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हादसे में सगे भाइयों की मौत: दुधारू भैंसों के कारोबार से चलता था परिवार, हादसे ने छीन लिए दो सहारे
Thu, 30 Jul 2026 05:32 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 30 Jul 2026 05:32 PM IST
सार
दो भाई भैंसें खरीदकर लाते थे। दो भाई बिक्री का काम करते थे। अब परिवार की जिम्मेदारी का संकट खड़ा हो गया है।
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मृतकों की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में सगे भाइयों सईद कुरैशी और नासिर कुरैशी की मौत ने एक ऐसे परिवार को तोड़ दिया, जिसकी रोजी-रोटी वर्षों से दुधारू पशुओं के कारोबार से जुड़ी थी। परिवार के चारों भाई मिलकर इस कारोबार को संभालते थे और मेहनत के दम पर घर का खर्च चलाते थे।
परिजनों के मुताबिक बड़े भाई सईद कुरैशी (35) और छोटे भाई नासिर कुरैशी (25) आसपास के क्षेत्रों और बाहर से अच्छी नस्ल की दुधारू भैंसें खरीदकर लाते थे। वहीं उनके भाई शकील कुरैशी और आसिफ कुरैशी कोंच व आसपास के इलाकों में इन पशुओं की बिक्री का काम संभालते थे। चारों भाइयों की मेहनत से परिवार की गाड़ी चल रही थी। गुरुवार को भी दोनों भाई इसी काम के सिलसिले में दुधारू भैंस खरीदने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। सईद की मौत से जहां पत्नी और पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं नासिर की मौत से पत्नी और दो बच्चों का सहारा छिन गया। नासिर का सबसे छोटा बच्चा अभी महज करीब सात माह का है।
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परिजनों के मुताबिक बड़े भाई सईद कुरैशी (35) और छोटे भाई नासिर कुरैशी (25) आसपास के क्षेत्रों और बाहर से अच्छी नस्ल की दुधारू भैंसें खरीदकर लाते थे। वहीं उनके भाई शकील कुरैशी और आसिफ कुरैशी कोंच व आसपास के इलाकों में इन पशुओं की बिक्री का काम संभालते थे। चारों भाइयों की मेहनत से परिवार की गाड़ी चल रही थी। गुरुवार को भी दोनों भाई इसी काम के सिलसिले में दुधारू भैंस खरीदने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। सईद की मौत से जहां पत्नी और पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं नासिर की मौत से पत्नी और दो बच्चों का सहारा छिन गया। नासिर का सबसे छोटा बच्चा अभी महज करीब सात माह का है।
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पिता शरीफ कुरैशी (60) के सामने दो बेटों की मौत का दुख पहाड़ जैसा टूट पड़ा है। चार शादीशुदा बहनों को जब भाइयों की मौत की खबर मिली तो वे भी बदहवास होकर मायके पहुंच गईं। घर में चीख-पुकार मची हुई है। परिजनों का कहना है कि दोनों भाई परिवार के लिए सिर्फ कमाने वाले सदस्य नहीं थे, बल्कि कारोबार की मजबूत कड़ी थे। उनके जाने से जहां परिवार भावनात्मक रूप से टूट गया है, वहीं वर्षों से चल रहे पशुओं के कारोबार पर भी संकट खड़ा हो गया है। मोहल्ले के लोग भी इस दुखद घटना से गमगीन हैं और परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।