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जाम से निपटने को अब AI का अस्त्रम: अतिक्रमण बनेगा चुनौती, कमिश्नरेट पुलिस ने नीदरलैंड की कंपनी से किया करार
Sat, 01 Aug 2026 09:36 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sat, 01 Aug 2026 09:36 PM IST
सार
कमिश्नरेट की पुलिस ने एआई तकनीक का इस्तेमाल करने वाली नीदरलैंड की कंपनी से करार किया है। लक्ष्मण रेखा, छोटे चौराहे, अतिरिक्त ड्यूटी और कलर जोन स्ट्राइक फेल होने के बाद अब नई कवायद शुरू।
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पुलिस अधिकारियों ने की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महानगर के लोग रोजाना जाम से जूझते हैं। झकरकटी बस अड्डे के सामने पुल पर सड़क घेरकर खड़ीं बसों को हटवाने में डीसीपी ट्रैफिक तक बेबस दिखते हैं। ऐसे में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित एप अस्त्रम की मदद से शहर को जाम मुक्त करने की नई कवायद की जा रही है। हालांकि, इसके पहले की सभी कवायदें असफल रहने के कारण इस पर भी शंका बरकरार है। शहर में अतिक्रमण सबसे बड़ी चुनौती है। इसे एआई कारण के रूप में पहचान तो सकता है लेकिन हटवाना नगर निगम को ही पड़ेगा।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए पहले लक्ष्मण रेखा, छोटे चौराहे, कट बंद करने, अतिरिक्त ड्यूटी और कलर जोन स्ट्राइक की व्यवस्था की जा चुकी है। लक्ष्मण रेखा में वाहनों को रस्सी बांधकर चौराहे से पीछे रखने की तैयारी थी। वहीं, चौराहों के आकार छोटे करने, कट बंद करने, ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाने और ई-रिक्शा व ई-ऑटो को जोनवार चलवाने वाली कलर स्ट्राइक फेल साबित हुई। ऐसे में अब नीदरलैंड की कंपनी आर्कडीज से करार किया गया है। वह एआई की मदद से प्रदेश में पहली बार ट्रैफिक को नियंत्रित करेगी। इसके लिए अस्त्रम नाम का एप लांच करेगी। वह गुजरात के विजयवाड़ा, बंगलूरू और दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही है।
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शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए पहले लक्ष्मण रेखा, छोटे चौराहे, कट बंद करने, अतिरिक्त ड्यूटी और कलर जोन स्ट्राइक की व्यवस्था की जा चुकी है। लक्ष्मण रेखा में वाहनों को रस्सी बांधकर चौराहे से पीछे रखने की तैयारी थी। वहीं, चौराहों के आकार छोटे करने, कट बंद करने, ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाने और ई-रिक्शा व ई-ऑटो को जोनवार चलवाने वाली कलर स्ट्राइक फेल साबित हुई। ऐसे में अब नीदरलैंड की कंपनी आर्कडीज से करार किया गया है। वह एआई की मदद से प्रदेश में पहली बार ट्रैफिक को नियंत्रित करेगी। इसके लिए अस्त्रम नाम का एप लांच करेगी। वह गुजरात के विजयवाड़ा, बंगलूरू और दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही है।
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ऐसे काम करेगा अस्त्रम
कंपनी के श्रीनिवास और दीपांकर ने शनिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया। बताया कि शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या, मिश्रित यातायात, रेल व बस टर्मिनल की गतिविधियां, निर्माण कार्य सुगम यातायात के लिए चुनौतियां हैं। झकरकटी, टाटमिल, जरीब चौकी, गोल चौराहे जैसे स्थानों पर रोजाना जाम के हालात बनते हैं। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि अस्त्रम डेटा विश्लेषण, सूचनाओं के माध्यम से ट्रैफिक संचालन को सक्षम बनाता है। इसमें मौके पर मौजूद ट्रैफिक सिपाही वहां के जाम, दुर्घटना, जाम के कारण जैसी सूचनाएं भरेंगे। वहीं, डायवर्जन, होने वाले आयोजन, खुदे पड़े रास्ते, जलभराव की सूचना फीड हाेने से पहले से ही लोगों को उस रास्ते के बारे में अलर्ट मिल जाएगा।
कंपनी के श्रीनिवास और दीपांकर ने शनिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया। बताया कि शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या, मिश्रित यातायात, रेल व बस टर्मिनल की गतिविधियां, निर्माण कार्य सुगम यातायात के लिए चुनौतियां हैं। झकरकटी, टाटमिल, जरीब चौकी, गोल चौराहे जैसे स्थानों पर रोजाना जाम के हालात बनते हैं। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि अस्त्रम डेटा विश्लेषण, सूचनाओं के माध्यम से ट्रैफिक संचालन को सक्षम बनाता है। इसमें मौके पर मौजूद ट्रैफिक सिपाही वहां के जाम, दुर्घटना, जाम के कारण जैसी सूचनाएं भरेंगे। वहीं, डायवर्जन, होने वाले आयोजन, खुदे पड़े रास्ते, जलभराव की सूचना फीड हाेने से पहले से ही लोगों को उस रास्ते के बारे में अलर्ट मिल जाएगा।
इन फायदों की जताई जा रही उम्मीद
कंपनी प्रतिनिधियों का दावा है कि इस एप की मदद से जाम के साथ ही शहर में मौजूद खाली व भरी पार्किंग, होने वाले आयोजन, रास्ते पर चल रहे खोदाई या बिजली के काम की भी जानकारी मिलेगी। साथ ही हादसा होने पर नजदीकी थाने को सूचना भी पहुंच जाएगी। ट्रैफिक मॉनिटरिंग, हॉटस्पॉट की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। यहां तक कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपने डयूटी स्थान पर हैं या नहीं यह जानकारी भी एप से ही उच्चाधिकारियों तक पहुंच जाएगी।
कंपनी प्रतिनिधियों का दावा है कि इस एप की मदद से जाम के साथ ही शहर में मौजूद खाली व भरी पार्किंग, होने वाले आयोजन, रास्ते पर चल रहे खोदाई या बिजली के काम की भी जानकारी मिलेगी। साथ ही हादसा होने पर नजदीकी थाने को सूचना भी पहुंच जाएगी। ट्रैफिक मॉनिटरिंग, हॉटस्पॉट की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। यहां तक कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपने डयूटी स्थान पर हैं या नहीं यह जानकारी भी एप से ही उच्चाधिकारियों तक पहुंच जाएगी।
शहर में जाम के कारणों और उनके निदान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद ली जाएगी। इस पर काम करने वाली नीदरलैंड की कंपनी संग मिलकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके लिए डीसीपी ट्रैफिक को नोडल बनाया गया है। शुरुआत में कंपनी सर्वे कर कारणों की पहचान करेगी। उम्मीद है जल्द ही इसके सकारात्मक फायदे देखने को मिलेंगे। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर