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सूर्य ग्रहण 2018: ग्रहण काल में करेंगे ये काम ताे मृत्यु के बाद भी नर्क में भाेगने हाेंगे ये कष्ट
Thu, 08 Feb 2018 02:25 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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Updated Thu, 08 Feb 2018 02:25 PM IST
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ग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। इस दाैरान भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुंतुद नरक में वास करता है। ग्रहण में 3 प्रहर पूर्व यानी 9घंटे भोजन नहीं करना चाहिए। एेसा करने से व्यक्ति मृत्यु के बाद भी कष्ट भाेगता है।
ग्रहण वेध के पहले कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं
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बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (4.30 घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए। ग्रहण वेध के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए।
ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए
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ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए। ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देवपूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्र सहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियां सिर धोए बिना भी स्नान कर सकती हैं। ग्रहण पूर्ण होने पर जिसका ग्रहण हो, उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
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ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए
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ग्रहणकाल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए, बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए।
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गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए
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ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मलमूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन वर्जित हैं। ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए। 3 दिन या 1 दिन उपवास करके स्नान-दानादि का ग्रहण में महाफल है किंतु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रांति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।
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