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Kannauj News: इत्रनगरी से दो राज्यमंत्री, फिर भी स्वास्थ्य सेवाएं अधूरी
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कन्नौज। इत्रनगरी की 19 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सौ शैया अस्पताल, 50 शैया मेटरनिटी विंग के साथ ही 14 सीएचसी और 36 पीएचसी हैं। सरकारी अस्पतालों में इमारतें और संसाधन तो उपलब्ध हैं लेकिन मरीजों का इलाज करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। मेडिकल कॉलेज में बना कार्डियोलॉजी और कैंसर अस्पताल 10 साल से शोपीस बना है। कैंसर और हृदय रोगियों को इलाज के लिए 110 किलोमीटर सैफई व 80 किलोमीटर कानपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है। इत्रनगरी में दो राज्य मंत्रियों असीम अरुण और कैलाश राजपूत के होते हुए भी स्वास्थ्य सुविधाएं अधूरी हैं और रोगी जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने को मजबूर हैं।
फोटो :22: मेडिकल कॉलेज परिजन में बना कार्डियोलॉजी अस्पताल। संवाद
127 करोड़ खर्च पर नहीं मिल रहा दिल का इलाज
राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में वर्ष 2018 में 127 करोड़ से 125 बेड का कार्डियोलॉजी अस्पताल बना था। दिल के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होने वाला यह अस्पताल आठ वर्षों से खुद आईसीयू में है। अस्पताल के संचालन के लिए 338 पदों का सृजन प्रस्तावित हैं। इस अस्पताल को लेकर एक साल पहले मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। 11 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वित्तीय वर्ष के भीतर आवश्यक पदों को स्वीकृति दे दी जाएगी। ताकि अस्पताल का संचालन शुरू हो सके। वित्तीय वर्ष गुजरने के बाद फाइल अभी भी शासन के गलियारों में धूल फांक रही हैं।। संवाद
फोटो :23: मेडिकल काॅलेज में बना कैंसर अस्पताल। संवाद
जांच तो संभव पर नहीं मिलता कैंसर का इलाज
राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2016 में 163.31 करोड़ की लागत से 220 बेड का कैंसर अस्पताल बना लेकिन अब तक संचालन नहीं हो सका। वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने कैंसर अस्पताल के संचालन की कवायद शुरू की और फाइल बनाकर शासन को भेजी थी। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की स्वीकृति भी मिल गई लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया अटकी हुई है और अस्पताल का संचालन नहीं हो पा रहा है, जबकि कैंसर की बायोप्सी के अलावा अन्य जांच मेडिकल कॉलेज की फोटो :24: जिला अस्पताल परिसर में बना ट्रामा सेंटर। संवाद
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ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी मरीजों को होता इलाज
वर्ष 2016 में 95.40 लाख रुपये से जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया था। सरकार बदलने के बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। ट्रामा सेंटर के लिए आई सीटी स्कैन, पोर्टेबल एक्सरे मशीन, बेड और अन्य उपकरण जिला अस्पताल में स्थापित किए गए हैं। अब ट्रामा सेंटर में जिला अस्पताल की इमरजेंसी संचालित हो रही है और सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद रेफर की पर्ची थमा दी जा रही है। इसके अलावा उल्टी-दस्त, बुखार, सर्पदंश के रोगियों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। सीएमएस डॉ. जीएन द्विवेदी ने बताया कि ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण संचालन में दिक्कत हो रही है। संवाद
जुलाई माह में रेफर हृदय रोगी
राजकीय मेडिकल कॉलेज से फिरोजपुर निवासी नताशा (23), टिकरा निवासी रेखा (35) पत्नी राजन, विसंधुआ निवासी रोजी (35) पत्नी रियाज, तालग्राम के सीतापुरवा निवासी दुर्गा (35) पत्नी महेंद्र, सौरिख क्षेत्र के इसकिया निवासी देवी (55) पत्नी राजेंद्र सिंह, तिर्वा निवासी द्रोपदी देवी (65) पत्नी रामनाथ और ग्राम हरईपुर निवासी कोमल (20) पुत्री संजय सिंह को रेफर किया गया। इनके अलावा जिला अस्पताल और सौ शैय्या अस्पताल से चार से पांच मरीजों को सैफई रेफर किया जाता है।
वर्जन
कार्डियोलॉजी और कैंसर अस्पताल में पद सृजित होने पर ही संचालित हो सकेंगे। प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जल्द से जल्द ही अस्पतालों का संचालन शुरू हो सके।
-डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
वर्जन
कॉर्डियोलॉजी के संचालन के लिए वित्तमंत्री से वार्ता की गई है, जल्द ही उपकरण और पद सृजित हो जाएंगे, जिसके बाद कॉर्डियोलॉजी का संचालन शुरू हो जाएगा। वहीं, कैंसर अस्पताल संचालन के लिए टाटा मेमोरियल से बात की गई थी। उनके विशेषज्ञों की टीम अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आई थी। अभी टाटा मेमोरियल की ओर से उत्तर नहीं मिला है। उम्मीद है कि कैंसर अस्पताल भी जल्द शुरू होगा।
-असीम अरुण, समाज कल्याण राज्यमंत्री
वर्जन
