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Hamirpur News: प्रशिक्षुओं को चाय नाश्ता तो दूर प्रशिक्षण सामग्री भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sun, 08 Mar 2026 12:16 AM IST
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फोटो 07 एचएएमपी 18- सिलाई मशीन चलाती प्रशिक्षु। संवाद
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हमीरपुर। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत चल रहे 10 दिवसीय कौशल वृद्धि एवं उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारी अव्यवस्थाएं हैं। प्रशिक्षुओं को शासन से मिलने वाली सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। आरोप है कि कागजों पर ही चाय-नाश्ता व अन्य सामग्री दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि सिलाई ट्रेड के प्रशिक्षुओं को अभ्यास के लिए आवश्यक कपड़ा भी उपलब्ध नहीं हो रहा।
शहर के मेरापुर सड़क पर जेके पैलेस में उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय द्वारा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कौशल वृद्धि एवं उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। योजना के मुताबिक दर्जी व हलवाई ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जा रहा। इसमें दर्जी ट्रेड में 15 बैच बनाए गए हैं। बैच में 20 से 25 प्रशिक्षु रखे गए हैं। इसी तरह हलवाई के चार बैच हैं। इसके तहत सिलाई व हलवाई के काम की बारीकियां सिखाकर उन्हें निपुण बनाने का प्रयास है।
उक्त कार्यक्रम का आयोजन मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र कालपी जनपद जालौन की ओर से किया जा रहा, जबकि संयोजक जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र हमीरपुर का है। सहयोगी के रूप में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इन सबके बावजूद लापरवाही चरम पर है। 26 फरवरी से चल रहे प्रशिक्षण में प्रशिक्षुओं को योजना का पूरा लाभ नहीं मिला है। पौथिया निवासी रानी सachan, प्रीति श्रीवास्तव, महमूदपुर निवासी प्रिया सचान समेत अन्य प्रशिक्षुओं का आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें न तो चाय-नाश्ता दिया जा रहा है और न ही प्रशिक्षण सामग्री पूरी मिल पा रही है। सिलाई प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों को जरूरत के अनुसार कपड़ा भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, इससे उन्हें अभ्यास करने में दिक्कतें हो रही हैं। वहीं कुछ प्रशिक्षुओं को लालच दिया गया है, कि वह किसी के सामने मुंह न खोलें तो उन्हें बाद में योजना का पूरा लाभ मिलेगा।
इनकी भी सुनिए
नाश्ता छोड़िए, चाय तक नहीं मिली
शीतलपुर कनौंटा गांव निवासी महिपाल का कहना है कि हलवाई के लिए आवेदन किया था। इसमें प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। यहां पर प्रशिक्षण के नाम पर सब्जी काटना सिखाया गया। मसाले की मात्रा भर पूछी गई। तीन बजे तक प्रशिक्षण में रहा, इस दौरान नाश्ता छोड़िए साहब चाय तक नहीं मिली। चाय-नाश्ता एक भी दिन नहीं मिला। यह भी नहीं बताया गया कि प्रशिक्षण भत्ता कितना मिलेगा।
चाय तो एक भी दिन नहीं मिली
पौथिया गांव निवासी शिवानी कटियार का कहना है कि 26 फरवरी से प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं, चाय एक भी दिन नहीं मिली। सुबह 10 बजे से तीन बजे तक विभाग की ओर से कुछ भी नहीं मिला। सरकार तो बेहतर काम कर रही है, यहां पर क्रियान्वयन बेहतर हो तब तो उसका लाभ मिले। भोजन का भी समय निर्धारित नहीं है। तीन बज गए अभी तक भोजन के लिए कोई कहने नहीं आया। अब घर जा रही हूं।
तीसरी आंख की नजर में हो प्रशिक्षण
ग्रामोद्योग सेवा संस्थान सिसोलर के उपाध्यक्ष जगमोहन प्रजापति का कहना है कि प्रशिक्षण के नाम पर सब कुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ गोलमाल हो रहा है। कागजों में कुछ और है जबकि हकीकत इससे जुदा है। सरकार की योजना का पूरा लाभ लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम तो तीसरी आंख की नजर में होने चाहिए, तभी कागजी आंकड़ों पर अंकुश लग पाएगा।
वर्जन
प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। इसमें सिलाई के 15 और हलवाई के चार बैच हैं। अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा। प्रशिक्षुओं के लिए चाय-नाश्ता से लेकर भोजन तक की व्यवस्था है। हमारे पास फोटो भेजे जा रहे हैं। अगर वास्तव में वहां लापरवाही हो रही है तो इसकी जांच कराएंगे और जो जिम्मेदार होगा उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जयश्री तिवारी उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र हमीरपुर
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उक्त कार्यक्रम का आयोजन मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र कालपी जनपद जालौन की ओर से किया जा रहा, जबकि संयोजक जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र हमीरपुर का है। सहयोगी के रूप में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इन सबके बावजूद लापरवाही चरम पर है। 26 फरवरी से चल रहे प्रशिक्षण में प्रशिक्षुओं को योजना का पूरा लाभ नहीं मिला है। पौथिया निवासी रानी सachan, प्रीति श्रीवास्तव, महमूदपुर निवासी प्रिया सचान समेत अन्य प्रशिक्षुओं का आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें न तो चाय-नाश्ता दिया जा रहा है और न ही प्रशिक्षण सामग्री पूरी मिल पा रही है। सिलाई प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों को जरूरत के अनुसार कपड़ा भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, इससे उन्हें अभ्यास करने में दिक्कतें हो रही हैं। वहीं कुछ प्रशिक्षुओं को लालच दिया गया है, कि वह किसी के सामने मुंह न खोलें तो उन्हें बाद में योजना का पूरा लाभ मिलेगा।
इनकी भी सुनिए
नाश्ता छोड़िए, चाय तक नहीं मिली
शीतलपुर कनौंटा गांव निवासी महिपाल का कहना है कि हलवाई के लिए आवेदन किया था। इसमें प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था। यहां पर प्रशिक्षण के नाम पर सब्जी काटना सिखाया गया। मसाले की मात्रा भर पूछी गई। तीन बजे तक प्रशिक्षण में रहा, इस दौरान नाश्ता छोड़िए साहब चाय तक नहीं मिली। चाय-नाश्ता एक भी दिन नहीं मिला। यह भी नहीं बताया गया कि प्रशिक्षण भत्ता कितना मिलेगा।
चाय तो एक भी दिन नहीं मिली
पौथिया गांव निवासी शिवानी कटियार का कहना है कि 26 फरवरी से प्रशिक्षण लेने आ रहे हैं, चाय एक भी दिन नहीं मिली। सुबह 10 बजे से तीन बजे तक विभाग की ओर से कुछ भी नहीं मिला। सरकार तो बेहतर काम कर रही है, यहां पर क्रियान्वयन बेहतर हो तब तो उसका लाभ मिले। भोजन का भी समय निर्धारित नहीं है। तीन बज गए अभी तक भोजन के लिए कोई कहने नहीं आया। अब घर जा रही हूं।
तीसरी आंख की नजर में हो प्रशिक्षण
ग्रामोद्योग सेवा संस्थान सिसोलर के उपाध्यक्ष जगमोहन प्रजापति का कहना है कि प्रशिक्षण के नाम पर सब कुछ तो नहीं लेकिन बहुत कुछ गोलमाल हो रहा है। कागजों में कुछ और है जबकि हकीकत इससे जुदा है। सरकार की योजना का पूरा लाभ लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम तो तीसरी आंख की नजर में होने चाहिए, तभी कागजी आंकड़ों पर अंकुश लग पाएगा।
वर्जन
प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। इसमें सिलाई के 15 और हलवाई के चार बैच हैं। अनुभवी प्रशिक्षकों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा। प्रशिक्षुओं के लिए चाय-नाश्ता से लेकर भोजन तक की व्यवस्था है। हमारे पास फोटो भेजे जा रहे हैं। अगर वास्तव में वहां लापरवाही हो रही है तो इसकी जांच कराएंगे और जो जिम्मेदार होगा उस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जयश्री तिवारी उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र हमीरपुर

फोटो 07 एचएएमपी 18- सिलाई मशीन चलाती प्रशिक्षु। संवाद

फोटो 07 एचएएमपी 18- सिलाई मशीन चलाती प्रशिक्षु। संवाद
