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Kidney: लापरवाही से जवाब दे रहीं किडनी, 189 मरीज डायलिसिस के सहारे, मशीन एक-इंतजार में तीन जिंदगी

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 20 Jan 2026 04:25 PM IST
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सार

हाथरस के जिला अस्पताल में बड़ी कमी ''आइसोलेशन मशीन'' की है। संक्रमण की स्थिति में मरीजों को आइसोलेशन डायलिसिस की जरूरत होती है, लेकिन पूरे केंंद्र पर केवल एक आइसोलेशन मशीन उपलब्ध है। वर्तमान में तीन संक्रमित मरीज अपनी बारी के इंतजार में हैं।

Negligence causing kidney damage
बागला जिला अस्पताल स्थित हीमो डायलिसिस यूनिट में इलाज कराते लोग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दूषित खानपान, खराब जीवनशैली व दवाओं के सेवन में लापरवाही लोगों को किडनी फेलियर की ओर धकेल रही है। हाथरस में पिछले तीन साल में 288 मरीज जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट पर पंजीकृत हुए हैं। इनमें से 89 की मौत हो चुकी है, जबकि 189 मरीजों का सांसें मशीनों के भरोसे टिकी हैं। 10 मरीज ही किडनी ट्रांसप्लांट के जरिये इस मशीनी चक्र से बाहर निकल पाए हैं।

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बढ़ते दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा डायलिसिस यूनिट को तीन शिफ्टों में चलाया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी स्तर पर इस बीमारी से लड़ने के लिए बजट और प्रयास दोनों बढ़ाए गए हैं। पिछले तीन साल में कुल 259 मरीजों ने पंजीकरण करायाहै, जिनकी अब तक कुल 32,370 बार डायलिसिस की जा चुकी है।
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प्राइवेट अस्पताल में होने वाले खर्च से तुलना करें तो स्वास्थ्य विभाग इसमें अब तक 6.47 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। बता दें कि 10 अगस्त 2022 को इस यूनिट की शुरूआत हुई थी। यहां दस में से नौ बेड पर सामान्य और एक पर आइसोलेटेड मरीजों की डायलिसिस होती है।

जिले में गुर्दा रोगियों की प्रशासन हरसंभव मदद कर रहा है। तीन शिफ्टों में काम होने से काफी मरीजों को कवर किया जा रहा है। आवश्यकता को देखते आइसोलेशन वार्ड बढ़ाया जाएगा।-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस

क्रिएटिनिन का स्तर बताता है दिक्कत

चिकित्सक डाॅ. भरत यादव ने बताया कि पुरुषों में क्रिएटिनिन का सामान्य स्तर 0.7 से 1.3 मिलीग्राम/डेसीलीटर और महिलाओं में 0.6 से 1.1 मिलीग्राम/डेसीलीटर रहता है। मांसपेशियों के विघटन से लगातार बनने वाला क्रिएटिनिन खून में रिलीज होता रहता है, जिसे किडनी फिल्टर करती रहती है। रक्त में किएटिनिन की मात्रा बढ़ना किडनी फेलियर के संकेत होते हैं।

मशीन एक, इंतजार में तीन जिंदगी
सुविधाओं के बीच एक बड़ी कमी ''आइसोलेशन मशीन'' की है। संक्रमण की स्थिति में मरीजों को आइसोलेशन डायलिसिस की जरूरत होती है, लेकिन पूरे केंंद्र पर केवल एक आइसोलेशन मशीन उपलब्ध है। वर्तमान में तीन संक्रमित मरीज अपनी बारी के इंतजार में हैं। यूनिट के प्रबंधक शिवम प्रताप सिंह ने बताया कि इन मरीजों को फिलहाल दूसरे जिलों से कनेक्ट किया गया है।

किडनी के खराब होने के कारण

  • शरीर में पानी की कमी होना।
  • ज्यादा प्रोटीन युक्त भोजन का सेवन।
  • किडनी में संक्रमण।
  • बीमारियां : डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर व दिल की बीमारी।
  • यूरिन मार्ग में रुकावट आना।
  • कुछ खास दवाओं जैसे पेन किलर्स आदि का अधिक सेवन।


इस तरह करें बचाव

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
  • संतुलित और हेल्दी डाइट फॉलो करें।
  • डाइट में ज्यादा प्रोटीन लेने से बचें।
  • भोजन में नमक का सेवन सीमित करें।
  • नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी करते रहें।
  • किडनी प्रभावित करने वाली बीमारियों का सही उपचार कराएं।
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