{"_id":"6a42dd58931ba629f9079051","slug":"lord-jagannath-falls-ill-being-tended-to-with-medicinal-decoctions-hathras-news-c-56-1-hts1003-150629-2026-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, औषधीय काढ़े से हो रही सेवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, औषधीय काढ़े से हो रही सेवा
Tue, 30 Jun 2026 02:32 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 30 Jun 2026 02:32 AM IST
विज्ञापन
शहर की जैन गली स्थित जगन्नाथ धाम मंदिर में भगवान जगन्नाथ का अभिषेक करते पुजारी। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के 222 वर्ष पुराने जैन गली स्थित जगन्नाथ धाम में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की तैयारी शुरू हो गई है। परंपरा के अनुसार भक्त भगवान को रोगी मानकर उनकी सेवा कर रहे हैं।
भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को औषधीय काढ़ा अर्पित किया जा रहा है, जबकि मंदिर के कपाट 15 दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद हैं। मंदिर के महंत पंडित रामकुमार शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार 108 कलशों से जलाभिषेक के बाद भगवान ज्वरग्रस्त हो जाते हैं। इस कारण 15 दिनों तक चलने वाली ''अनासार'' अवधि में उन्हें पूर्ण विश्राम दिया जाता है और मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
इस दौरान भगवान को छप्पन भोग या माखन-मिश्री नहीं, बल्कि काली मिर्च, सोंठ, मुलहठी, तुलसी, सौंफ, केसर समेत औषधीय सामग्री से तैयार दिव्य काढ़े का ही भोग लगाया जाता है। भगवान के विश्राम में कोई व्यवधान न हो, इसलिए मंदिर में शंख, घंटा, घड़ियाल और मृदंग जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी बंद कर दिया गया है। आरती भी शांत वातावरण में संपन्न हो रही है।
विज्ञापन
महंत ने बताया कि अनासार अवधि समाप्त होने के बाद 16 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ भव्य रथयात्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।
विज्ञापन
भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को औषधीय काढ़ा अर्पित किया जा रहा है, जबकि मंदिर के कपाट 15 दिनों के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद हैं। मंदिर के महंत पंडित रामकुमार शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार 108 कलशों से जलाभिषेक के बाद भगवान ज्वरग्रस्त हो जाते हैं। इस कारण 15 दिनों तक चलने वाली ''अनासार'' अवधि में उन्हें पूर्ण विश्राम दिया जाता है और मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
विज्ञापन
इस दौरान भगवान को छप्पन भोग या माखन-मिश्री नहीं, बल्कि काली मिर्च, सोंठ, मुलहठी, तुलसी, सौंफ, केसर समेत औषधीय सामग्री से तैयार दिव्य काढ़े का ही भोग लगाया जाता है। भगवान के विश्राम में कोई व्यवधान न हो, इसलिए मंदिर में शंख, घंटा, घड़ियाल और मृदंग जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी बंद कर दिया गया है। आरती भी शांत वातावरण में संपन्न हो रही है।
विज्ञापन
महंत ने बताया कि अनासार अवधि समाप्त होने के बाद 16 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ भव्य रथयात्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।