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Hathras News: सात माह बाद अग्निवीर सचिन बलिदानी घोषित, सेना ने दी श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 24 Mar 2026 02:37 AM IST
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बिलखती सचिन की बहन श्वेता। संवाद
- फोटो : Samvad
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सात माह पहले उत्तराखंड की हर्षिल घाटी के गांव धराली में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से लापता चल रहे गांव करील निवासी अग्निवीर सचिन पौनियां को उत्तराखंड प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया है। सेना ने भी उन्हें बलिदानी का दर्जा दिया है। सोमवार को गांव करील में उन्हें श्रद्धांजलि और सलामी दी गई।
गत वर्ष पांच अगस्त को उत्तराखंड में बादल फट गया था। भूस्खलन और खीर गंगा नदी में आई बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे में धराली गांव दब गया था। बादल फटने के बाद 14वीं बटालियन दी राजपूताना राइफल्स के सचिन सहित 11 जवानों को राहत कार्य के लिए भेजा गया था, तभी से सचिन लापता थे।
बाद में एक क्षत विक्षत शव मिला था,जिसकी पहचान के लिए सचिन के परिजनों को बुलाया गया था, लेकिन डीएनए जांच में उसके सचिन का शव होने की पुष्टि नहीं हुई थी। एसडीएम, मटवाडी, उत्तरकाशी के पत्र के आधार पर 18 दिसंबर को उन्हें अनंतिम रूप से मृत घोषित किया गया था।
सोमवार को सेना के अग्निवीर सचिन पौनियां को श्रद्धांजलि और सलामी देने की सूचना जैसे ही क्षेत्र के लोगों में पहुंची तो काफी संख्या में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, युवक अपनी कार व बाइकों से मथुरा बरेली रोड़ के निकट खुटीपुरी मार्ग पर एकत्रित हो गए। जैसे ही सेना के जवानों की गाड़ी वहां पहुंची लोगों ने भारत माता की जय और सचिन पौनियां अमर रहे नारे शुरू हो गए। गाड़ियों के काफिले के साथ एसडीएम सदर राज बहादुर सिंह व मुरसान पुलिस सहित सेना की गाड़ी गांव करील पहुंची।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा, राजेश सिंह, जिला पंचायत सदस्य राजा गरूणध्वज सिंह, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी चन्द्रवीर सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष श्याम सिंह प्रधान, गिरेंद्र चौधरी, प्रवीन पौनियां, हंबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
परिजन बोले-अंतिम दर्शनों की आस नहीं हुई पूरी
मुरसान। सोमवार की सुबह जैसे ही गांव में सेना के लोग पहुंचे तो अग्निवीर सचिन के परिवारीजन बिलख पड़े। पिता चन्द्रवीर सिंह बार-बार बेटे को पुकार रहे थे। उनका कहना था कि वह अपने बेटे के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके हैं। अब परिवार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है।
सचिन की मां लक्ष्मी और बहन श्वेता उनकी याद आते ही रोने लगती हैं। इकलौते बेटे के बारे में सोच-सोचकर मां आए दिन बेहोश हो जाती हैं। सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सचिन के पिता चन्द्रवीर सिंह को तिरंगा और बलिदानी होने का प्रमाण पत्र दिया। उस दौरान वह सुध-बुध खो बैठे। आसपास खड़े लोगों ने चन्द्रवीर सिंह को संभाला। परिवार के अन्य सदस्य भी बिलखकर रोने लगे। संवाद
इनसेट
चार अगस्त को फोन पर की थी घर वालों से बात, पांच को हादसे के शिकार हो गए
सचिन पौनियां ने गांव के ही तुहीराम इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की और 2021 में बीए के साथ-साथ एनसीसी में प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान सचिन ने सेना में भर्ती की तैयारी शुरू कर दी। 30 अक्तूबर 2024 को सचिन अग्निवीर के रूप में सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली तैनाती 19 जून को उत्तरकाशी के धराली स्थित हर्षिल घाटी में हुई। पहली तैनाती के लिए सचिन अपने घर से अपने माता-पिता सहित अन्य बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर गए थे। चार अगस्त को सचिन ने अपने परिवार सहित दोस्तों से भी फोन पर बातचीत की थी। पांच अगस्त को हादसे का शिकार हो गए।
