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Hamirpur News: मृतक की जमीन का बैनामा करने वाला कौन, अफसर साधे चुप्पी
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हमीरपुर। मृतक की जमीन का बैनामा करने वाला कौन शख्स है, यह रहस्य बना हुआ है। इस मसले पर जिम्मेदार मौन हैं। धोखाधड़ी का पूरा प्रकरण जांच की फाइल में दबा हुआ है। एक साल का समय बीत गया लेकिन अभी तक प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई है। उप निबंधक का कहना है कि खसरा, खतौनी, आधार कार्ड के आधार पर रजिस्ट्री की गई है। प्रमाणीकरण का उस वक्त यही आधार था।
राठ तहसील के गांव धनौरी खुर्द निवासी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उनके भाई हरिहर सिंह की 14 जून 2022 को लखनऊ से गांव लौटते समय रास्ते में मौत हो गई थी। उस समय उन्हें भाई के नाम खरीदी गई जमीन की जानकारी नहीं थी। जब जमीन की जानकारी हुई तो वरासत के लिए फाइल ऑनलाइन की थी। 16 अप्रैल 2025 को ऑनलाइन आवेदन के आधार पर लेखपाल ने 24 अप्रैल को वरासत की रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद वरासत दर्ज हो गई।
मौत के तीन साल बाद चार अप्रैल 2025 को हरिहर ने 0.535 हेक्टेयर रकबा सरीला तहसील क्षेत्र के पथखुरी गांव निवासी आकाश को बेचा गया। जब उसी जमीन के कथित फर्जी बैनामे के आधार पर दाखिल-खारिज की फाइल लेखपाल के पास पहुंची तो लेखपाल ने पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। बताया जा रहा है कि प्रकरण को दबाने का प्रयास किया गया। तब से लेकर आज तक फर्जी हरिहर सिंह बनकर आया व्यक्ति कौन था। गवाही देने वाले ने भी अपनी सहमति किस आधार पर दे दी। यह तमाम सवाल जांच के बाद उजागर होने थे लेकिन जांच के आदेश के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
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जिलाधिकारी के आदेश पर जांच समिति गठित की गई थी। उप निबंधक राठ, दस्तावेज लेखक समेत गवाहों को नोटिस दिए गए थे। तब से लेकर अब तक मामला फाइलों में ही है।
दिशा की बैठक में बैनामे का मामला सामने आया था। जानकारी करने पर मामूल हुआ कि जो जांच अधिकारी थे वह बदल गए थे। नए ने कार्यभार संभाला और उनके संज्ञान में मामला नहीं था। जांच पूरी करने के निर्देश अधिकारी को दिए हैं। जांच पूरी होते ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -अभिषेक गोयल, जिलाधिकारी हमीरपुर
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राठ तहसील के गांव धनौरी खुर्द निवासी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उनके भाई हरिहर सिंह की 14 जून 2022 को लखनऊ से गांव लौटते समय रास्ते में मौत हो गई थी। उस समय उन्हें भाई के नाम खरीदी गई जमीन की जानकारी नहीं थी। जब जमीन की जानकारी हुई तो वरासत के लिए फाइल ऑनलाइन की थी। 16 अप्रैल 2025 को ऑनलाइन आवेदन के आधार पर लेखपाल ने 24 अप्रैल को वरासत की रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद वरासत दर्ज हो गई।
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मौत के तीन साल बाद चार अप्रैल 2025 को हरिहर ने 0.535 हेक्टेयर रकबा सरीला तहसील क्षेत्र के पथखुरी गांव निवासी आकाश को बेचा गया। जब उसी जमीन के कथित फर्जी बैनामे के आधार पर दाखिल-खारिज की फाइल लेखपाल के पास पहुंची तो लेखपाल ने पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। बताया जा रहा है कि प्रकरण को दबाने का प्रयास किया गया। तब से लेकर आज तक फर्जी हरिहर सिंह बनकर आया व्यक्ति कौन था। गवाही देने वाले ने भी अपनी सहमति किस आधार पर दे दी। यह तमाम सवाल जांच के बाद उजागर होने थे लेकिन जांच के आदेश के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
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जिलाधिकारी के आदेश पर जांच समिति गठित की गई थी। उप निबंधक राठ, दस्तावेज लेखक समेत गवाहों को नोटिस दिए गए थे। तब से लेकर अब तक मामला फाइलों में ही है।
दिशा की बैठक में बैनामे का मामला सामने आया था। जानकारी करने पर मामूल हुआ कि जो जांच अधिकारी थे वह बदल गए थे। नए ने कार्यभार संभाला और उनके संज्ञान में मामला नहीं था। जांच पूरी करने के निर्देश अधिकारी को दिए हैं। जांच पूरी होते ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -अभिषेक गोयल, जिलाधिकारी हमीरपुर