'सपा में सियासी संग्राम' का 'FLASHBACK', जानिए कहां से शुरू हुई चाचा-भतीजे की लड़ाई
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बता दें यूपी विधानसभा चुनाव के बाद से शिवपाल यादव बार-बार यही कहते नजर आए हैं कि अखिलेश को अब अपना वादा पूरा करना चाहिए। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को मुलायम सिंह को सौंप देना चाहिए। वहीं इस पर रामगोपाल जो अखिलेश खेमे में हैं, शिवपाल पर कई बार निशाना साध चुके हैं। उन्होंने शिवपाल को पार्टी का संविधान पढ़ने की नसीहत दे डाली थी।
यह लड़ाई आगे किस मुकाम तक पहुंचती है यह कयास लगा पाना अभी थोड़ा मुश्किल साबित हो रहा है क्योंकि चुनाव से पहले भी ऐसे ही यादव परिवार में झगड़ा शुरू हुआ था जो चुनाव नजदीक आने तक शांत हो गया था। लेकिन अब एकबार फिर से समाजवादी पार्टी में संग्राम छिड़ गया है। अब पार्टी टूटती दिखाई दे रही है। अखिलेश खुद अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल, हम आपको सपा संग्राम के फ्लैशबैक में ले चलते हैं जहां आपको पता चलेगा कि आखिर यह संग्राम कहां से शुरू हुआ...
पेश है सपा के संग्राम का फ्लैशबैक-
सितंबर 2016 में सामने आई चाचा-भतीजे की खींचतान
यादव फेमिली में घमासान पहली बार सितंबर 2016 में सबके सामने आया था। 12 सितंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दीपक सिंघल को मुख्य सचिव से हटाकर राहुल भटनागर की ताजपोशी की, तो शाम को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल सिंह यादव को कमान सौंप दी। शह-मात का खेल देर रात तक चला और आखिर में अखिलेश ने बतौर मुख्यमंत्री शिवपाल यादव को सौंपे सिंचाई, लोक निर्माण, सहकारिता व राजस्व जैसे अहम विभाग लेते हुए सरकार से कद घटा दिया।
यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में सत्ता के लिए सियासी संग्राम उस समय सार्वजनिक हो गया जब सीएम अखिलेश यादव ने खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। बाद में शिवपाल सिंह यादव से लोक निर्माण विभाग ले लिया। इसके बाद चाचा और भतीजे में सियासी लड़ाई तेज हो गई।
मुलायम ने छीना अखिलेश से पद तो अखिलेश ने शिवपाल के पर कतरे
पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सुलह के प्रयास तेज कर दिए और संदेश दिया कि उनके जीते जी सपा का विभाजन नहीं हो सकता। उन्होंने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया और भाई शिवपाल को कमान दे दी। सुलह के तहत बर्खास्त सभी मंत्रियों को वापस लाने पर सहमित बनी, पर सियासत के और दांव बाकी थे। इस बीच रामगोपाल यादव को पार्टी से निकाल दिया गया।
इस बीच शिवपाल और अखिलेश के बीच शह और मात का खेल चलता रहा। कई बार अखिलेश और शिवपाल समर्थक भिड़े वहीं कई लोगों के इस्तीफे हुए तो कई को बर्खास्त किया गया।
इस बीच अक्टूबर में अखिलेश के पक्ष में उस वक्त एमएलसी उदयवीर और राम गोपाल यादव ने मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखी। उदयवीर ने अपनी चिट्ठी में शिवपाल को अखिलेश की सौतेली मां का चेहरा बताया तो रामगोपाल ने ये तक लिखा कि नेता जी पर राक्षसी ताकतों का साया है। नाराज मुलायम सिंह ने उदयवीर को पार्टी से बाहर कर दिया वहीं रामगोपाल से सारे पद छीनने के साथ उन्हें भी पार्टी से निकाल दिया। इस बीच शिवपाल और अखिलेश के बीच तल्खियां और बढ़ गईं और मुलायम अखिलेश से नाराज हो गए।