राजकीय मेडिकल कॉलेज के कॉर्डियोलॉजी और कैंसर अस्पताल के संचालन के लिए जून में वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की थी और अस्पतालों में पद सृजन कराने की मांग की थी। क्षेत्र की जनता को बेहतर इलाज दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही दोनों अस्पताल संचालित होंगे और मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
-कैलाश राजपूत, ऊर्जा राज्यमंत्री
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फोटो :22: मेडिकल कॉलेज परिजन में बना कार्डियोलॉजी अस्पताल। संवाद
127 करोड़ खर्च पर नहीं मिल रहा दिल का इलाज
राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में वर्ष 2018 में 127 करोड़ से 125 बेड का कार्डियोलॉजी अस्पताल बना था। दिल के मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होने वाला यह अस्पताल आठ वर्षों से खुद आईसीयू में है। अस्पताल के संचालन के लिए 338 पदों का सृजन प्रस्तावित हैं। इस अस्पताल को लेकर एक साल पहले मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था। 11 जुलाई 2025 को हुई सुनवाई में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वित्तीय वर्ष के भीतर आवश्यक पदों को स्वीकृति दे दी जाएगी। ताकि अस्पताल का संचालन शुरू हो सके। वित्तीय वर्ष गुजरने के बाद फाइल अभी भी शासन के गलियारों में धूल फांक रही हैं।। संवाद
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फोटो :23: मेडिकल काॅलेज में बना कैंसर अस्पताल। संवाद
जांच तो संभव पर नहीं मिलता कैंसर का इलाज
राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2016 में 163.31 करोड़ की लागत से 220 बेड का कैंसर अस्पताल बना लेकिन अब तक संचालन नहीं हो सका। वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने कैंसर अस्पताल के संचालन की कवायद शुरू की और फाइल बनाकर शासन को भेजी थी। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती की स्वीकृति भी मिल गई लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया अटकी हुई है और अस्पताल का संचालन नहीं हो पा रहा है, जबकि कैंसर की बायोप्सी के अलावा अन्य जांच मेडिकल कॉलेज की फोटो :24: जिला अस्पताल परिसर में बना ट्रामा सेंटर। संवाद
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ट्रामा सेंटर में इमरजेंसी मरीजों को होता इलाज
वर्ष 2016 में 95.40 लाख रुपये से जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया था। सरकार बदलने के बाद कोई ध्यान नहीं दिया गया। ट्रामा सेंटर के लिए आई सीटी स्कैन, पोर्टेबल एक्सरे मशीन, बेड और अन्य उपकरण जिला अस्पताल में स्थापित किए गए हैं। अब ट्रामा सेंटर में जिला अस्पताल की इमरजेंसी संचालित हो रही है और सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद रेफर की पर्ची थमा दी जा रही है। इसके अलावा उल्टी-दस्त, बुखार, सर्पदंश के रोगियों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। सीएमएस डॉ. जीएन द्विवेदी ने बताया कि ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण संचालन में दिक्कत हो रही है। संवाद
जुलाई माह में रेफर हृदय रोगी
राजकीय मेडिकल कॉलेज से फिरोजपुर निवासी नताशा (23), टिकरा निवासी रेखा (35) पत्नी राजन, विसंधुआ निवासी रोजी (35) पत्नी रियाज, तालग्राम के सीतापुरवा निवासी दुर्गा (35) पत्नी महेंद्र, सौरिख क्षेत्र के इसकिया निवासी देवी (55) पत्नी राजेंद्र सिंह, तिर्वा निवासी द्रोपदी देवी (65) पत्नी रामनाथ और ग्राम हरईपुर निवासी कोमल (20) पुत्री संजय सिंह को रेफर किया गया। इनके अलावा जिला अस्पताल और सौ शैय्या अस्पताल से चार से पांच मरीजों को सैफई रेफर किया जाता है।
वर्जन
कार्डियोलॉजी और कैंसर अस्पताल में पद सृजित होने पर ही संचालित हो सकेंगे। प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे जल्द से जल्द ही अस्पतालों का संचालन शुरू हो सके।
-डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
वर्जन
कॉर्डियोलॉजी के संचालन के लिए वित्तमंत्री से वार्ता की गई है, जल्द ही उपकरण और पद सृजित हो जाएंगे, जिसके बाद कॉर्डियोलॉजी का संचालन शुरू हो जाएगा। वहीं, कैंसर अस्पताल संचालन के लिए टाटा मेमोरियल से बात की गई थी। उनके विशेषज्ञों की टीम अस्पताल का निरीक्षण करने के लिए आई थी। अभी टाटा मेमोरियल की ओर से उत्तर नहीं मिला है। उम्मीद है कि कैंसर अस्पताल भी जल्द शुरू होगा।
-असीम अरुण, समाज कल्याण राज्यमंत्री
वर्जन
राजकीय मेडिकल कॉलेज के कॉर्डियोलॉजी और कैंसर अस्पताल के संचालन के लिए जून में वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात की थी और अस्पतालों में पद सृजन कराने की मांग की थी। क्षेत्र की जनता को बेहतर इलाज दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही दोनों अस्पताल संचालित होंगे और मरीजों को इलाज के लिए दूसरे जनपदों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
-कैलाश राजपूत, ऊर्जा राज्यमंत्री