Potato: खोदाई से पहले ही खेतों में लग रही आलू की बोली, 550 से 650 रुपये कट्टा तक हो रहा सौदा
पहले आलू की खोदाई कर मंडी या कोल्ड स्टोर ले जाया जाता था, पर इस बार अलग ही हो रहा है। अब आलू खरीदने के लिए खेतों में ही बोली लग रही है। आलू का भाव 550 से 650 रुपये प्रति कट्टा तक मिल रहा है
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हाथरस जिले में आलू की खोदाई इन दिनों चरम पर है। इसके साथ ही आलू व्यापार का तरीका भी बदलता दिखाई दे रहा है। इस बार कई स्थानों पर मंडियों के बजाय सीधे खेतों में ही आलू की खरीद-फरोख्त हो रही है। कोल्ड स्टोरों पर सन्नाटा दिखाई दे रहा है। व्यापारी मजदूरों, ट्रैक्टरों और बारदाना के साथ किसानों के खेतों तक पहुंचकर आलू की खुली बोली लगा रहे हैं। वर्तमान में जिले में आलू का भाव 550 से 650 रुपये प्रति कट्टा (50 किलो) तक मिल रहा है, जिससे खेतों में ही खरीद का माहौल बन गया है।
जिले में इस बार 52 हजार हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई है। सादाबाद, सासनी, सहपऊ और आसपास के आलू उत्पादक क्षेत्रों में सुबह से देर शाम तक खोदाई का काम जारी है। खेतों में खोदाई के साथ ही व्यापारियों की आवाजाही भी बढ़ गई है। कई जगह खेत ही अस्थायी मंडी का रूप लेते नजर आ रहे हैं, जहां व्यापारी आपस में प्रतिस्पर्धा करते हुए आलू की बोली लगा रहे हैं। आलू की छंटाई कर कट्टों में भरकर ट्रैक्टरों में लाद दिया जाता है और तुरंत उठा लिया जाता है।
जिले में इस समय 3797 और सूर्या किस्म के आलू का भाव 550 से 650 रुपये प्रति कट्टा तक मिल रहा है, जबकि चिप्सौना आलू 500-525 रुपये और हाईब्रिड आलू 400-450 रुपये प्रति कट्टा बिक रहा है। हालांकि कीमत आलू की किस्म, साइज और गुणवत्ता पर निर्भर कर रही है। किसानों को लोन, बारदाना उपलब्ध कराने और ढुलाई में सहयोग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। कुछ व्यापारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर किसानों को आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा ताकि वे तुरंत बिक्री के दबाव में न आएं।
खेतों में व्यापारी सीधे आकर 550 से 650 रुपये प्रति कट्टा तक आलू खरीद रहे हैं। इससे किसानों को मंडी तक ले जाने की परेशानी नहीं होती। मैंने अपने 10 बीघा 3797 आलू 600 रुपये प्रति कट्टा बेच दिया।- अजय सिंह, किसान।
कुछ किसान खेतों से ही आलू बेच रहे हैं, जबकि कई किसान अभी कोल्ड स्टोरेज में भंडारण की तैयारी कर रहे हैं। हम भी भंडारण करेंगे ताकि आगे बेहतर भाव मिल सके।- अमीरचंद चौधरी, किसान।
कोल्ड स्टोरेज संचालक किसानों को लोन, बारदाना और ढुलाई जैसी सुविधाएं दे रहे हैं। 3797 और सूर्या आलू की मांग ज्यादा है। मैंने 3797 आलू 580 रुपये प्रति कट्टा और हाईब्रिड 450 रुपये प्रति कट्टा बेच दिया।- रामेश्वर बघेल, किसान।
खोदाई से पूर्व ही व्यापारी खेतों का मुआयना ले कर रहे हैं सौंदा
कुछ व्यापारी खोदाई से पहले ही खेतों का निरीक्षण कर अनुमानित पैदावार के आधार पर सौदा तय कर लेते हैं। तय दिन मजदूरों के साथ पहुंचकर आलू निकलवाते हैं और सीधे उठान कर लेते हैं। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें मंडी तक आलू ले जाने की परेशानी से राहत मिल जाती है और मजदूरी, पैकिंग व ढुलाई की व्यवस्था भी व्यापारी ही कर देते हैं। जिन खेतों में साफ और बड़े आकार का आलू निकल रहा है वहां व्यापारी ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं। खासकर 3797 और सूर्या किस्म के आलू की मांग अधिक देखी जा रही है, जिससे कई जगह व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी दिखाई दे रही है।
अगले 8 से 10 दिनों में हो जाएगी अधिकांश खोदाई
पिछले एक सप्ताह से मौसम साफ रहने के कारण खोदाई की गति तेज हुई है। गांवों में सुबह से ट्रैक्टरों और मजदूरों की आवाजाही शुरू हो जाती है और खेतों में खोदाई, छंटाई और पैकिंग का काम एक साथ चल रहा है। किसानों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहा तो अगले 8 से 10 दिनों में अधिकांश खेतों से आलू निकल जाएगा
कोल्ड स्टोरेजों में अभी पसरा सन्नाटा
तेज खोदाई के बावजूद इस बार जिले के कई कोल्ड स्टोरेजों में अभी अपेक्षित भीड़ नहीं दिख रही है। पिछले वर्षों में इस समय तक कोल्ड स्टोरेजों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार कई स्थानों पर अभी सन्नाटा नजर आ रहा है। कम पैदावार और खेतों से सीधे हो रही बिक्री के कारण शुरुआती दिनों में कोल्ड स्टोरेजों में आलू की आवक कम बताई जा रही है। इससे संचालकों की चिंता भी बढ़ गई है कि इस बार भंडारण क्षमता पूरी तरह भर पाएगी या नहीं।
मजदूरों की बढ़ी मांग
आलू की खोदाई तेज होने के साथ ही खेतों में मजदूरों की मांग भी बढ़ गई है। खोदाई, छंटाई और पैकिंग के लिए बड़ी संख्या में मजदूर लगाए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मजदूरों की कमी के कारण किसानों को बाहर से मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं, जिससे मजदूरी दरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा भाव
व्यापारियों का कहना है कि इस समय आलू का भाव पूरी तरह गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा है। साफ और मीडियम साइज के आलू को बेहतर कीमत मिल रही है, जबकि हल्के या मिश्रित साइज के आलू का भाव लगभग 100 रुपये तक कम मिल रहा है। इसी कारण किसान खोदाई के दौरान आलू की अच्छी तरह छंटाई करवा रहे हैं।