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गत वर्ष पांच अगस्त को उत्तराखंड में बादल फट गया था। भूस्खलन और खीर गंगा नदी में आई बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे में धराली गांव दब गया था। बादल फटने के बाद 14वीं बटालियन दी राजपूताना राइफल्स के सचिन सहित 11 जवानों को राहत कार्य के लिए भेजा गया था, तभी से सचिन लापता थे।
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बाद में एक क्षत विक्षत शव मिला था,जिसकी पहचान के लिए सचिन के परिजनों को बुलाया गया था, लेकिन डीएनए जांच में उसके सचिन का शव होने की पुष्टि नहीं हुई थी। एसडीएम, मटवाडी, उत्तरकाशी के पत्र के आधार पर 18 दिसंबर को उन्हें अनंतिम रूप से मृत घोषित किया गया था।
सोमवार को सेना के अग्निवीर सचिन पौनियां को श्रद्धांजलि और सलामी देने की सूचना जैसे ही क्षेत्र के लोगों में पहुंची तो काफी संख्या में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग, युवक अपनी कार व बाइकों से मथुरा बरेली रोड़ के निकट खुटीपुरी मार्ग पर एकत्रित हो गए। जैसे ही सेना के जवानों की गाड़ी वहां पहुंची लोगों ने भारत माता की जय और सचिन पौनियां अमर रहे नारे शुरू हो गए। गाड़ियों के काफिले के साथ एसडीएम सदर राज बहादुर सिंह व मुरसान पुलिस सहित सेना की गाड़ी गांव करील पहुंची।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह कुशवाहा, राजेश सिंह, जिला पंचायत सदस्य राजा गरूणध्वज सिंह, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी चन्द्रवीर सिंह, रालोद जिलाध्यक्ष श्याम सिंह प्रधान, गिरेंद्र चौधरी, प्रवीन पौनियां, हंबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
परिजन बोले-अंतिम दर्शनों की आस नहीं हुई पूरी
मुरसान। सोमवार की सुबह जैसे ही गांव में सेना के लोग पहुंचे तो अग्निवीर सचिन के परिवारीजन बिलख पड़े। पिता चन्द्रवीर सिंह बार-बार बेटे को पुकार रहे थे। उनका कहना था कि वह अपने बेटे के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सके हैं। अब परिवार की आखिरी उम्मीद भी टूट गई है।
सचिन की मां लक्ष्मी और बहन श्वेता उनकी याद आते ही रोने लगती हैं। इकलौते बेटे के बारे में सोच-सोचकर मां आए दिन बेहोश हो जाती हैं। सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सचिन के पिता चन्द्रवीर सिंह को तिरंगा और बलिदानी होने का प्रमाण पत्र दिया। उस दौरान वह सुध-बुध खो बैठे। आसपास खड़े लोगों ने चन्द्रवीर सिंह को संभाला। परिवार के अन्य सदस्य भी बिलखकर रोने लगे। संवाद
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चार अगस्त को फोन पर की थी घर वालों से बात, पांच को हादसे के शिकार हो गए
सचिन पौनियां ने गांव के ही तुहीराम इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की और 2021 में बीए के साथ-साथ एनसीसी में प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान सचिन ने सेना में भर्ती की तैयारी शुरू कर दी। 30 अक्तूबर 2024 को सचिन अग्निवीर के रूप में सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली तैनाती 19 जून को उत्तरकाशी के धराली स्थित हर्षिल घाटी में हुई। पहली तैनाती के लिए सचिन अपने घर से अपने माता-पिता सहित अन्य बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर गए थे। चार अगस्त को सचिन ने अपने परिवार सहित दोस्तों से भी फोन पर बातचीत की थी। पांच अगस्त को हादसे का शिकार हो गए।