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Hapur News: फर्जी मार्कशीट और डिग्री प्रयोग कर मोनाड विश्वविद्यालय को बदनाम करने का आरोप

संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Sun, 01 Feb 2026 10:34 PM IST
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पिलखुवा। कोतवाली क्षेत्र स्थित मोनाड विश्वविद्यालय के सत्यापन प्रभारी अश्वनी यादव ने जिला संतकबीरनगर निवासी कुछ लोगों पर फर्जी मार्कशीट व डिग्री प्रयोग कर उनके विश्वविद्यालय को बदनाम करने का आरोप लगाया हैै। न्यायालय के आदेश पुलिस ने तीन नामजद समेत चार व्यक्तियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
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अश्वनी यादव ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि वह मोनाड विश्वविद्यालय में सत्यापन प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं। आरोप है कि 16 अक्तूबर 2025 की दोपहर करीब 12 बजे आलोक कुमार निवासी गांव मगधर जिला संतकबीरनगर अपनी मार्कशीट व डिग्री का सत्यापन कराने के लिए परीक्षा विभाग आया था। यहां से उसे फीस की रसीद लेने के लिए वित्त विभाग भेजा गया। जहां आरोपी द्वारा जमा की गई फीस का कोई रिकॉर्ड विश्वविद्यालय में नहीं था। इसके बाद दोबारा उसे परीक्षा विभाग भेजा गया। यहां पहुंचने पर उसकी मार्कशीट व डिग्री को लेकर कर्मचारियों को संदेह उत्पन्न हुआ। परीक्षा विभाग ने आरोपी को विधिक अधिकारी संजीव कुमार निमेष के पास भेजा दिया।
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गहनता से जांच करने के बाद विधिक अधिकारी ने आरोपी से सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने उन्हें बताया कि वर्ष 2014 में उसकी मुलाकात जिला संतकबीरनगर के गांव मगधर स्थित जनार्दन मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्रोलॉजी एंड पॉलीटेक्रिक के मैनेजर नीलकमल मिश्रा से हुई थी। नीलकमल ने उसकी संस्था का संबंध लखनऊ बीटीई यूपी से है और मान्यता प्राप्त है उसे बताया। नीलकमल की बातों पर विश्वास कर उसने कॉलेज में दाखिला ले लिया। उसने लगातार तीन वर्ष तक कक्षा में उपस्थिति दर्ज की और संपूर्ण परीक्षा भी दी। फीस की सभी रसीदें भी उसके पास सुरक्षित हैं। डिप्लोमा पूर्ण होने के बाद संस्था ने उन्हें उनकी मार्कशीट व डिग्री नहीं दी।
दबाव देने पर आरोपी नीलकमल ने अपने फोन से मनीष गर्ग नाम के व्यक्ति को फोन मिलाया। इसके बाद नीलकमल ने उसे जल्द मार्कशीट व डिग्री देेने का आश्वासन दिया। वर्ष 2018 में नीलकमल द्वारा भविष्य में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी का विश्वास दिलाते हुए संस्था द्वारा उसे मोनार्ड विश्वविद्यालय की मार्कशीट व डिग्री दी गई। आरोपियों द्वारा साठगांठ कर जनता व समाज में विश्वविद्यालय को बदनाम करने के उद्देश्य से फर्जी मार्कशीट व डिग्री का प्रयोग किया गया। सत्यापन प्रभारी ने बताया कि 16 अक्तूबर को ही विधिक अधिकारी द्वारा आरोपी आलोक को कोतवाली पुलिस को सौंपा था लेकिन पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज न कर उसे थाने से ही छोड़ दिया था।
27 अक्तूबर को एसपी से मामले की शिकायत डाक के माध्यम से की गई लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। सीओ अनीता चौहान ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर आलोक कुमार, नीलकमल मिश्रा, मनीष गर्ग व एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच में दोषी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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