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Kannauj News: बिजली निगम का नया फॉर्मूला, फॉल्ट हमारा, खर्चा तुम्हारा
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तिर्वा। बिजली का बिल समय पर भरिए। फॉल्ट ठीक कराने के लिए अपनी जेब से रुपये खर्च कीजिए। इलाके में बिजली निगम का यही नया फॉर्मूला सामने आया है। हालात ऐसे हैं कि मरम्मत कार्य के लिए जरूरी सामान तक निगम के पास नहीं है। उपभोक्ताओं को ही केबल, टेप व अन्य सामग्री का इंतजाम करना पड़ रहा है।
ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत की विधानसभा क्षेत्र का आलम यह है कि रविवार को कस्बे के कालिका नगर मोहल्ले में अंडरग्राउंड बिजली आपूर्ति से जुड़े जर्जर डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स को बदलने के लिए विद्युत निगम के कर्मचारी पहुंचे। मोहल्लेवासियों को उम्मीद थी कि निगम अपने संसाधनों के साथ काम करेगा लेकिन नया बॉक्स लगाने से पहले ही कर्मचारियों ने केबल और टेप की व्यवस्था करने को कह दिया। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने खुद पैसे खर्च कर सामान उपलब्ध कराया, तब जाकर मरम्मत कार्य शुरू हो सका।
मोहल्ले के मोहित कुमार, त्रिमोहन सविता, अरविंद शर्मा, रमेश यादव और रामस्नेही ने आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में जब भी कोई फॉल्ट होता है, कर्मचारी मरम्मत के नाम पर रुपये या सामान की मांग करते हैं। इस बार भी डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स ठीक करने के लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लाइनमैन जगदीश कुमार ने भी संसाधनों की कमी स्वीकार की। उन्होंने बताया कि फॉल्ट ठीक करने के लिए निगम की ओर से टेप समेत जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे में या तो खुद व्यवस्था करनी पड़ती है या फिर उपभोक्ताओं का सहयोग लेना पड़ता है।
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सवाल जो जवाब मांग रहे हैं...
-जब उपभोक्ता नियमित बिजली बिल दे रहे हैं तो मरम्मत का खर्च क्यों उठाएं।
-क्या बिजली निगम के पास फॉल्ट सुधारने के लिए बुनियादी संसाधन भी नहीं हैं।
-यदि व्यवस्था लाइनमैन के भरोसे है तो निगम की जिम्मेदारी क्या है।
-आखिर जनता कब तक बिजली के साथ-साथ मरम्मत का खर्च भी उठाती रहेगी।
वर्जन
फॉल्ट ठीक करने के लिए सामग्री की व्यवस्था करना लाइनमैन की जिम्मेदारी है। विभाग की ओर से अलग से कोई संसाधन उपलब्ध नहीं कराया जाता।
-अरविंद कुमार, एसडीओ
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ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश राजपूत की विधानसभा क्षेत्र का आलम यह है कि रविवार को कस्बे के कालिका नगर मोहल्ले में अंडरग्राउंड बिजली आपूर्ति से जुड़े जर्जर डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स को बदलने के लिए विद्युत निगम के कर्मचारी पहुंचे। मोहल्लेवासियों को उम्मीद थी कि निगम अपने संसाधनों के साथ काम करेगा लेकिन नया बॉक्स लगाने से पहले ही कर्मचारियों ने केबल और टेप की व्यवस्था करने को कह दिया। मजबूरी में स्थानीय लोगों ने खुद पैसे खर्च कर सामान उपलब्ध कराया, तब जाकर मरम्मत कार्य शुरू हो सका।
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मोहल्ले के मोहित कुमार, त्रिमोहन सविता, अरविंद शर्मा, रमेश यादव और रामस्नेही ने आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में जब भी कोई फॉल्ट होता है, कर्मचारी मरम्मत के नाम पर रुपये या सामान की मांग करते हैं। इस बार भी डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स ठीक करने के लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लाइनमैन जगदीश कुमार ने भी संसाधनों की कमी स्वीकार की। उन्होंने बताया कि फॉल्ट ठीक करने के लिए निगम की ओर से टेप समेत जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे में या तो खुद व्यवस्था करनी पड़ती है या फिर उपभोक्ताओं का सहयोग लेना पड़ता है।
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सवाल जो जवाब मांग रहे हैं...
-जब उपभोक्ता नियमित बिजली बिल दे रहे हैं तो मरम्मत का खर्च क्यों उठाएं।
-क्या बिजली निगम के पास फॉल्ट सुधारने के लिए बुनियादी संसाधन भी नहीं हैं।
-यदि व्यवस्था लाइनमैन के भरोसे है तो निगम की जिम्मेदारी क्या है।
-आखिर जनता कब तक बिजली के साथ-साथ मरम्मत का खर्च भी उठाती रहेगी।
वर्जन
फॉल्ट ठीक करने के लिए सामग्री की व्यवस्था करना लाइनमैन की जिम्मेदारी है। विभाग की ओर से अलग से कोई संसाधन उपलब्ध नहीं कराया जाता।
-अरविंद कुमार, एसडीओ