Kanpur: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, भाड़ा बढ़ा और माल गोदामों में डंप, कारोबारियों को लगा 80 करोड़ का झटका
Kanpur News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से कानपुर के निर्यातकों को करीब 80 करोड़ रुपये का झटका लगा है। शिपिंग कंपनियों द्वारा भाड़ा 40 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने और नए ऑर्डर रोकने से तैयार माल गोदामों में ही डंप हो गया है।
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अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कानपुर के कारोबारियों पर फिर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद शिपिंग कंपनियों ने पहले तो नए ऑर्डर बुक करना बंद कर दिया इसके अलावा कुछ कंपनियों ने युद्ध जोखिम की बात कहकर भाड़ा भी बढ़ा दिया। जो भाड़ा पहले 40 हजार था, वो एक लाख रुपये हो गया है। दूसरी ओर तैयार माल गोदामों में रोक दिया गया है, जिससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी फंस गई।
इन हालात में शहर के कारोबारियों को करीब 80 करोड़ का झटका लगा है। निर्यातकों ने सरकार से राहत और सहायता की मांग की है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के बाद खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में नए सौदे होने लगे थे। पुराने ऑर्डर भी भेजे जा रहे थे। मांग बढ़ने पर कानपुर के निर्यातकों ने उत्पादन तेज कर दिया था, लेकिन दोबारा तनाव बढ़ने के बाद निर्यात क्षेत्र में फिर अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
नए ऑर्डर की बुकिंग रोक दी
कुछ समय पहले कानपुर के निर्यातकों ने खाड़ी देशों को समुद्री मार्ग से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शुरू की थी। फिलहाल कंसाइनमेंट को मौजूदा स्थिति में रोकने के निर्देश दिए गए हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि शिपिंग कंपनियों ने नए ऑर्डर की बुकिंग रोक दी है। इसका सबसे ज्यादा असर उन कारोबारियों पर पड़ा है जिनके कंसाइनमेंट इसी सप्ताह रवाना होने थे। तैयार माल रुकने से शहर के कारोबारियों की पूंजी फंस गई है।
आपूर्ति व्यवस्था हो रही है प्रभावित
आयात-निर्यात विशेषज्ञ जफर-फिरोज ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। भाड़े में वृद्धि, अतिरिक्त बीमा लागत और जहाजों की आवाजाही में देरी के कारण निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुरक्षा कारणों से कई शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त शुल्क लगा रही हैं जबकि कुछ वैकल्पिक मार्गों से जहाजों को भेज रही हैं। इससे माल पहुंचने में अधिक समय लग रहा है और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है।