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Hathras News: जिला अस्पताल में ओटी तैयार फिर भी ऑपरेशन बाहर
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:46 AM IST
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बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की कतार। संवाद
- फोटो : Samvad
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जिला अस्पताल में मरीजों को आधुनिक सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार माड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) दिखावटी साबित हो रही है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होने के बावजूद यहां मोतियाबिंद के ऑपरेशन अपनी पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहे हैं। इस कारण जिला अस्पताल प्रशासन को अभी भी ऑपरेशन बाजना स्थित अस्पताल में कराने पड़ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहां इस हाईटेक ओटी में रोजाना दर्जनों ऑपरेशन होने चाहिए थे, वहीं पिछले दो महीनों में मात्र 90 ऑपरेशन ही हो सके हैं। औसत देखा जाए तो यह संख्या अस्पताल की क्षमता के मुकाबले बेहद कम है। संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी मरीजों को राहत न मिल पाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। यहि स्थिति अन्य ऑपरेशन की है। सर्जन की तैनाती के बावजूद यहां छोटे ऑपरेशन भी मात्र 14 हुए हैं।
जिला अस्पताल में मोतियोबिंद के ऑपरेशन मथुरा के बाजना स्थित अस्पताल में कराए जाते हैं, जिसका खर्चा स्वास्थ विभाग वहन करता है। फिलहाल हर बृहस्पतिवार 20 से 25 मरीज भेजे जा रहे हैं, जबकि अक्तूबर से फरवरी माह मौसम अनुकूल होने के कारण यह संख्या 70 से 80 रहती है।
स्टाफ की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
आई सर्जन, ऑर्थो व जनरल सर्जन होने के बाद भी अत्याधुनिक ओटी में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। ओटी में कुशल टेक्नीशियन के अभाव में आधुनिक मशीनों का संचालन व उनका रख-रखाव प्रभावित है। वार्ड बॉय और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है, जिससे सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल में समस्या आती है। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से कई बार स्थानीय अधिकारी व शासन को पत्र लिखा जा चुका है। अब फिर से सीएमएस ने शासन से पत्राचार कर स्टाफ की तैनाती की मांग की है।
माड्यूलर ओटी अत्याधुनिक है, लेकिन बिना पर्याप्त स्टाफ के इसे पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं है। मोतियाबिंद व छोटे ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। हमने रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को फिर से पत्र भेजा है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
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हैरानी की बात यह है कि जहां इस हाईटेक ओटी में रोजाना दर्जनों ऑपरेशन होने चाहिए थे, वहीं पिछले दो महीनों में मात्र 90 ऑपरेशन ही हो सके हैं। औसत देखा जाए तो यह संख्या अस्पताल की क्षमता के मुकाबले बेहद कम है। संसाधनों की उपलब्धता के बाद भी मरीजों को राहत न मिल पाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। यहि स्थिति अन्य ऑपरेशन की है। सर्जन की तैनाती के बावजूद यहां छोटे ऑपरेशन भी मात्र 14 हुए हैं।
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जिला अस्पताल में मोतियोबिंद के ऑपरेशन मथुरा के बाजना स्थित अस्पताल में कराए जाते हैं, जिसका खर्चा स्वास्थ विभाग वहन करता है। फिलहाल हर बृहस्पतिवार 20 से 25 मरीज भेजे जा रहे हैं, जबकि अक्तूबर से फरवरी माह मौसम अनुकूल होने के कारण यह संख्या 70 से 80 रहती है।
स्टाफ की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
आई सर्जन, ऑर्थो व जनरल सर्जन होने के बाद भी अत्याधुनिक ओटी में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। ओटी में कुशल टेक्नीशियन के अभाव में आधुनिक मशीनों का संचालन व उनका रख-रखाव प्रभावित है। वार्ड बॉय और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है, जिससे सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल में समस्या आती है। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से कई बार स्थानीय अधिकारी व शासन को पत्र लिखा जा चुका है। अब फिर से सीएमएस ने शासन से पत्राचार कर स्टाफ की तैनाती की मांग की है।
माड्यूलर ओटी अत्याधुनिक है, लेकिन बिना पर्याप्त स्टाफ के इसे पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं है। मोतियाबिंद व छोटे ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। हमने रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को फिर से पत्र भेजा है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस