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Kannauj News: काशी की तर्ज पर होगा चौधरियापुर शिव मंदिर का कायाकल्प
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कन्नौज। इत्र और इतिहास की नगरी के चौधरियापुर स्थित प्राचीन बाबा विश्वनाथ मंदिर का कायाकल्प अब काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर किया जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए धर्मार्थ कार्य योजना के तहत 66 लाख रुपये का बजट रविवरा को स्वीकृत किया है। इस महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई है।
समाज कल्याण मंत्री और सदर विधायक असीम अरुण ने चौधरियापुर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास के लिए शासन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। मंत्री के इस प्रयास और मंदिर के स्थानीय महत्व को देखते हुए धनराशि स्वीकृत की गई है। चौधरियापुर का बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आप में अनूठा धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को बनारस के आदि विश्वेश्वर शिवलिंग की प्रतिकृति माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, यह शिवलिंग गंगा नदी की गोद से प्राप्त हुआ था और इसे काशी के प्रतिष्ठित पुजारियों द्वारा स्थापित किया गया था। इस ऐतिहासिक व पौराणिक पृष्ठभूमि के कारण, मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के श्रद्धालुओं के बीच भी गहरी आस्था का केंद्र है। सावन माह में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं, जो जलाभिषेक करते हैं। साल भर प्रत्येक सोमवार को रुद्राभिषेक किया जाता है।
पर्यटन विकास निगम का कार्य
स्वीकृत बजट के माध्यम से, पर्यटन विकास निगम मंदिर परिसर में विभिन्न विकास कार्यों को अंजाम देगा। इसमें मंदिर के मुख्य ढांचे का सुदृढ़ीकरण, परिसर का सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास, और आसपास के क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना शामिल हो सकता है। काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर विकास का अर्थ है कि चौधरियापुर मंदिर को भी एक ऐसे स्तर पर ले जाया जाएगा जहां यह धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बन सके।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि चौधरियापुर शिव मंदिर के कायाकल्प से न केवल धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक वरदान साबित होगा। बेहतर सुविधाओं और आकर्षक परिसर के निर्माण से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक यहां आएंगे। इससे होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलेगा
पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल के अनुसार, जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। पर्यटन विकास निगम इस कार्य को अत्यंत संवेदनशीलता और योजनाबद्ध तरीके से पूरा करेगा, ताकि मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा बनी रहे। इस विकास से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। कार्य तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा।
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समाज कल्याण मंत्री और सदर विधायक असीम अरुण ने चौधरियापुर स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और विकास के लिए शासन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा था। मंत्री के इस प्रयास और मंदिर के स्थानीय महत्व को देखते हुए धनराशि स्वीकृत की गई है। चौधरियापुर का बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आप में अनूठा धार्मिक महत्व रखता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को बनारस के आदि विश्वेश्वर शिवलिंग की प्रतिकृति माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, यह शिवलिंग गंगा नदी की गोद से प्राप्त हुआ था और इसे काशी के प्रतिष्ठित पुजारियों द्वारा स्थापित किया गया था। इस ऐतिहासिक व पौराणिक पृष्ठभूमि के कारण, मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के श्रद्धालुओं के बीच भी गहरी आस्था का केंद्र है। सावन माह में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु आते हैं, जो जलाभिषेक करते हैं। साल भर प्रत्येक सोमवार को रुद्राभिषेक किया जाता है।
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पर्यटन विकास निगम का कार्य
स्वीकृत बजट के माध्यम से, पर्यटन विकास निगम मंदिर परिसर में विभिन्न विकास कार्यों को अंजाम देगा। इसमें मंदिर के मुख्य ढांचे का सुदृढ़ीकरण, परिसर का सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास, और आसपास के क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना शामिल हो सकता है। काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर विकास का अर्थ है कि चौधरियापुर मंदिर को भी एक ऐसे स्तर पर ले जाया जाएगा जहां यह धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बन सके।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि चौधरियापुर शिव मंदिर के कायाकल्प से न केवल धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक वरदान साबित होगा। बेहतर सुविधाओं और आकर्षक परिसर के निर्माण से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक यहां आएंगे। इससे होटल, रेस्तरां और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलेगा
पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल के अनुसार, जिले के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। पर्यटन विकास निगम इस कार्य को अत्यंत संवेदनशीलता और योजनाबद्ध तरीके से पूरा करेगा, ताकि मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा बनी रहे। इस विकास से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। कार्य तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा।