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Hardoi News: कागजों में सात मिनट, हकीकत में आधे घंटे का इंतजार
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अनुपमकीर्ति भारद्वाज
हरदोई। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शासन की ओर से निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके तहत एंबुलेंस को सात मिनट के भीतर मरीज तक पहुंचने के निर्देश हैं। जनपद में यह योजना दम तोड़ रही है। सरकारी आंकड़ों में एंबुलेंस सात मिनट में मरीज तक पहुंच रही है, वहीं जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। तीमारदार आधे घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस का इंतजार करने को मजबूर हैं, जिसके चलते कई मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है।
दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पर इलाज मिलना मरीज की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें एंबुलेंस की भूमिका सर्वोपरि है। इसके बावजूद, हरदोई जिले में मरीजों तक एंबुलेंस पहुंचने में काफी विलंब हो रहा है। जिले में 108 नंबर की 47 और 102 नंबर की 48 एंबुलेंस गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तैनात हैं। ये एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ जिले की सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर उपलब्ध हैं।
इसके बावजूद, मरीजों तक समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच रही है। अधिकारियों को भेजे जाने वाले रिकॉर्ड के अनुसार, एंबुलेंस मरीज के पास सात मिनट से कम समय में पहुंच जाती है। तीन-तीन माह के औसत समय का रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि एंबुलेंस छह मिनट 59 सेकेंड से लेकर सात मिनट सात सेकेंड के भीतर मरीज तक पहुंच जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, जहां एंबुलेंस 30 मिनट के बाद भी मरीज के पास नहीं पहुंच पा रही है।
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हरदोई। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शासन की ओर से निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके तहत एंबुलेंस को सात मिनट के भीतर मरीज तक पहुंचने के निर्देश हैं। जनपद में यह योजना दम तोड़ रही है। सरकारी आंकड़ों में एंबुलेंस सात मिनट में मरीज तक पहुंच रही है, वहीं जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। तीमारदार आधे घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस का इंतजार करने को मजबूर हैं, जिसके चलते कई मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है।
दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पर इलाज मिलना मरीज की जान बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें एंबुलेंस की भूमिका सर्वोपरि है। इसके बावजूद, हरदोई जिले में मरीजों तक एंबुलेंस पहुंचने में काफी विलंब हो रहा है। जिले में 108 नंबर की 47 और 102 नंबर की 48 एंबुलेंस गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तैनात हैं। ये एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ जिले की सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर उपलब्ध हैं।
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इसके बावजूद, मरीजों तक समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच रही है। अधिकारियों को भेजे जाने वाले रिकॉर्ड के अनुसार, एंबुलेंस मरीज के पास सात मिनट से कम समय में पहुंच जाती है। तीन-तीन माह के औसत समय का रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि एंबुलेंस छह मिनट 59 सेकेंड से लेकर सात मिनट सात सेकेंड के भीतर मरीज तक पहुंच जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, जहां एंबुलेंस 30 मिनट के बाद भी मरीज के पास नहीं पहुंच पा रही है।