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Hardoi News: गैर इरादतन हत्या में दो महिलाओं की जमानत अर्जी खारिज
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हरदोई। कासिमपुर थाना क्षेत्र में 31 मई को हुई घटना में गैर इरादतन हत्या की आरोपी दो महिलाओं की जमानत अर्जी जिला जज रीता कौशिक ने खारिज कर दी है। जीने के निर्माण को लेकर हुए विवाद में सहकारी समिति के सचिव की पीट पीटकर हत्या की गई थी। जिला जज ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज गंभीर चोटों को देखते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया है।
कासिमपुर थाना क्षेत्र के बेहंदर खुर्द निवासी होशराम ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि उनका पुत्र प्रदीप कुमार सहकारिता विभाग में सचिव था। बीती 31 मई की दोपहर जीने का निर्माण कराते समय गांव के पंकज ने विरोध किया था। बाद में पंकज, बिहारी उर्फ ब्रजलाल, अरुण कुमार, प्रियंका, खुशबू, रामदेवी और बलवंत कुमार ने पंदीप पर लाठी डंडों से हमला कर दिया था। उपचार के दौरान लखनऊ ट्रामा सेंटर में प्रदीप की मौत हो गई थी।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि प्रियंका और रामदेवी निर्दोष हैं। इनके विरुद्ध मारपीट का कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। वहीं अभियोजन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी महिलाएं अन्य सह-अभियुक्तों के साथ घटना में शामिल थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर की हड्डी टूटने सहित कई गंभीर चोटें पाई गईं थीं। मृत्यु का कारण एंटीमॉर्टम हेड इंजरी से उत्पन्न कोमा बताया गया था। इसका संज्ञान लेते हुए अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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कासिमपुर थाना क्षेत्र के बेहंदर खुर्द निवासी होशराम ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि उनका पुत्र प्रदीप कुमार सहकारिता विभाग में सचिव था। बीती 31 मई की दोपहर जीने का निर्माण कराते समय गांव के पंकज ने विरोध किया था। बाद में पंकज, बिहारी उर्फ ब्रजलाल, अरुण कुमार, प्रियंका, खुशबू, रामदेवी और बलवंत कुमार ने पंदीप पर लाठी डंडों से हमला कर दिया था। उपचार के दौरान लखनऊ ट्रामा सेंटर में प्रदीप की मौत हो गई थी।
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बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि प्रियंका और रामदेवी निर्दोष हैं। इनके विरुद्ध मारपीट का कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। वहीं अभियोजन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी महिलाएं अन्य सह-अभियुक्तों के साथ घटना में शामिल थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर की हड्डी टूटने सहित कई गंभीर चोटें पाई गईं थीं। मृत्यु का कारण एंटीमॉर्टम हेड इंजरी से उत्पन्न कोमा बताया गया था। इसका संज्ञान लेते हुए अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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