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Kannauj News: खाद के दामों में इजाफा से किसानों की चिंता बढ़ी
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कन्नौज। डीजल, बिजली और बीज की बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों को अब एक और झटका लगा है। हाल ही में एनपीके खाद के दामों में हुई बढ़ोतरी ने अन्नदाताओं की चिंता दोगुनी कर दी है। इत्रनगरी के किसान खाद की बढ़ती कीमतों से खेती का लाभ कम होने को लेकर परेशान हैं।
फसलों के बेहतर विकास और अच्छी पैदावार के लिए एनपीके उर्वरक आवश्यक है। बोआई से लेकर फसल के बड़े होने तक इसका भारी मात्रा में उपयोग होता है। दामों में वृद्धि से किसानों की जेब और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। स्थानीय किसान आलोक कुमार, पुष्पेंद्र, शैलेंद्र और राजकिशोर ने बताया कि लागत पहले ही बढ़ रही थी।
फसलों का उचित दाम मिलना भी मुश्किल हो रहा है। अब खाद के दामों में इस इजाफे ने उनकी कमर तोड़ दी है। किसानों को प्रति बोरी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे उनका मौसमी बजट बिगड़ गया है। छोटे और सीमांत किसानों के पास नकद पैसों की कमी होती है। कई किसानों को अतिरिक्त कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने किसानों को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरक के बजाय जैविक खाद पर निर्भरता बढ़ानी चाहिए। इससे मिट्टी की शक्ति में सुधार होगा और किसानों की आय भी बढ़ेगी। अच्छा उत्पादन मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
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एनपीके के बढ़े दाम
एनपीके 12:32:16 और 10:26:26 दोनों के दाम जनवरी-फरवरी के 1900 रुपये से बढ़कर 2450 रुपये हो गए हैं। एनपीके 20:20:0:13 का दाम 1400 रुपये से बढ़कर 2100 रुपये हो गया है। एनपीके 16:20:0:13 और 15:15:15 भी क्रमशः 1400 रुपये और 1470 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये पर पहुंच गए हैं। यूरिया एसएसपी का दाम भी 800 रुपये से बढ़कर 1000 रुपये हो गया है।
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डीजल, बिजली और बीज की मार झेल रहे किसानों को अब एक और बड़ा झटका लगा है। हाल ही में एनपीके उर्वरक के दामों में हुई बढ़ोतरी ने अन्नदाताओं की चिंता को दोगुना कर दिया है। आलू, मक्का और खुशबूदार फसलों के गढ़ कहे जाने वाले इत्रनगरी के किसान इस बात को लेकर बेहद परेशान हैं कि खाद की बढ़ती कीमतों से उनकी खेती की लागत बढ़ जाएगी, जिससे मुनाफा नाममात्र का रह जाएगा।
फसलों के बेहतर विकास और अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम यानी एनपीके उर्वरक की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। बुवाई से लेकर फसल के बड़े होने तक विभिन्न चरणों में एनपीके खाद का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दाम बढ़ने से सीधा असर किसानों की जेब और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ने की पूरी संभावना है। स्थानीय किसान आलोक कुमार, पुष्पेंद्र, शैलेंद्र, राजकिशोर का कहना है कि पहले से ही खेती में लागत लगातार बढ़ रही है और फसलों का उचित दाम मिलना मुश्किल हो रहा है। अब खाद के दामों में हुए इस इजाफे ने उनकी कमर तोड़ दी है। खाद के बढ़े दामों के कारण किसानों को अब प्रति बोरी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे उनका सीजनल बजट बिगड़ गया है। छोटे और सीमांत किसानों के पास नगद पैसों की कमी होती है। खाद महंगी होने के कारण कई किसानों को साहूकारों या बैंकों से अतिरिक्त कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्जन
किसानों को उर्वरक की अपेक्षा जैविक खाद पर निर्भरता बढ़ानी चाहिए, जिससे मृदा शक्ति के साथ किसानों की आय में भी इजाफा होगा। अच्छा उत्पादन मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
- संतलाल गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी
इनसेट