मुलायम के सामने रोए अखिलेश, शिवपाल ने छीना माइक
दोनों के बीच बात करवाने के लिए मुलायम सिंह ने पार्टी मुख्यालय में बैठक की जिसमें अखिलेश मुलायम सिंह और पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने रो पड़े। वहीं शिवपाल भी अपनी बात रखते समय कई बार भावुक हुए।
मुलायम ने अखिलेश को फटकार लगाई और बैठक खत्म होने के बाद शिवपाल और अखिलेश के गले मिलवाने की कोशिश की। इसी बीच मंच पर अखिलेश ने कुछ कहने की कोशिश की तो शिवपाल ने माइक छीन लिया और दोनों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं भी हुई।
इसके बाद नवंबर में रजत जयंती समारोह के दौरान मुलायम के समधी लालू प्रसाद यादव ने मंच पर ही शिवपाल और अखिलेश को मिलवाने की कोशिश की जिस पर सबके सामने अखिलेश ने शिवपाल के पैर छुए और शिवपाल ने भी आशीर्वाद दिया।
वहीं रजत जयंती पर शिवपाल ने भरी सभा में कहा था, अखिलेश मुझे सीएम नहीं बनना है, खून मांगोगे खून भी दूंगा। शिवपाल ने कहा था, मेरा कितना भी अपमान कर लेना कितनी बार भी बर्खास्त कर लेना पर मैं पीछे हटने वाला नहीं। उन्होंने अखिलेश की तारीफ की और कहा कि हमने में चार साल अखिलेश को पूरी मदद की है।
चुनाव में प्रत्याशियों की दो-दो सूचियां जारी होने से बढ़ा कन्फ्यूज़न
इससे पहले मुलायम-शिवपाल पहले ही 325 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर चुके थे। यानि प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल की ओर से अब तक 393 उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। अखिलेश ने हर उस दावेदार को टिकट दे दिया जिसे मुलायम-शिवपाल ने खारिज कर दिया था। अब कई सीटों पर तो सपा से दो-दो प्रत्याशी हो गए। मुलायम ने 30 दिसंबर को अखिलेश और रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया लेकिन अगले ही दिन 31 दिसंबर को दोनों का निष्कासन रद्द कर दिया गया। झगड़े का परिणाम निकला विधानसभा चुनाव मे हार के रूप में।
झगड़े की वजह से यूपी विधानसभा चुनाव में मिली हार
अखिलेश को बाहर करने के लिए रचा गया षड्यंत्र
यूपी में सपा का 'सियासी संग्राम', अखिलेश पहले हुए बाहर फिर अंदर
इसके बाद पार्टी टूटने के कगार पर आ गई। मुलायम सिंह ने पार्टी के सिंबल और पार्टी पर दावा ठोंका वहीं अखिलेश खेमे ने भी साइकिल पर दावेदारी के लिए चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। कई कागजों और दस्तावेजों का पुलिंदा ईसी को सौंपने के बाद फैसला अखिलेश के पक्ष में गया।
कांग्रेस के साथ गठबंधन के फैसले पर मुलायम सिंह एक बार फिर अखिलेश से नाराज हुए। हालांकि उन्हें मनाया गया तब वह जनसभाएं करने निकले। वहीं मैनपुरी में वोट के दौरान बूथ पर झड़प हुई तो शिवपाल ने फिर इसके पीछे इशारों में अखिलेश को दोषी ठहराया और कहा कि हमें हरवाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शिवपाल तो चुनाव जीत गए लेकिन सपा बुरी तरह चुनाव हारी जिसके बाद शिवपाल ने कहा, घमंड की हार हुई।
वहीं शिवपाल ने इस बीच यूपी के नए सीएम योगी से मुलाकात की और अखिलेश से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने की मांग की। इसी क्रम में उन्होंने शुक्रवार को इटावा में हुई एक बैठक के दौरान जल्द सेक्युलर मोर्चा खोलने का ऐलान किया।