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Hamirpur News: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर बाघ की अफवाह, रातभर चला सर्च ऑपरेशन
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हमीरपुर। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बाघ दिखने की वायरल सूचना से सोमवार रात्रि हमीरपुर व जालौन सीमा क्षेत्र में खलबली मच गई। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होते ही वन विभाग, पुलिस व प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। देर रात तक सघन जांच अभियान चलाया गया। हालांकि जांच में सूचना भ्रामक और फर्जी पाई गई।
वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर राठ निवासी उत्कर्ष तिवारी ने सूचना जिलाधिकारी को प्रेषित की थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर डीएफओ ने वन विभाग सरीला की टीम को तत्काल मौके पर भेजा। टीम सोमवार रात करीब 11 बजे से रात एक बजे तक चिकासी पुल व आसपास क्षेत्र में सर्च अभियान चलाती रही। इस दौरान क्षेत्र में गहन जांच की गई तथा स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ भी की गई लेकिन कहीं भी किसी जंगली जानवर की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले। सूचना की पुष्टि न होने पर मामला संदिग्ध माना गया।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि सबसे पहले फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट कर बाघ दिखने की सूचना वायरल की गई थी। पड़ताल में सामने आया कि यह पोस्ट महोबा जिले के गौरहारी गांव निवासी मनोज राजपूत ने साझा की थी। पूछताछ में सूचना की सत्यता प्रमाणित नहीं हो सकी और वायरल फोटो भी पुरानी व भ्रामक निकली। सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाई गई थी जिसके कारण प्रशासनिक अमले को रातभर सतर्क रहना पड़ा।
कहा कि भ्रामक सूचना फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किसी भी सूचना को सोशल मीडिया पर साझा न करें।
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वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर राठ निवासी उत्कर्ष तिवारी ने सूचना जिलाधिकारी को प्रेषित की थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर डीएफओ ने वन विभाग सरीला की टीम को तत्काल मौके पर भेजा। टीम सोमवार रात करीब 11 बजे से रात एक बजे तक चिकासी पुल व आसपास क्षेत्र में सर्च अभियान चलाती रही। इस दौरान क्षेत्र में गहन जांच की गई तथा स्थानीय ग्रामीणों से पूछताछ भी की गई लेकिन कहीं भी किसी जंगली जानवर की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले। सूचना की पुष्टि न होने पर मामला संदिग्ध माना गया।
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वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि सबसे पहले फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट कर बाघ दिखने की सूचना वायरल की गई थी। पड़ताल में सामने आया कि यह पोस्ट महोबा जिले के गौरहारी गांव निवासी मनोज राजपूत ने साझा की थी। पूछताछ में सूचना की सत्यता प्रमाणित नहीं हो सकी और वायरल फोटो भी पुरानी व भ्रामक निकली। सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाई गई थी जिसके कारण प्रशासनिक अमले को रातभर सतर्क रहना पड़ा।
कहा कि भ्रामक सूचना फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान कर ली गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किसी भी सूचना को सोशल मीडिया पर साझा न करें।
