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Hathras News: बिल टू-शिप टू के नए नियम पर अगस्त तक रोक
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
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जीएसटी की बिल टू-शिप टू प्रणाली में लागू नया नियम अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत ई-वे बिल में बिल तथा माल प्राप्त करने वाली दोनों फर्मों का जीएसटीएन अनिवार्य रूप से दर्ज करने के नए नियम पर रोक लगा दी गई है। जिससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है और वे पहले की तरह ई-वे बिल तैयार कर सकेंगे।
अब तक माल जिस फर्म के पते पर भेजा जाता था, उसका जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य नहीं था। इससे कुछ मामलों में फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग और कर चोरी की आशंकाएं बनी रहती थीं। इन्हीं अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से दोनों फर्मों का जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि कारोबारियों और कर सलाहकारों की ओर से नई व्यवस्था को लागू करने के लिए समय देने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम में आवश्यक बदलाव अभी पूरे नहीं हो सके हैं।
व्यापारी नेता तरुण पंकज ने कहा कि नए नियम लागू होने के बाद ई-वे बिल प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी। बिल बनाने वाली फर्म और वास्तविक माल प्राप्त करने वाली फर्म, दोनों का जीएसटीएन दर्ज होने से माल की आवाजाही का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। उपायुक्त राज्य कर आरके सिंह ने बताया कि फिलहाल नए नियम को स्थगित किया गया है।
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अब तक माल जिस फर्म के पते पर भेजा जाता था, उसका जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य नहीं था। इससे कुछ मामलों में फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग और कर चोरी की आशंकाएं बनी रहती थीं। इन्हीं अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से दोनों फर्मों का जीएसटीएन दर्ज करना अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि कारोबारियों और कर सलाहकारों की ओर से नई व्यवस्था को लागू करने के लिए समय देने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर और बिलिंग सिस्टम में आवश्यक बदलाव अभी पूरे नहीं हो सके हैं।
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व्यापारी नेता तरुण पंकज ने कहा कि नए नियम लागू होने के बाद ई-वे बिल प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी। बिल बनाने वाली फर्म और वास्तविक माल प्राप्त करने वाली फर्म, दोनों का जीएसटीएन दर्ज होने से माल की आवाजाही का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। उपायुक्त राज्य कर आरके सिंह ने बताया कि फिलहाल नए नियम को स्थगित किया गया है।
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