में यमुना नदी के किनारे रिवर फ्रंट और तट क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया गया है, जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन विकास कार्यों से स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिला है, इसे लेकर अमर उजाला की टीम ने स्थानीय निवासियों से बातचीत की। स्थानीय निवासी वीरबहादुर ने बताया कि यमुना तट के सौंदर्यीकरण के बाद यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले यह स्थान उपेक्षित और खंडहर जैसा दिखाई देता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने और समय बिताने के लिए आते हैं।
अशोक कुमार ने बताया कि यहां तटबंध का निर्माण होने से क्षेत्र का विकास हुआ है। उनके अनुसार, पहले की तुलना में अब जिले में काफी बदलाव देखने को मिला है और लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित हुई हैं।स्थानीय निवासी निशु ने बताया कि रिवर फ्रंट बनने से यमुना तट की सुंदरता में काफी इजाफा हुआ है। पहले यहां अराजक तत्वों का आना-जाना लगा रहता था, लेकिन अब यह स्थान पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।
हसन खान ने बताया कि पहले यमुना तट की स्थिति काफी खराब थी, लेकिन अब इसे बेहद खूबसूरत रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थान हमीरपुर की ऐतिहासिक धरोहर भी है। यहां तटबंध के पास स्थित कल्पवृक्ष का संरक्षण किया गया है, जिससे इस क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हुई है।