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Jalaun News: बेमौसम बारिश से बढ़ी चिंता, फसल बचाने में जुटे किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में कटी पड़ी फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात जुटे हैं। कहीं फसल को तेजी से घर पहुंचाया जा रहा है तो कहीं उसे ढककर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। हालत यह है कि किसान रात में भी कटाई और मड़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर बारिश दोबारा हो गई तो वह बर्बाद हो जाएंगे।
किसानों के अनुसार सरसों, मटर और चना की फसल को 40 से 50 फीसद तक नुकसान की आशंका है। वहीं तेज हवा से कई स्थानों पर गेहूं की फसल बिछ गई है, जिससे दाना कमजोर होने और पैदावार घटने का खतरा बढ़ गया है।
जिले में शुक्रवार रात हुई दो घंटे बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा चिंता बलकट खेती करने वाले व खेत में दलहन की खेती करने वाले किसानों को सता रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में करीब पचास फीसद दलहनी फसल कटी पड़ी है। हालत यह है कि बारिश की बूंदें फसल पर पड़ने से दाना बिखरने, चटकने व काला पड़ने की संभावना बनी हुई है। क्षेत्रीय किसान अखिलेश पटेल, राजू पाल,मनोहर, श्यामबाबू, हरीसिंह, शशिकांत तिवारी आदि ने बताया कि एक बीघा फसल तैयार करने में हजारों रुपये खर्च होते हैं, ऐसे में बारिश से भारी नुकसान हो रहा है। कमतरी के किसान रामस्वरूप ने कहा कि पूरा परिवार फसल बचाने में जुटा है।
किसी भी तरह बस फसल घर आ जाए क्योंकि अगर दोबारा मौसम खराब हुआ तो वह कहीं के नहीं रहेंगे। किसानों का कहना है कि कई किसानों ने कर्जा लेकर खेती की थी। उम्मीद है कि अच्छी पैदावार से कर्जा तो चुकता हो जाएगा।
साथ ही मुनाफा भी होगा लेकिन आसमान से बरसी आफत ने उनका बना बनाया खेल बिगाड़ दिया है। वहीं पानी व तेज हवा से बिछी गेहूं की फसल में भी दाना कमजोर होने की आशंका बनी हुई है। जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। सामान्य स्थिति में प्रति बीघा 7 से 8 क्विंटल उत्पादन होता है लेकिन इस बार नुकसान के कारण पैदावार कम रहने की आशंका है।
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उरई। बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में कटी पड़ी फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात जुटे हैं। कहीं फसल को तेजी से घर पहुंचाया जा रहा है तो कहीं उसे ढककर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। हालत यह है कि किसान रात में भी कटाई और मड़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर बारिश दोबारा हो गई तो वह बर्बाद हो जाएंगे।
किसानों के अनुसार सरसों, मटर और चना की फसल को 40 से 50 फीसद तक नुकसान की आशंका है। वहीं तेज हवा से कई स्थानों पर गेहूं की फसल बिछ गई है, जिससे दाना कमजोर होने और पैदावार घटने का खतरा बढ़ गया है।
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जिले में शुक्रवार रात हुई दो घंटे बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे ज्यादा चिंता बलकट खेती करने वाले व खेत में दलहन की खेती करने वाले किसानों को सता रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में करीब पचास फीसद दलहनी फसल कटी पड़ी है। हालत यह है कि बारिश की बूंदें फसल पर पड़ने से दाना बिखरने, चटकने व काला पड़ने की संभावना बनी हुई है। क्षेत्रीय किसान अखिलेश पटेल, राजू पाल,मनोहर, श्यामबाबू, हरीसिंह, शशिकांत तिवारी आदि ने बताया कि एक बीघा फसल तैयार करने में हजारों रुपये खर्च होते हैं, ऐसे में बारिश से भारी नुकसान हो रहा है। कमतरी के किसान रामस्वरूप ने कहा कि पूरा परिवार फसल बचाने में जुटा है।
किसी भी तरह बस फसल घर आ जाए क्योंकि अगर दोबारा मौसम खराब हुआ तो वह कहीं के नहीं रहेंगे। किसानों का कहना है कि कई किसानों ने कर्जा लेकर खेती की थी। उम्मीद है कि अच्छी पैदावार से कर्जा तो चुकता हो जाएगा।
साथ ही मुनाफा भी होगा लेकिन आसमान से बरसी आफत ने उनका बना बनाया खेल बिगाड़ दिया है। वहीं पानी व तेज हवा से बिछी गेहूं की फसल में भी दाना कमजोर होने की आशंका बनी हुई है। जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। सामान्य स्थिति में प्रति बीघा 7 से 8 क्विंटल उत्पादन होता है लेकिन इस बार नुकसान के कारण पैदावार कम रहने की आशंका है।