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हाथरस जिला अस्पताल: एक रुपये के पर्चे पर सीटी स्कैन की नहीं समझी कद्र, रिपोर्ट लेने ही नहीं आए 225 मरीज

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 22 Jan 2026 01:39 PM IST
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सार

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 15 फीसदी मरीज हर महीने अपनी रिपोर्ट काउंटर पर ही छोड़कर चले जाते हैं, जहां निजी सेंटरों पर इस जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं सरकारी अस्पताल में मात्र एक रुपये में मिल रही इस सुविधा की कद्र नहीं की जा रही है।

225 patients not collect CT scan reports
सीटी स्कैन रिपोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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हाथरस जिला अस्पताल में महज एक रुपये के पर्चे पर होने वाले सीटी स्कैन की अहमियत मरीज और उनके तीमारदार नहीं समझ रहे। जिला अस्पताल में पिछले एक साल में 225 मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने अपना सीटी स्कैन तो कराया, लेकिन उसकी रिपोर्ट लेने नहीं आए।

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जिला अस्पताल में हर महीने औसतन 650 से 700 सीटी स्कैन किए जा रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इनमें से 15 फीसदी मरीज हर महीने अपनी रिपोर्ट काउंटर पर ही छोड़कर चले जाते हैं, जहां निजी सेंटरों पर इस जांच के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं सरकारी अस्पताल में मात्र एक रुपये में मिल रही इस सुविधा की कद्र नहीं की जा रही है।

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सीटी स्कैन से एक्स-रे की तुलना में कई गुना अधिक रेडिएशन निकलता है। इस संबंध में चेतावनी पट भी लगे हुए हैं, फिर भी लोग नहीं मानते। सभी गंभीर समस्या बताकर स्कैन कराते हैं। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है। अपील है कि रेडिएशन के खतरे को देखते हुए इस सुविधा का लाभ तभी उठाएं जब अतिआवश्यक न हो।-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस

जान जोखिम में डाल रहे लोग

रेडियोलॉजिस्ट डाॅ. एसके गुप्ता ने बताया कि सीटी स्कैन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। इसमें मरीज का शरीर हानिकारक रेडिएशन के संपर्क में आता है। बिना किसी ठोस चिकित्सकीय कारण व रिपोर्ट का विश्लेषण किए रेडिएशन लेना शरीर के लिए घातक हो सकता है। बार-बार एक्सपोजर से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बागला जिला अस्पताल में सीटी स्कैन कराने के लिए लगी भीड़संसाधनों की बर्बादी
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि लोग इस सुविधा की अहमियत नहीं समझ रहे हैं। एक सीटी स्कैन पर सरकार का भारी खर्च आता है और स्कैन करने व रिपोर्ट के रखरखाव में स्टाफ की भी मेहनत लगती है। बता दें कि निजी जांच केंद्र पर हेड सीटी लगभग दो हजार रुपये, चेस्ट सीटी चार हजार रुपये और पेट का सीटी सात हजार रुपये में होता है।

एक नजर में

  • जांच शुल्क-मात्र 1 रुपया
  • हर महीने होने वाले सीटी स्कैन-650 से 700
  • रिपोर्ट न लेने वाले मरीज-15 प्रतिशत प्रति माह
  • कुल लंबित रिपोर्ट-225

इसलिए बढ़ रही प्रवृत्ति
  • सस्ती सुविधा : मात्र एक रुपये का शुल्क होने के कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते और आवश्यक न होने पर भी स्कैन करा लेते हैं।
  • जागरूकता की कमी : मरीजों को लगता है कि स्कैन हो गया तो काम खत्म, जबकि असली इलाज रिपोर्ट के आधार पर शुरू होता है।
  • बाहरी परामर्श : कई बार मरीज बाहरी परामर्श के बाद केवल स्कैन के लिए जिला अस्पताल आते हैं। फिर दलालों की मदद लेते हैं व चिकित्सकों पर दबाव डालते हैं।
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