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Jalaun News: नगर पालिका के तीन वर्षों के कामों की जांच शुरू, कई में अनियमितताओं की चर्चा
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उरई। नगर पालिका परिषद उरई में पिछले तीन वर्षों के विकास कार्यों की जांच शुरू होने से हड़कंप मच गया है। उपजिलाधिकारी जालौन रिंकू सिंह राही द्वारा वर्ष 2023-24 से लेकर 2026-27 तक के विकास कार्यों और भुगतानों से संबंधित अभिलेख तलब किए जाने के बाद नगर पालिका में पूरे दिन चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। कई चर्चित मामलों में अनियमितताओं के आरोप पहले से लगते रहे हैं, ऐसे में जांच की जद में कई अधिकारी और कर्मचारी आ सकते हैं।
नगर पालिका के सभासद लंबे समय से विकास कार्यों में गड़बड़ी, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और टेंडर आवंटन में मनमानी के आरोप लगाते रहे हैं। सभासदों ने अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने, बिना काम के भुगतान कराने के प्रयास और तानाशाही रवैये जैसे गंभीर आरोप लगाकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराए जाने की मांग की थी।
इसी क्रम में अब एसडीएम ने तीन वर्षों के सभी विकास कार्यों, निविदाओं, भुगतान विवरण, मापन पुस्तिकाओं (एमबी), कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों और अन्य अभिलेखों की मांग की है। नगर पालिका सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे मामलों की भी पड़ताल हो सकती है, जिनको लेकर पहले विवाद उठ चुके हैं।
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चर्चाओं में सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत के नाम पर हुए खर्च, घंटाघर पर लगी लाइटों के भुगतान, नगर पालिका लाइब्रेरी से सामान गायब होने के मामले और पिछले वर्ष रैन बसेरा संचालन से जुड़े भुगतानों का मामला प्रमुख रूप से शामिल है। इन मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, नगर पालिका में अभिलेख जुटाने की कवायद तेज हो गई है और कर्मचारी पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुटे हैं।
नगर पालिका के सभासद लंबे समय से विकास कार्यों में गड़बड़ी, भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और टेंडर आवंटन में मनमानी के आरोप लगाते रहे हैं। सभासदों ने अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने, बिना काम के भुगतान कराने के प्रयास और तानाशाही रवैये जैसे गंभीर आरोप लगाकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराए जाने की मांग की थी।
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इसी क्रम में अब एसडीएम ने तीन वर्षों के सभी विकास कार्यों, निविदाओं, भुगतान विवरण, मापन पुस्तिकाओं (एमबी), कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों और अन्य अभिलेखों की मांग की है। नगर पालिका सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे मामलों की भी पड़ताल हो सकती है, जिनको लेकर पहले विवाद उठ चुके हैं।
चर्चाओं में सार्वजनिक शौचालयों की मरम्मत के नाम पर हुए खर्च, घंटाघर पर लगी लाइटों के भुगतान, नगर पालिका लाइब्रेरी से सामान गायब होने के मामले और पिछले वर्ष रैन बसेरा संचालन से जुड़े भुगतानों का मामला प्रमुख रूप से शामिल है। इन मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, नगर पालिका में अभिलेख जुटाने की कवायद तेज हो गई है और कर्मचारी पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुटे हैं।