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हाथरस की ऐतिहासिक धरोहर: राजा दयाराम का किला होगा खाली, 429 अवैध मकान चिह्नित, दिए जाएंगे नोटिस

कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 20 Jan 2026 02:29 PM IST
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सार

जहां कभी किले के ऊंचे टीले और ऐतिहासिक अवशेष हुआ करते थे, वहां आज कंक्रीट का जंगल खड़ा हो गया है। संरक्षण के कड़े नियमों के बावजूद भूमाफिया और अतिक्रमणकारियों ने टीलों को काट-काटकर वहां बस्तियां बसा दीं। 

Encroachment on Raja Dayaram fort in Hathras
राजा दयाराम किला परिसर में बने मकान - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हाथरस जिले की ऐतिहासिक पहचान और राजा दयाराम के शौर्य का प्रतीक किला परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग द्वारा संरक्षित इस किला परिसर के ताजा सर्वे में प्रतिबंधित क्षेत्र में 429 अवैध मकान चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें हटाने के लिए वृहद स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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पिछले 40 वर्षों से इस संरक्षित क्षेत्र की सूरत वर्तमान में पूरी तरह बदल गई है। जहां कभी किले के ऊंचे टीले और ऐतिहासिक अवशेष हुआ करते थे, वहां आज कंक्रीट का जंगल खड़ा हो गया है। संरक्षण के कड़े नियमों के बावजूद भूमाफिया और अतिक्रमणकारियों ने टीलों को काट-काटकर वहां बस्तियां बसा दीं। हैरत की बात यह है कि जिस क्षेत्र में एक ईंट लगाना भी अपराध है, वहां न केवल पक्के मकान बन गए, बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे बिजली की लाइनें खिंच गईं और धड़ल्ले से बिजली के मीटर भी लगा दिए गए। कुछ महीने पहले तो नगर पालिका सड़क बनवाने और खड़ंजा लगवाने का काम करा रही थी, जिसे एएसआई ने नोटिस देकर बंद कराया था।

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नगर पालिका व राजस्व विभाग की टीमें सर्वे कर रही हैं। सर्वे में 429 अतिक्रमणकारी चिह्नित किए गए हैं। अभी अन्य बिंदुओं पर फिर से सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।-राजबहादुर सिंह, एसडीएम सदर।

विरासत को बचाने की बड़ी चुनौती

राजा दयाराम का किला न केवल एक इमारत है, बल्कि यह हाथरस के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। यह वही किला है, जिसे धवस्त करने के लिए अंग्रेजों ने तोप से गोले दागे थे। दाऊजी मंदिर पर भी गोले दागे गए थे, लेकिन वे मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा सके। इनमें से एक गोला अभी भी संरक्षित है। अतिक्रमण में बिजली विभाग और नगर पालिका की भूमिका भी जांच के घेरे में है, क्योंकि बिना किसी वैध दस्तावेज के संरक्षित क्षेत्र में सरकारी सुविधाएं कैसे पहुंचाई गईं, यह एक बड़ा सवाल है।

गठित हुई जांच समिति
विधायक सदर अंजुला माहौर ने अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा था। इसके बाद डीएम ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसमें एसडीएम सदर, सीओ सिटी, परियोजना अधिकारी डूडा व नगर पालिका के ईओ शामिल हैं। इस टीम ने 19 दिसंबर से अभिलेखों की जांच व स्थलीय सर्वे शुरू किया है।

मकान स्वामियों को दिए जाएंगे नोटिस

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार अब तक सर्वे का एक चौथाई काम पूरा हो चुका है, जल्द ही इस काम को पूर्ण कर लिया जाएगा। सभी बिंदुओं पर जांच के बाद मकान स्वामियों को नोटिस देकर खाली करने की चेतावनी दी जाएगी। तय समय सीमा के बाद किला परिसर में बुलडोजर चलेगा। इसके बाद किले को संरक्षित कर विकसित करने की योजना पर काम होगा।

इन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित जांच

  • आगमन और निवास का समय : यहां बसे परिवार मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं और किले के क्षेत्र में इन्होंने कब से डेरा डाला है?
  • पूर्व निवास की जानकारी : यदि ये हाथरस के ही निवासी हैं, तो अतिक्रमण करने से पहले वे शहर के किस हिस्से में रह रहे थे?
  • अनुमति और मिलीभगत : संरक्षित क्षेत्र में निर्माण किसकी अनुमति से किया गया? क्या इसमें स्थानीय अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत रही है?
  • वैकल्पिक व्यवस्था : वर्तमान में यहां रह रहे लोगों के पास सिर छुपाने के लिए कोई और वैकल्पिक जगह है या नहीं?
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