कुत्तों का खौफ: घर से निकलना दूभर, 15 दिनों में 435 हुए हमलों से जख्मी, फाइलों में दबी एबीसी केंद्र की योजना
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि स्थानीय निकाय कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल केंद्र संचालित करें। कुत्तों की नसबंदी कराना सुनिश्चित करें, लेकिन हाथरस नगर पालिका और जिला प्रशासन के पास यह योजना केवल कागजों में हैं।
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हाथरस जिले में कुत्तों का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। तंग गलियों से लेकर पॉश कॉलोनियों तक कुत्तों के झुंड राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। बीते 15 दिनों में 435 लोग इनके हमलों में जख्मी हो चुके हैं। इन सभी ने जिला अस्पताल और इमरजेंसी में एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने और डराने वाले हैं। बीते एक साल के दौरान जिला अस्पताल में कुल 44,684 एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इनमें से 550 मामले इतने गंभीर थे कि मरीजों के घावों पर एंटी रेबीज सीरम डालना पड़ा। कुत्ते इनका मांस नोच कर ले गए थे। सीरम की 10-10 एमएल की दो सौ वायल खर्च की गईं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन औसतन 30 से 40 नए केस पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव है।
बीते कुछ वर्षों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की खपत बढ़ी है। आए दिन हो रहे कुत्तों के हमलों को देखते हुए इमरजेंसी में 24 घंटे एआरवी लगवाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। रोजाना 100 से 150 एआरवी डोज लगाए जा रहे हैं। -डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल
एबीसी सेंटर के लिए प्रस्ताव तैयार हो चुका है। सेंटर तैयार होते ही लावारिस कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कराई जाएगी। -रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका
फाइलों में दबी एबीसी केंद्र की योजना
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि स्थानीय निकाय कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल केंद्र संचालित करें। कुत्तों की नसबंदी कराना सुनिश्चित करें, लेकिन हाथरस नगर पालिका और जिला प्रशासन के पास यह योजना केवल कागजों में हैं। कुत्तों की नसबंदी और उन्हें पकड़ने की कोई व्यवस्था पालिका के पास नहीं है। एबीसी सेंटर बनना है और कैटल कैचर वैन खरीदी जानी है तथा प्रशिक्षित स्टॉफ की भी आवश्यकता है, लेकिन अभी धरातल पर कुछ नहीं है।
शाम होते ही पसर जाता है सन्नाटा
शहर के मोहल्ला चौबेवाला, सादाबाद गेट, इगलास रोड और नवीपुर जैसे इलाकों में कुत्तों का खौफ सबसे ज्यादा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम ढलते ही कुत्ते हिंसक हो जाते हैं। बच्चों को ट्यूशन या दूध लाने के लिए भी अभिभावकों को साथ जाना पड़ता है। कई बार झुंड में चलने वाले ये कुत्ते दोपहिया वाहन सवारों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
22 लोगों पर हमला, इसमें 10 बच्चे
कुत्तों के हमले बच्चों पर अधिक हो रहे हैं। बच्चों का डरा हुआ देखकर कुत्ते उन पर हमला कर देते हैं। बृहस्पतिवार को कुत्तों के काटने के 22 मामले सामने आए। इसमें दस मामले बच्चों से जुड़े थे। पांच साल के अनिरुद्ध निवासी गारवगढ़ी मुरसान को दो बार कुत्ते ने काटा, जिससे उसे जख्म हो गया। इसी तरह 11 साल के आदित्य निवासी हतीसा पर भी सुबह कुत्ते ने हमला कर दिया। खंदारी गढ़ी की 11 साल की मधु व 14 साल के नैतिक निवासी झींगुरा को भी कुत्ते ने काट लिया।
