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कंस वध मेला उपद्रव: माहौल तनावपूर्ण, भाजपा को लग सकता है बड़ा झटका, जारी है बैठकों का दौर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:05 AM IST
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हमीरपुर मेला उपद्रव
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के हमीरपुर जिले में कंस वध मेला की झांकियों के रास्ते को लेकर हुए विवाद के बाद गुरुवार को तीसरे दिन भी कस्बे में तनावपूर्ण माहौल रहा। एडीजी ने डीआईजी, डीएम व एसपी के साथ मार्च किया। साप्ताहिक बाजार बंदी का दिन होने के कारण कस्बे के ज्यादातर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे और कई दुकानों के बाहर काले झंडे लगे रहे। कस्बे के स्कूल भी बंद रहे। बुद्धजीवियाें ने कस्बे में शांति का माहौल बनाने के तमाम प्रयास किए, मगर स्थिति में अभी तक कोई खास सुधार नहीं है।
हमीरपुर मेला उपद्रव
- फोटो : अमर उजाला
कंस वध मेला के आयोजक व समर्थक पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए उनके खिलाफ आक्रोश जारी रखे हैं। जिसको देखते कस्बे में उच्च अधिकारी डेरा डाले हैं और पुलिस बल स्थिति को नियंत्रित करने में लगा है। मेला समर्थकों के आक्रोश के चलते कस्बे में गुरुवार को भी मुख्य बाजार की अधिकांश दुकानें बंद रहीं और दुकानों के बाहर काले झंडे लगाकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया गया। वहीं कस्बे की इक्का दुक्का दुकानें खुली रही हैं। हालांकि लगातार दो दिन से कस्बे में बंदी को देखते हुए प्रशासन व्यापार मंडल के पदाधिकारियों को दुकानें खुलवाने के लिए प्रेरित किया।
हमीरपुर मेला उपद्रव
- फोटो : अमर उजाला
व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश निगम दद्दा, युवा अध्यक्ष जेके गुप्ता, सुधीर निगम, रजा बजाज आदि लोगों ने दुकानें खोलने के लिए कहा, लेकिन कई दुकानदारों ने विरोध जताते हुए अपनी मर्जी से दुकानें बंद रखने की बात उनसे कही। इस संबंध में बंदी के समर्थक दुकानदारों का कहना है कि जब तक कंस वध मेला नहीं कराया जाएगा। तब तक दुकानें नहीं खुलेंगी। नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश निगम दद्दा ने कहा व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ वह स्वयं बाजार की दुकानें खुलवाने के लिए गए, लेकिन लोगों ने दुकानों के बाहर काले झंडे लगा दुकान खोलने से एतराज किया। उन्होंने कहा दुकानें खोलना अथवा न खोलना दुकानदारों का निजी मामला है। वहीं सतर्कता के चलते गुरुवार को भी एडीजी एसएन साबत ने डीआईजी मनोज तिवारी, एसपी एके सिंह व कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मार्च किया है।
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हमीरपुर मेला उपद्रव
- फोटो : अमर उजाला
जिले में कई महीनों से भाजपा नेताओं में गुटबाजी हावी है। जो मौदहा कस्बे में ऐतिहासिक कंस वध मेला में झांकियाें के रास्ते को लेकर हुए बवाल के बाद भी सामने आई। एक पक्ष तो मुंह की खाने के बाद तिलमिला गया है। फिलहाल दोनों गुट बड़े नेताओं के बीच अपना पक्ष रख रहे हैं। कुछ पदाधिकारी तो बैठक कर सामूहिक इस्तीफा देने की रणनीति बना रहे हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार के बावजूद कंस वध मेला की झांकियां निकालने में असफल रहने से कुछ नेताओं में रोष हैं। मौदहा में जुलूस निकालने की इनकी जिद प्रशासन ने नाकाम कर दी है। साथ ही मुकदमे भी दर्ज हुए। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को झटका लगा है।
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हमीरपुर मेला उपद्रव
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भाजपा के अन्य नेताओं के साथ उनके अनुसांगिक संगठन के अधिकांश पदाधिकारी बेहद गुस्से में हैं। फिलहाल बैठकों का दौर जारी है। एक साथ इस्तीफा देकर प्रदेश स्तरीय नेताओं पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। चर्चा है कि इसकी शुरुआत भाजपा के जिला स्तरीय पदाधिकारियों से होगी। इसी के बाद अन्य अनुसांगिक संगठनों के पदाधिकारी इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं। वहीं ऐतिहासिक कंस वध मेला न हो पाने से व्यापारी वर्ग भी निराश हैं। इस मुद्दे पर भाजपाइयों की गुरुवार को बैठक हुई और आरपार की लड़ाई का मन बनाकर करीब 30 पदाधिकारी लखनऊ के लिए रवाना हो गए। यह पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय व संगठन महामंत्री सुनील बंसल से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष संतबिलास शिवहरे ने बताया पार्टी के पदाधिकारी लखनऊ गए हैं।