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UP: ई-रिक्शा हैं नहीं; ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों ने दिए प्रमाण पत्र, बने सैकड़ों डीएल…RI की जांच में खुलासा

रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 26 Oct 2025 09:30 AM IST
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सार

Kanpur News: आरटीओ कार्यालय से तीन माह में बनाए गए ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस की संख्या पता लगाई गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जुलाई माह में 646 ई रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस, अगस्त में 235 और सितंबर में 137 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए।

Kanpur Erickshaws are not available driving training schools issued certificates hundreds of DL were made
जाजमऊ स्थित पटेल ई रिक्शा ड्राईविंग स्कूल के पते पर खाली पड़ी दुकान - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर के आरटीओ कार्यालय में ई-रिक्शा के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ जिस ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के पास एक भी ई-रिक्शा नहीं उसके बनाए हुए प्रमाणपत्र पर अधिकारी ने आंख बंद धड़ाधड़ सैकड़ों लाइसेंस जारी कर दिए। शिकायत पर आरटीओ जोनल आरआर सोनी ने आरआई आकांक्षा सिंह को भेजकर जांच कराई तो यह हकीकत सामने आई। आरआई के रिपोर्ट के बाद जोनल अधिकारी ने दोनों ट्रेनिंग संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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आरटीओ कार्यालय में कार्य पारदर्शी हो सके इसके लिए शासन ने ज्यादातर कार्यों को ऑनलाइन कर दिया है। इसके बाद भी जिम्मेदार नियमों को दरकिनार कर मनमानी काम कर रहे हैं। शासन ने वर्ष 2021 से ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए चालक का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया था। इसके लिए जिले में दो ई-रिक्शा ट्रेनिंग स्कूलों को शासन ने टेंडर के तहत नामित किया था। इसके तहत मकान नंबर 342 कैलाशनगर जाजमऊ स्थित पटेल ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल और गीतानगर मेट्रो स्टेशन समीप स्थित सहाय ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल को जिम्मा सौंपा गया था।

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आरटीओ जोनल से किसी ने फर्जीवाड़ा की शिकायत की
इन ट्रेनिंग स्कूलों को लाइसेंस आवेदक को 10 दिन की ट्रेनिंग देनी थी, इसके बाद प्रमाणपत्र जारी करना था। उस प्रमाणपत्र को आवेदक आवेदनपत्र के साथ लगाता था, इसके बाद आरटीओ कार्यालय से ई-रिक्शा का लाइसेंस जारी होता था। जिले के अफसर कार्यालय में बैठकर सिर्फ सर्टिफिकेट देखकर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करते रहे। उन्हाेंने एक बार भी ट्रेनिंग स्कूलों की हकीकत जानने की जरूरत नहीं समझी। एक माह पहले आरटीओ जोनल आरआर सोनी से किसी ने फर्जीवाड़ा की शिकायत की।

एक ई-रिक्शा था, वह चोरी हो गया
उन्होंने आरआई आकांक्षा सिंह को दोनों ट्रेनिंग सेंटरों की जांच करने के निर्देश दिए। आरआई जाजमऊ स्थित पटेल ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल पहुंचीं तो मौके पर एक भी ई-रिक्शा नहीं मिला। पूछताछ में ट्रेनिंग संचालक ने बताया कि उसके पास एक ई-रिक्शा था वह चोरी हो गया। जब आरआई ने थाने में दर्ज रिपोर्ट की कॉपी मांगी] तो कुछ नहीं दिखा पाया। इसके बाद आरआई गीतानगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सहाय ई-रिक्शा ट्रेनिंग स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचीं। मौके पर एक रिक्शा खड़ा मिला।

नोटिस जारी कर जवाब-तलब
कागजातों की जांच की तो पता चला कि 2022 से उसका फिटनेस नहीं कराया। बीमा और टैक्स कुछ नहीं था। आरआई दोनों संचालकों को हिदायत देकर वापस लौट गईं। आरआई ने रिपोर्ट जब जोनल अधिकारी को सौंपी गई तो उन्होंने ई-रिक्शा के लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी। बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जोनल अधिकारी ने दोनों ट्रेनिंग सेंटरों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। मंडल के आरटीओ को पत्र जारी कर ट्रेनिंग स्कूलों की रिपोर्ट भी मांगी है।

जुलाई में 646 ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस जारी हुए

आरटीओ कार्यालय से तीन माह में बनाए गए ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस की संख्या पता लगाई गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जुलाई माह में 646 ई रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस, अगस्त में 235 और सितंबर में 137 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए। 20 सितंबर के बाद से एक भी ई-रिक्शा ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनाया गया।

कैलाशनगर का ट्रेनिंग स्कूल दो साल से बंद
आरआई की रिपोर्ट के बाद अमर उजाला की टीम ने ई-रिक्शा ट्रेनिंग स्कूलों की पड़ताल की। टीम जाजमऊ के कैलाशनगर स्थित मकान नंबर 342 पटेल ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के पते पर पहुंची। वहां पर कोई स्कूल संचालित नहीं मिला। पड़ोस में रहने वाले एक दुकानदार ने बताया कि दो साल पहले यहां पर ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल चलता था। साथ में एक ई-रिक्शा एजेंसी संचालित थी। वह खुद को आरटीओ का कर्मचारी बताते थे।

दो साल से कोई प्रमाणपत्र नहीं जारी किया
इसके बाद उन्होंने एजेंसी बंद कर दी और खुद को लखनऊ में शिफ्ट होने की बात कही। टीम ने गीतानगर मेट्रो स्टेशन के समीप स्थित सहाय ई-रिक्शा ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल की पड़ताल की तो दुकान के बाहर ट्रेनिंग स्कूल का बोर्ड लगा पाया। स्कूल संचालक ने बताया कि मेरे ई-रिक्शा के कागजात तैयार नहीं हैं। मैंने दो साल से कोई प्रमाणपत्र नहीं जारी किया। अब किसके प्रमाणपत्र लगकर लाइसेंस बन रहे इसकी जानकारी नहीं है।

शिकायत के बाद मैंने ट्रेनिंग स्कूलों की आरआई को भेजकर जांच कराई थी। जिनके पास ई-रिक्शा नहीं थे, उनके प्रमाणपत्रों पर लाइसेंस बनाए जा रहे थे। यह जिम्मेदारों की लापरवाही है। दोनों ट्रेनिंग संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके बाद कार्रवाई होगी। मंडल के आरटीओ को पत्र जारी कर ट्रेनिंग संचालकों की रिपोर्ट मांगी है।  -आरआर सोनी, जोनल आरटीओ

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