Kanpur: कच्चे माल की कालाबाजारी तेज, प्लास्टिक और चमड़ा कारोबार 70% तक ठप, उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा
Kanpur News: ईरान-इजरायल युद्ध के चलते कानपुर के प्रमुख उद्योगों में कच्चे माल की भारी किल्लत और कालाबाजारी शुरू हो गई है। शिपिंग खर्च में 200% की वृद्धि और उत्पादन में 70% तक की गिरावट से उद्यमी अब सरकार की ओर देख रहे हैं।
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अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध तेज होने के बाद अब कच्चे माल की कालबाजारी होने लगी है। ऊंचा भाव देने के बावजूद कारोबारियों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। शहर के हर बड़े उद्योग में उत्पादन ठप होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। निर्यातकों का कहना है कि अगला सप्ताह बेहद अहम होगा। युद्ध न रुका, तो बचा उत्पादन भी ठप हो जाएगा। युद्ध से चमड़ा, केमिकल, कपड़ा, प्लास्टिक उद्योग पर गहरा संकट पड़ चुका है। प्लास्टिक से जुड़ा हर कच्चा माल महंगा होने से इससे जुड़ी हर चीज महंगी हो गई है।
आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से स्थितियां बिगड़ रही हैं। इकाइयों का भुगतान भी रुकने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि अब प्लास्टिक उद्योग कारोबार केवल 30 प्रतिशत और चमड़ा उद्योग का उत्पादन 40 प्रतिशत पर सिमट गया है। केमिकल कारोबार में कालाबाजारी हावी है। ऊपर से शिपिंग शुल्क में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि के कारण पहले से ही निर्यातक परेशान चल रहे थे। चर्म निर्यात परिषद क्षेत्रीय के पूर्व अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि 115 रुपये किलो मिलने वाली ग्लिसरीन अब 250 रुपये में भी नहीं मिल रही है।
70 प्रतिशत कारोबार ठप हो गया है
चमड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले केमिकलों के दाम पहले ही बढ़ा दिए गए थे। अब ऑर्डर देने पर भी केमिकल नहीं दिए जा रहे हैं। कालाबाजारी की जा रही है। टेनरियों में उत्पादन पहले से प्रभावित है। युद्ध बढ़ने का डर और आगे संकट पैदा होने का हवाला देकर कच्चा माल के दाम बढ़ा दिए हैं। इससे उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने बताया कि उद्योगों के सामने हर दिन चुनौती बढ़ती जा रही है। प्लास्टिक उद्योग केवल 30 प्रतिशत ही बचा है। 70 प्रतिशत कारोबार ठप हो गया है।
कच्चा माल महंगा होने से उत्पादों की कीमतों में इजाफा
चमड़ा, केमिकल, गारमेंट, उद्योग के लिए भी संकट का समय है। पेट्रोलियम पदार्थ पर निर्भर उद्योग प्लास्टिक, रसायन कारोबार पर आने वाले समय में और महंगाई बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। निर्यातकों के सामने और बड़ी समस्या हो गई है। इसके अलावा कच्चा माल महंगा होने से उत्पादों की कीमतों में इजाफा हो गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि मध्य पूर्व के बाजारों के लिए शहर से बड़ी संख्या में निर्यात की खेप पहले ही विभिन्न बंदरगाहों तक पहुंच चुकी है।
निर्यातक सरकार से कर रहे हैं मदद की उम्मीद
वर्तमान में बंदरगाह यार्ड और गोदामों में शिपमेंट की प्रतीक्षा कर रही है। जहाज में देरी, रद्दीकरण और शिपिंग शेड्यूल में अनिश्चितता के कारण बंदरगाह प्राधिकरण और रसद ऑपरेटर के तहत कार्गो को स्थानांतरित करने की बात कह रहे हैं। यदि निर्यातकों को इन खेपों को वापस लाने के लिए मजबूर किया जाता है तो उन्हें माल ढुलाई, हैंडलिंग शुल्क और अन्य लॉजिस्टिक खर्च फिर से देने होंगे। समुद्री माल ढुलाई दरों में तेज वृद्धि और अन्य संबंधित शिपिंग शुल्क में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि के कारण वर्तमान में विभिन्न भारतीय बंदरगाहों पर बड़ी संख्या में कंटेनर खड़े हैं। निर्यातक सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं।