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Hathras News: फर्जी एफडीआर मामले में शासन ने तलब किए अभिलेख
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नगर पालिका परिषद हाथरस के फर्जी एफडीआर मामले में चल रही विभागीय जांच में तेजी आ गई है। पिछले कई महीनों से यह जांच ठंडे बस्ते में थी। विभागीय जांच के अंतर्गत निदेशालय, नगर विकास ने संबंधित पत्रावलियां मांगी है। 15 दिन के अंदर पत्रावलियों के साथ भौतिक रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए है।
12 मार्च 2025 को करोड़ों रुपये के टेंडरों में फर्जी एफडीआर लगाने का मामला प्रकाश में आया था। प्रशांत कौशिक निवासी साकेत कॉलोनी की शिकायत पर डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी में एडीएम न्यायिक, एसडीएम सदर व वरिष्ठ कोषाधिकारी शामिल थे। 21 मई 2025 को कमेटी ने डीएम को अपनी जांच आख्या दी, जिसमें अवर अभियंता जलकल को दोषी पाया था। जांच कमेटी ने भी माना कि जेई ने ठेकेदारों के साथ मिलकर उन्हें लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी एफडीआर लगाईं।
फर्जी एफडीआर के साथ-साथ बिना ईओ की अनुमति लिए इन्हें अवमुक्त भी करा दिया। जांच कमेटी ने यह भी पाया था कि वर्ष 2023-24 में लगे हैंडपंप की माप पुस्तिका बदली गई। दूसरे माप पुस्तिका तैयार कर जेई ने ठेकेदार को 5.30 लाख रुपये का अधिक भुगतान करा दिया था। जांच कमेटी ने तत्काल निलंबन तथा एफआइआर दर्ज कराने की संस्तुति दी थी।
नगर पालिका ईओ रोहित सिंह ने 31 मई को कोतवाली हाथरस गेट में जेई हर्षवर्धन के खिलाफ धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद शासन ने विभागीय जांच बैठा थी। एक साल पहले फर्जी एफडीआर लगाकर टेंडर लेने का मामला सामने आया था, जिसमें एफआईआर भी दर्ज है।
मामले में विवेचना कोतवाली हाथरस गेट के अपराध निरीक्षक आदित्यशंकर तिवारी कर रहे थे। विवेचना के दौरान तथ्य सही पाए जाने पर नवंबर 2025 में पुलिस ने एंटी करप्शन की धाराएं बढ़ाईं। इसके बाद अब यह जांच सीओ सिटी को ट्रांसफर कर दी गई थी।
शासन ने 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
जुलाई 2025 में जेई, जलकल विभाग के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई थी। निकाय निदेशालय लखनऊ में मुख्य अभियंता कमलजीत सिंह इस मामले के जांच अधिकारी है। अब तक यह जांच ठंडे बस्ते में थी। अब जांच कमेटी हरकत में आई है।
मुख्य अभियंता ने 24 फरवरी को नगर पालिका ईओ को पत्र भेजकर 15 दिनों के अंदर फर्जी एफडीआर से संबंधित सभी पत्रावलियां तलब की हैं। अधिकारी या कर्मचारी को भौतिक रूप से पत्रावलियों के साथ उपस्थित होना है।
- शासन का पत्र मिला है। जांच के क्रम में एक कर्मचारियों को नामित कर पत्रावलियों के साथ निदेशालय भेजा जाएगा। - रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद हाथरस
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12 मार्च 2025 को करोड़ों रुपये के टेंडरों में फर्जी एफडीआर लगाने का मामला प्रकाश में आया था। प्रशांत कौशिक निवासी साकेत कॉलोनी की शिकायत पर डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी में एडीएम न्यायिक, एसडीएम सदर व वरिष्ठ कोषाधिकारी शामिल थे। 21 मई 2025 को कमेटी ने डीएम को अपनी जांच आख्या दी, जिसमें अवर अभियंता जलकल को दोषी पाया था। जांच कमेटी ने भी माना कि जेई ने ठेकेदारों के साथ मिलकर उन्हें लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी एफडीआर लगाईं।
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फर्जी एफडीआर के साथ-साथ बिना ईओ की अनुमति लिए इन्हें अवमुक्त भी करा दिया। जांच कमेटी ने यह भी पाया था कि वर्ष 2023-24 में लगे हैंडपंप की माप पुस्तिका बदली गई। दूसरे माप पुस्तिका तैयार कर जेई ने ठेकेदार को 5.30 लाख रुपये का अधिक भुगतान करा दिया था। जांच कमेटी ने तत्काल निलंबन तथा एफआइआर दर्ज कराने की संस्तुति दी थी।
नगर पालिका ईओ रोहित सिंह ने 31 मई को कोतवाली हाथरस गेट में जेई हर्षवर्धन के खिलाफ धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद शासन ने विभागीय जांच बैठा थी। एक साल पहले फर्जी एफडीआर लगाकर टेंडर लेने का मामला सामने आया था, जिसमें एफआईआर भी दर्ज है।
मामले में विवेचना कोतवाली हाथरस गेट के अपराध निरीक्षक आदित्यशंकर तिवारी कर रहे थे। विवेचना के दौरान तथ्य सही पाए जाने पर नवंबर 2025 में पुलिस ने एंटी करप्शन की धाराएं बढ़ाईं। इसके बाद अब यह जांच सीओ सिटी को ट्रांसफर कर दी गई थी।
शासन ने 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
जुलाई 2025 में जेई, जलकल विभाग के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हुई थी। निकाय निदेशालय लखनऊ में मुख्य अभियंता कमलजीत सिंह इस मामले के जांच अधिकारी है। अब तक यह जांच ठंडे बस्ते में थी। अब जांच कमेटी हरकत में आई है।
मुख्य अभियंता ने 24 फरवरी को नगर पालिका ईओ को पत्र भेजकर 15 दिनों के अंदर फर्जी एफडीआर से संबंधित सभी पत्रावलियां तलब की हैं। अधिकारी या कर्मचारी को भौतिक रूप से पत्रावलियों के साथ उपस्थित होना है।
- शासन का पत्र मिला है। जांच के क्रम में एक कर्मचारियों को नामित कर पत्रावलियों के साथ निदेशालय भेजा जाएगा। - रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद हाथरस
