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Hardoi News: अक्षय ने पास की नेट-जेआरएफ परीक्षा, सतेंद्र बने समीक्षा अधिकारी
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फोटो- 26- अक्षय प्रताप सिंह। स्वयं
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हरदोई/संडीला। लक्ष्य निर्धारित हो और मेहनत अटूट हो तो सफलता की राह आसान हो जाती है। जनपद के दो होनहार युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे युवा ने जहां इतिहास विषय में नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण कर शोधवृत्ति हासिल की वहीं दूसरे युवा ने खेती-किसानी पृष्ठभूमि से निकल कर यूपीपीएससी में 35वीं रैंक लाकर समीक्षा अधिकारी पद पर चयन हासिल कर लिया है।
विकास खंड बावन के गांव पुरौरी निवासी अक्षय प्रताप सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी संशोधित परिणामों के इतिहास विषय में 99.71 पर्सेंटाइल हासिल किए। अक्षय को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के तहत शोध कार्य के लिए यूजीसी की तरफ से करीब 30 लाख रुपये की शोधवृत्ति दी जाएगी। सेवानिवृत्त अध्यापक बाबा राजेश्वर सिंह और व्यवसायी पिता विनोद सिंह को सफलता का श्रेय देते हुए अक्षय ने बताया कि उन्होंने रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज से स्कूली शिक्षा के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में परास्नातक किया है।
छात्र राजनीति में सक्रिय अक्षय वर्तमान में एबीवीपी दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के मंत्री हैं। वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने प्रशंसा बटोरी है। दूसरी ओर विकास खंड संडीला के गांव सांक निवासी शिवशंकर त्रिपाठी के पुत्र सतेंद्र कुमार त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी परीक्षा में प्रदेश स्तर पर 35वीं रैंक हासिल की। सतेंद्र ने बताया कि आशिफ अली इंटर कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने प्रयागराज विश्वविद्यालय से बीएससी की। बीते तीन वर्षों से दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहे हैं और प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल की। उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा ही उनका लक्ष्य था। उन्होंने कामयाबी का श्रेय माता रेशमा देवी, पिता, बड़े भाई और भाभी को दिया है।
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विकास खंड बावन के गांव पुरौरी निवासी अक्षय प्रताप सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी संशोधित परिणामों के इतिहास विषय में 99.71 पर्सेंटाइल हासिल किए। अक्षय को जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के तहत शोध कार्य के लिए यूजीसी की तरफ से करीब 30 लाख रुपये की शोधवृत्ति दी जाएगी। सेवानिवृत्त अध्यापक बाबा राजेश्वर सिंह और व्यवसायी पिता विनोद सिंह को सफलता का श्रेय देते हुए अक्षय ने बताया कि उन्होंने रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज से स्कूली शिक्षा के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में परास्नातक किया है।
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छात्र राजनीति में सक्रिय अक्षय वर्तमान में एबीवीपी दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई के मंत्री हैं। वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने प्रशंसा बटोरी है। दूसरी ओर विकास खंड संडीला के गांव सांक निवासी शिवशंकर त्रिपाठी के पुत्र सतेंद्र कुमार त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी परीक्षा में प्रदेश स्तर पर 35वीं रैंक हासिल की। सतेंद्र ने बताया कि आशिफ अली इंटर कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने प्रयागराज विश्वविद्यालय से बीएससी की। बीते तीन वर्षों से दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहे हैं और प्रथम प्रयास में ही सफलता हासिल की। उनका कहना है कि प्रशासनिक सेवा ही उनका लक्ष्य था। उन्होंने कामयाबी का श्रेय माता रेशमा देवी, पिता, बड़े भाई और भाभी को दिया है।