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Hathras News: ग्रामीण महिलाओं को कारोबार बढ़ाने के गुर बता रहीं पूनम
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:45 AM IST
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। स्रोत : विभाग
- फोटो : Self
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ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सासनी ब्लॉक के गांव ठाकुर नगला की पूनम एक मिसाल बनकर उभरी हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की और अब वही अनुभव अन्य महिलाओं के साथ साझा कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पूनम ने करीब दो वर्ष पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर छोटे स्तर पर काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य महिलाओं को भी समूहों के माध्यम से जोड़ना शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन के चलते आज वे यमुना प्रेरणा नामक संकुल की प्रभारी के रूप में कार्य कर रही हैं।
पूनम गांव-गांव जाकर महिलाओं को समूह जुड़ने, बचत करने और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं। वे महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं जैसे समूह सखी, बैंक सखी, स्वास्थ्य सखी, बीसी सखी और कृषि सखी के बारे में जानकारी देती हैं, जिससे वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार काम चुन सकें।
पूनम महिलाओं को मोबाइल के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराती हैं। वे 22 गांवों के समूहों की करीब दो हजार महिलाओं के लेनदेन और गतिविधियों का डेटा तैयार करती हैं, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके। पूनम का यह प्रयास न केवल उन्हें, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
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पूनम ने करीब दो वर्ष पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर छोटे स्तर पर काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य महिलाओं को भी समूहों के माध्यम से जोड़ना शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन के चलते आज वे यमुना प्रेरणा नामक संकुल की प्रभारी के रूप में कार्य कर रही हैं।
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पूनम गांव-गांव जाकर महिलाओं को समूह जुड़ने, बचत करने और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करती हैं। वे महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं जैसे समूह सखी, बैंक सखी, स्वास्थ्य सखी, बीसी सखी और कृषि सखी के बारे में जानकारी देती हैं, जिससे वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार काम चुन सकें।
पूनम महिलाओं को मोबाइल के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराती हैं। वे 22 गांवों के समूहों की करीब दो हजार महिलाओं के लेनदेन और गतिविधियों का डेटा तैयार करती हैं, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके। पूनम का यह प्रयास न केवल उन्हें, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।