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Kanpur News: एक तहसीलदार पर मेहरबान सिस्टम, 26 हजार परवाने फाइलों में दबे
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कानपुर। कामकाज की सुस्त रफ्तार, निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं लेकिन सदर तहसीलदार विनय द्विवेदी पर जिम्मेदारियों का बोझ लाद दिया गया। सदर तहसील में काम का बोझ ज्यादा होने के बावजूद जिले के उच्च अधिकारियों ने उसी तहसीलदार को नरवल तहसील और सदर न्यायिक तहसीलदार की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी। नतीजा यह रहा कि सदर तहसील में लंबित परवानों की संख्या 22 हजार के पार और नरवल तहसील में चार हजार से ज्यादा हो गई।
बीते दो माह में जब लंबित मामलों की संख्या बढ़ी तो नरवल तहसीलदार का चार्ज बिल्हौर एसडीएम न्यायिक सत्यपाल प्रजापति को गुरुवार को सौंपा गया। हालांकि, अभी न्यायिक तहसीलदार का चार्ज सदर के पास ही है।
अक्तूबर 2025 में सदर तहसीलदार न्यायिक कैलाश नाथ के कोर्ट में एक कार्यरत प्राइवेट कर्मी का फाइल के नाम पर पैसे लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। मामले की जांच के बाद जिलाधिकारी ने न्यायिक तहसीलदार को सदर तहसील से हटाकर दूसरी तहसील का जिम्मा सौंपने का आदेश दिया था। वहीं, सदर तहसीलदार न्यायिक का जिम्मा विनय द्विवेदी को सौंपा था। नवंबर में नरवल तहसीलदार विनीता पांडेय को शासन ने कौशांबी के जमीन मामले में दोषी पाकर निलंबित कर दिया जिसके बाद यहां का जिम्मा भी सदर तहसीलदार को सौंप दिया था। तहसीलदार ने नरवल तहसील के लिए दो दिन बैठने का रोस्टर भी तय किया लेकिन तहसीलदार वहां ज्यादा समय ही नहीं दे पाए। इसका सबसे बड़ा कारण सदर तहसील का ज्यादा काम और कोर्ट के मामले रहे। आदेश कागजों तक सीमित रहे और नरवल तहसील में आने वाले फरियादी निराश लौटते रहे। धीरे-धीरे वहां भी लंबित परवानों की संख्या चार हजार के पार पहुंच गई। वहीं, सदर तहसील में लंबित परवानों की संख्या 22 हजार को पार कर गई। जुलाई 2025 से अक्टूबर माह तक विशेष अभियान चलाकर करीब 19 हजार परवानों का निस्तारण कराया गया लेकिन अभियान खत्म होते ही सिस्टम फिर सुस्त पड़ गया। न नियमित समीक्षा हुई, न जवाबदेही तय की गई। नतीजतन तीन महीनों में फिर से हजारों परवाने लंबित हो गए।
वर्जन
एसआईआर अभियान के कारण काम ज्यादा है। पहले अभियान चलाया गया था तो परवानों के मामले लगभग निस्तारित हो गए थे। अब निस्तारण के लिए फिर से अभियान चलाया जाएगा। - अनुभव सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर
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बीते दो माह में जब लंबित मामलों की संख्या बढ़ी तो नरवल तहसीलदार का चार्ज बिल्हौर एसडीएम न्यायिक सत्यपाल प्रजापति को गुरुवार को सौंपा गया। हालांकि, अभी न्यायिक तहसीलदार का चार्ज सदर के पास ही है।
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अक्तूबर 2025 में सदर तहसीलदार न्यायिक कैलाश नाथ के कोर्ट में एक कार्यरत प्राइवेट कर्मी का फाइल के नाम पर पैसे लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। मामले की जांच के बाद जिलाधिकारी ने न्यायिक तहसीलदार को सदर तहसील से हटाकर दूसरी तहसील का जिम्मा सौंपने का आदेश दिया था। वहीं, सदर तहसीलदार न्यायिक का जिम्मा विनय द्विवेदी को सौंपा था। नवंबर में नरवल तहसीलदार विनीता पांडेय को शासन ने कौशांबी के जमीन मामले में दोषी पाकर निलंबित कर दिया जिसके बाद यहां का जिम्मा भी सदर तहसीलदार को सौंप दिया था। तहसीलदार ने नरवल तहसील के लिए दो दिन बैठने का रोस्टर भी तय किया लेकिन तहसीलदार वहां ज्यादा समय ही नहीं दे पाए। इसका सबसे बड़ा कारण सदर तहसील का ज्यादा काम और कोर्ट के मामले रहे। आदेश कागजों तक सीमित रहे और नरवल तहसील में आने वाले फरियादी निराश लौटते रहे। धीरे-धीरे वहां भी लंबित परवानों की संख्या चार हजार के पार पहुंच गई। वहीं, सदर तहसील में लंबित परवानों की संख्या 22 हजार को पार कर गई। जुलाई 2025 से अक्टूबर माह तक विशेष अभियान चलाकर करीब 19 हजार परवानों का निस्तारण कराया गया लेकिन अभियान खत्म होते ही सिस्टम फिर सुस्त पड़ गया। न नियमित समीक्षा हुई, न जवाबदेही तय की गई। नतीजतन तीन महीनों में फिर से हजारों परवाने लंबित हो गए।
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एसआईआर अभियान के कारण काम ज्यादा है। पहले अभियान चलाया गया था तो परवानों के मामले लगभग निस्तारित हो गए थे। अब निस्तारण के लिए फिर से अभियान चलाया जाएगा। - अनुभव सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर
