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Hardoi News: लंबे समय तक मुकदमे की पीड़ा झेलना भी सजा, दो सगे भाइयों को तीन साल की परिवीक्षा
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हरदोई। पिटाई के 24 साल पुराने मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन (एफटीसी) विशाल दीक्षित ने दो सगे भाइयों को दोषी माना। उन्हें जेल भेजने की जगह परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दिया है। आरोपियों को तीन वर्ष की परिवीक्षा पर सशक्त रिहा करते हुए पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का आदेश भी सिविल जज ने दिया है।
अतरौली थाना क्षेत्र के तुलसीपुर निवासी कल्लू ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि आठ सितंबर 2002 को वह नाले की सफाई कर रहा था। इसी बीच गांव के ही पुत्तू, अपने पुत्र शीतल प्रसाद और सजीवन लाल के साथ आ गए। तीनों उसे गालियां देने लगे। मना करने पर तीनों ने उसकी लाठी से पिटाई कर दी थी। शोर होने पर कई लोग मौके कर आ गए थे। लोगों को आता देख तीनों भाग गए थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ पिटाई की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने 12 अक्तूबर 2002 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। तीनों के खिलाफ कोर्ट में 22 अप्रैल 2007 को आरोप तय हुए थे।
अभियोजन साक्ष्य दो सितंबर 2011 को शुरू हुआ था जो 11 जुलाई 2025 को समाप्त हो गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाहों को पेश किया गया। वहीं, बचाव पक्ष ने इसे पारिवारिक व आपसी विवाद बताते हुए आरोपों से इन्कार किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया। साथ में यह भी माना कि यह उनका पहला अपराध है। मामला वर्ष 2002 से लंबित चल रहा है। लंबे समय तक मुकदमे की पीड़ा झेलना भी एक प्रकार की सजा मानते हुए दोनों दोषियों को तीन वर्ष की परिवीक्षा पर छोड़ा गया है।
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अतरौली थाना क्षेत्र के तुलसीपुर निवासी कल्लू ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि आठ सितंबर 2002 को वह नाले की सफाई कर रहा था। इसी बीच गांव के ही पुत्तू, अपने पुत्र शीतल प्रसाद और सजीवन लाल के साथ आ गए। तीनों उसे गालियां देने लगे। मना करने पर तीनों ने उसकी लाठी से पिटाई कर दी थी। शोर होने पर कई लोग मौके कर आ गए थे। लोगों को आता देख तीनों भाग गए थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ पिटाई की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने 12 अक्तूबर 2002 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। तीनों के खिलाफ कोर्ट में 22 अप्रैल 2007 को आरोप तय हुए थे।
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अभियोजन साक्ष्य दो सितंबर 2011 को शुरू हुआ था जो 11 जुलाई 2025 को समाप्त हो गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाहों को पेश किया गया। वहीं, बचाव पक्ष ने इसे पारिवारिक व आपसी विवाद बताते हुए आरोपों से इन्कार किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया। साथ में यह भी माना कि यह उनका पहला अपराध है। मामला वर्ष 2002 से लंबित चल रहा है। लंबे समय तक मुकदमे की पीड़ा झेलना भी एक प्रकार की सजा मानते हुए दोनों दोषियों को तीन वर्ष की परिवीक्षा पर छोड़ा गया है।
