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Hathras News: गृहस्थी चलाने वाली महिलाएं स्टीयरिंग थामने में पीछे
Tue, 30 Jun 2026 02:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 30 Jun 2026 02:22 AM IST
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कार ड्राइव करती एक महिला। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
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हाथरस। बेहद कुशलता के साथ घर-गहस्थी संभालने वाली हाथरस की महिलाएं कार की स्टीयरिंग थामने में पुरुषों से बहुत पीछे हैं।संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में महिलाओं द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की संख्या में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन यह रफ्तार बेहद सुस्त है। जिले में हर 100 नए ड्राइविंग लाइसेंस में केवल दो से तीन ही महिलाओं के नाम जारी हो रहे हैं।
आरटीओ के अनुसार वर्ष 2022 में कुल 19,383 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जिनमें केवल 389 महिलाओं के थे। वर्ष 2023 में 16,256 लाइसेंसों में 418 महिलाओं ने लाइसेंस बनवाया। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 454 हुई, जबकि वर्ष 2025 में पहली बार 530 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया।
वर्ष 2026 में जून तक ही 13,965 लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें 372 महिलाओं के हैं। अनुमान है कि वर्ष के अंत तक यह संख्या 600 के आसपास पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के बढ़ते अवसरों के चलते अब युवतियां और महिलाएं कार चलाने की ओर आकर्षित हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक संकोच, परिवारों की सोच और निजी वाहन उपलब्ध न होना अभी भी बड़ी बाधाएं हैं। यही कारण है कि महिलाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत काफी कम है। संवाद
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शहरी कामकाजी महिलाओं तक सीमित है दायरा
शहर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाना अब जरूरत बन गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर हैं। परिवहन विभाग के आरआई राहुल शर्मा का कहना है कि यदि महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण और जागरूकता के अधिक अवसर मिलें तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।
पांच वर्षों में जारी ड्राइविंग लाइसेंस
वर्ष कुल जारी डीएल महिलाएं
2022 19,383 389
2023 16,256 418
2024 17,114 454
2025 27,939 530
2026 13,965 372
(2026 के आंकड़े जून माह तक)
थर्ड जेंडर का आंकड़ा शून्य
संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में वर्ष 2023 से अभी तक किसी थर्ड जेंडर ने लाइसेंस नहीं बनवाया है। वर्ष 2018 में एक, 2019 में तीन, 2020 में दो, 2021 में पांच और 2023 में थर्ड जेंडर की ओर से छह लाइसेंस बनवाए गए थे।
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आरटीओ के अनुसार वर्ष 2022 में कुल 19,383 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जिनमें केवल 389 महिलाओं के थे। वर्ष 2023 में 16,256 लाइसेंसों में 418 महिलाओं ने लाइसेंस बनवाया। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 454 हुई, जबकि वर्ष 2025 में पहली बार 530 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया।
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वर्ष 2026 में जून तक ही 13,965 लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें 372 महिलाओं के हैं। अनुमान है कि वर्ष के अंत तक यह संख्या 600 के आसपास पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के बढ़ते अवसरों के चलते अब युवतियां और महिलाएं कार चलाने की ओर आकर्षित हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक संकोच, परिवारों की सोच और निजी वाहन उपलब्ध न होना अभी भी बड़ी बाधाएं हैं। यही कारण है कि महिलाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत काफी कम है। संवाद
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शहरी कामकाजी महिलाओं तक सीमित है दायरा
शहर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाना अब जरूरत बन गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर हैं। परिवहन विभाग के आरआई राहुल शर्मा का कहना है कि यदि महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण और जागरूकता के अधिक अवसर मिलें तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।
पांच वर्षों में जारी ड्राइविंग लाइसेंस
वर्ष कुल जारी डीएल महिलाएं
2022 19,383 389
2023 16,256 418
2024 17,114 454
2025 27,939 530
2026 13,965 372
(2026 के आंकड़े जून माह तक)
थर्ड जेंडर का आंकड़ा शून्य
संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों में वर्ष 2023 से अभी तक किसी थर्ड जेंडर ने लाइसेंस नहीं बनवाया है। वर्ष 2018 में एक, 2019 में तीन, 2020 में दो, 2021 में पांच और 2023 में थर्ड जेंडर की ओर से छह लाइसेंस बनवाए गए थे।