यह बढ़े एनपीके के दाम
उर्वरक का ग्रेड जनवरी-फरवरी के दाम वर्तमान के दाम
एनपीके 12:32:16 1900 2450
एनपीके 10:26:26 1900 2450
एनपीके 20:20:0:13 1400 2100
एनपीके 16:20:0:13 1400 2000
एनपीके 15:15:15 1470 2000
यूरिया एसएसपी 800 1000
फसलों के बेहतर विकास और अच्छी पैदावार के लिए एनपीके उर्वरक आवश्यक है। बोआई से लेकर फसल के बड़े होने तक इसका भारी मात्रा में उपयोग होता है। दामों में वृद्धि से किसानों की जेब और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। स्थानीय किसान आलोक कुमार, पुष्पेंद्र, शैलेंद्र और राजकिशोर ने बताया कि लागत पहले ही बढ़ रही थी।
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फसलों का उचित दाम मिलना भी मुश्किल हो रहा है। अब खाद के दामों में इस इजाफे ने उनकी कमर तोड़ दी है। किसानों को प्रति बोरी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे उनका मौसमी बजट बिगड़ गया है। छोटे और सीमांत किसानों के पास नकद पैसों की कमी होती है। कई किसानों को अतिरिक्त कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने किसानों को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसानों को उर्वरक के बजाय जैविक खाद पर निर्भरता बढ़ानी चाहिए। इससे मिट्टी की शक्ति में सुधार होगा और किसानों की आय भी बढ़ेगी। अच्छा उत्पादन मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
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एनपीके 12:32:16 और 10:26:26 दोनों के दाम जनवरी-फरवरी के 1900 रुपये से बढ़कर 2450 रुपये हो गए हैं। एनपीके 20:20:0:13 का दाम 1400 रुपये से बढ़कर 2100 रुपये हो गया है। एनपीके 16:20:0:13 और 15:15:15 भी क्रमशः 1400 रुपये और 1470 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये पर पहुंच गए हैं। यूरिया एसएसपी का दाम भी 800 रुपये से बढ़कर 1000 रुपये हो गया है।
डीजल, बिजली और बीज की मार झेल रहे किसानों को अब एक और बड़ा झटका लगा है। हाल ही में एनपीके उर्वरक के दामों में हुई बढ़ोतरी ने अन्नदाताओं की चिंता को दोगुना कर दिया है। आलू, मक्का और खुशबूदार फसलों के गढ़ कहे जाने वाले इत्रनगरी के किसान इस बात को लेकर बेहद परेशान हैं कि खाद की बढ़ती कीमतों से उनकी खेती की लागत बढ़ जाएगी, जिससे मुनाफा नाममात्र का रह जाएगा।
फसलों के बेहतर विकास और अच्छी पैदावार के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम यानी एनपीके उर्वरक की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। बुवाई से लेकर फसल के बड़े होने तक विभिन्न चरणों में एनपीके खाद का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दाम बढ़ने से सीधा असर किसानों की जेब और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ने की पूरी संभावना है। स्थानीय किसान आलोक कुमार, पुष्पेंद्र, शैलेंद्र, राजकिशोर का कहना है कि पहले से ही खेती में लागत लगातार बढ़ रही है और फसलों का उचित दाम मिलना मुश्किल हो रहा है। अब खाद के दामों में हुए इस इजाफे ने उनकी कमर तोड़ दी है। खाद के बढ़े दामों के कारण किसानों को अब प्रति बोरी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे उनका सीजनल बजट बिगड़ गया है। छोटे और सीमांत किसानों के पास नगद पैसों की कमी होती है। खाद महंगी होने के कारण कई किसानों को साहूकारों या बैंकों से अतिरिक्त कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्जन
किसानों को उर्वरक की अपेक्षा जैविक खाद पर निर्भरता बढ़ानी चाहिए, जिससे मृदा शक्ति के साथ किसानों की आय में भी इजाफा होगा। अच्छा उत्पादन मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
- संतलाल गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी
इनसेट
यह बढ़े एनपीके के दाम
उर्वरक का ग्रेड जनवरी-फरवरी के दाम वर्तमान के दाम
एनपीके 12:32:16 1900 2450
एनपीके 10:26:26 1900 2450
एनपीके 20:20:0:13 1400 2100
एनपीके 16:20:0:13 1400 2000
एनपीके 15:15:15 1470 2000
यूरिया एसएसपी 800 1000